16 देशों के विद्यार्थियों ने समझी गांधी शैली

१६ देशों के 33 विद्यार्थियों ने नेतृत्व व संघर्ष की गांधी शैली (गांधीयन स्टाइल ऑफ लीडरशिप एंड कन्फल्किट) पाठ्यक्रम पर अपने प्रोजेक्ट पूरे किए। इस पाठय

By: मुकेश शर्मा

Published: 22 Aug 2017, 03:55 AM IST

अहमदाबाद।१६ देशों के 33 विद्यार्थियों ने नेतृत्व व संघर्ष की गांधी शैली (गांधीयन स्टाइल ऑफ लीडरशिप एंड कन्फल्किट) पाठ्यक्रम पर अपने प्रोजेक्ट पूरे किए। इस पाठयक्रम में इन विद्यार्थियों ने ‘भारत में अध्ययन’ (स्टडी इन इंडिया) व ‘नमस्ते प्रोजेक्ट’ के तहत यह पढ़ाई की।

पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय (पीडीपीयू) में एक महीने की अवधि के इस पाठयक्रम में 32 घंटे क्लासरूम की पढ़ाई हुई वहीं 40 घंटे का सोशल प्रोजेक्ट किया गया। इससे इन विद्यार्थियों ने गांधीजी के जीवन, विचारधारा, सत्य व अहिंसा के प्रयोग को लेकर जानकारी प्राप्त की। चीन के वेन हाओ लिआओ के अनुसार क्लासरूम में उन्हें लीडरशिप व संघर्ष समाधान के लिए हिंसक पद्धति के खिलाफ स्वदेशी, स्वराज व सत्याग्रह जैसे गांधीजी के विचारों के उपयोग की समझ पर विचार-विमर्श किया गया। यूनान के एंड्रियास काउलोपाउलोस ने कहा कि आज आतंकवाद, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन जैसे विश्व के ज्वलंत मुद्दों का निराकरण गांधीजी के सुझाए गए मार्ग से किस तरह किया जा सकता है।

पीडीपीयू के अंतरराष्ट्रीय संबंंध विभाग के प्रभारी डॉ निगम दवे के मुताबिक वे युवकों को शिक्षित ग्लोबल सिटीजन बनाने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। ऐसे युवकों को भौगोलिक व सांस्कृतिक सीमाओं से परे एक दूसरे के सहयोग से वैश्विक समस्याओं व चुनौतियों का समाधान लाया जा सकता है। प्रोजेक्ट के प्रभारी वरद ठक्कर ने कहा कि गांधी पर पाठ्यक्रम एक नई पहल है और प्रत्येक विद्यार्थी को इससे लाभ हुआ है।

पाठ्यक्रम के संयोजक फाल्गुन कुमार ने बताया कि विभिन्न धर्मों व संस्कृति के कई देशों के युवकों से गांधीवादी विचारधारा के बारे में बातचीत करना काफी रोचक और चुनौतीपूर्ण भी था। इस प्रोजेक्ट में चीन, आस्टे्रलिया, यूनान, मि, ईरान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, मोरक्को, पोलैण्ड, रूस, ताईवान, थाईलैण्ड, ऑस्ट्रिया, बहरीन व ट्यूनिशिया के विद्यार्थी शामिल थे।

रोजगार मेले में भर्ती युवकों को निकाला

सिलवासा. मई में आयोजित रोजगार मेले में भर्ती किए अधिकांश युवकों को नौकरी से निकाल दिया है। रोजगार मेले में प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव से करीब पांच हजार युवकों को कम्पनियों ने नौकरी दी थी, लेकिन कईयों को कंपनी में एक दिन भी ड्यूटी करने का अवसर नहीं मिला। कंपनी द्वारा निर्धारित शर्ते पूरी नहीं करने के बहाने से कंपनी प्रबंधकों ने अधिकांश युवकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

मुकेश शर्मा Reporting
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