शिक्षक दिवस पर विशेष: विद्यार्थियों को प्रमाणिकता के पाठ पढ़ाने वाली वनीता को श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड

Teachers Day, Special news, Vanita rathod, headteacher, rajkot school, best teacher award विद्यालय में लगाए 2 हजार पौधे, जन्मदिन पर पुस्तकों की भेंट से बना पुस्तकालय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जिम्मेदारी की देती हैं शिक्षा

By: nagendra singh rathore

Published: 05 Sep 2020, 08:56 PM IST

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ उन्हें प्रमाणिकता के पाठ पढाकर चहुंमुखी विकास की कारगर पहल करने पर राजकोट के मोकाजी सर्कल के समीप स्थित श्री विनोबा भावे प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल नंबर 93 की मुख्य शिक्षिका (प्रधानाचार्य) वनीता राठौड को इस वर्ष २०२० का श्रेष्ठ शिक्षक (बेस्ट टीचर) अवार्ड के लिए चुना गया।
शिक्षक दिवस पर पांच सितंबर को गांधीनगर में उन्हें राज्यपाल आचार्य देवव्रत व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के हाथों यह अवार्ड प्रदान किया गया। वैसे इससे पहले भी वे कई नेशनल और राज्य स्तरीय अवार्ड जीत चुकी हैं।
वनीता राठौड़ को इस अवार्ड के लिए चुने जाने का पीछे उनके बेहतर कार्य हैं। वर्ष २०१२ में राजकोट के इस विद्यालय में जब नियुक्त हुई तब स्कूल में बच्चों की संख्या ३०० थी आज वर्ष २०२० स्कूल में ६५० से ज्यादा विद्यार्थी हैं। डी ग्रेट की स्कूल आज ए ग्रेड है। स्कूल में २००० पौधे लगे हैं। तीन कमरों का विद्यालय आठ सालों में सरकारी ग्रांट के साथ निजी दानदाताओं से १८ लाख रुपए दान में लेकर 12 कमरों वाला बना दिया है। स्कूल में पहले केवल एक ही शौचालय था आज छात्र और छात्राओं के लिए अलग शौचालय हैं।
वनीता राठौड़ बताती हैं कि एक दिन शिक्षक बच्चों के नहीं पढऩे पर एक बच्चे पर नाराज हो रहे थे। उन्होंने बच्चे से पूछा तो पता चला कि उसे बराबर दिखाई ही नहीं दे रहा है। जिसके बाद उन्होंने न सिर्फ बच्चे के आंखों की जांच कराई। पता चला कि उसकी दोनों आंखों में जामर है। उसका ऑपरेशन करवाकर उसे चश्मे दिलाए। कक्षा के ४७ बच्चों की जांच कराई तो ३७ को चश्मा निकला। ३०० बच्चों में से २३७ को चश्मा निकला। सभी को दो चश्मे दिलवाए। ऐसे ही छात्राएं कुछ दिन अनुपस्थित रहती थीं। पता चला कि पीरिएड्स के दौरान वे नहीं आती हैं, तो उन्होंने स्कूल में ही सेनेटरी पेड वेन्डिंग मशीन लगवाई। 2014 में यह पहला स्कूल था, जिसमें यह मशीन लगाई गई थी। छात्राओं की अनुपस्थित घटी। प्रमाणिकता के पाठ पढ़ाने के लिए उन्होंने स्कूल में ही प्रमाणिकता की दुकान शुरू की, जिसमें स्टेशनरी होती है, जो बाजार से कम कीमत पर मिलती है। ताला नहीं लगाता होता, स्कूल के बच्चे उसमें से रेट के हिसाब से पेन पेंसिल व अन्य वस्तुएं लेते हंै और उसके रुपए रख देते हैं कभी एक रुपए की गड़बड़ी नहीं हुई। पौधारोपण, व्यसनमुक्ति, महानुभावों के जन्मदिन पर उनके बारे में जानकारी दी जाती है। हर दिन को स्कूल में मनाया जाता है। कोरोना संकट काल में तीन माह राशन किट बनाकर प्रदान कीं।
समाचार पत्रों के जरिए वे बच्चों को मूलअक्षरों की जानकारी देती हैं। बच्चे की प्रतिमा को पहचान कर उसे संगीत, चित्रकला, नाटक, गायन, खेलकूद में और प्रशिक्षित करती हैं। यही वजह है कि बच्चों का चहुमुखी विकास भी हो रहा है और स्कूल में बच्चे बढ़ रहे हैं। प्राचार्य होने के बावजूद वे नियमित कक्षाएं लेती हैं। कंप्यूटर क्लास हो या प्रयोगशाला उसमें ताला नहीं लगातीं ताकि बच्चे झिझकें नहीं। वे उसे जब देखेंगे प्रयोग करेंगे तभी तो सीखेंगे। वनीता राठौड़ को खुद शॉर्ट फिल्में बनाने का शौक है। उनकी कई शॉर्ट फिल्मों ने अवार्ड जीते हैं।सच्ची घटना पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म पुण्य को एनसीआरटीई की ओर से 2018 में नेशनल स्तर पर सम्मानित किया गया मुकेश खन्ना ने अवार्ड दिया। यही वजह है कि इन्हें चार बार अलग अलग संस्थाओं की ओर से नेशनल टीचर अवार्ड, तीन बात नेशनल इनोवेटिव टीचर अवार्ड, 7 बार बेस्ट प्राचार्य अवार्ड से नवाजा जा चुका है। कविता लिखने पढऩे का भी शौक है। दो पुस्तकेंलिख चुकी हैं।

चॉकलेट की बंद तो बन गई लाइब्रेरी

जिस विद्यार्थी का जन्मदिन होता है वो अक्सर उस दिन चॉकलेट लेकर आता है। ये प्रथा बंद कर उन्होंने बच्चे से एक पुस्तक लेकर आने को कहा। शिक्षक को जन्मदिन वाले दिन 10 पुस्तकें स्कूल में दान में देने की प्रथा शुरू की। आज विद्यार्थियों की ओर से 8 हजार पुस्तकें स्कूल को दान में मिल चुकी हैं। पूरी लाइब्रेरी है। दान में पांच कबाट भी दाताओं ने दिए हैं जो सभी पुस्तकों से भरे हैं।

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