कोर्ट ने कहा - हलफनामा पेश करे निर्वाचन आयोग

Mukesh Sharma

Publish: Nov, 15 2017 05:27:48 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
कोर्ट ने कहा - हलफनामा पेश करे निर्वाचन आयोग

गुजरात उच्च न्यायालय ने क्षतिग्रस्त वीवीपैट (वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) पर केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से हलफनामा पेश करने को कहा है। इस मामले की अगली

अहमदाबाद।गुजरात उच्च न्यायालय ने क्षतिग्रस्त वीवीपैट (वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) पर केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से हलफनामा पेश करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 नवम्बर को रखी गई है।केन्द्रीय निर्वाचन आयोग ने सोमवार को न्यायाधीश अकील कुरैशी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मौखिक रूप से कहा कि क्षतिग्रस्त वीवीपैट उपकरण, ईवीएम व कंट्रोल यूनिट हटा दिए गए हैं। इससे पहले गत सप्ताह खंडपीठ ने केन्द्रीय निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग व केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया था।


गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति (जीपीसीसी) की ओर से जारी याचिका पर कहा गया कि आयोग की ओर से पहले चरण की जांच में 3550 वीवीपैट मशीनें क्षतिग्रस्त पाई गई। सात फीसदी ईवीएम व कंट्रोल यूनिट क्षतिग्रस्त, खामीयुक्त पाए गए हैं। इन क्षतिग्रस्त उपकरणों को हाईकोर्ट की कस्टडी में लिया जाए। इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की एक पैनल गठित कर क्षतिग्रस्त उपकरणों की कमियों को ढंूढा जाए और इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। भविष्य में इन क्षतिग्रस्त उपकरणों को उपयोग में नहीं लिया जाए। इसलिए राज्य में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हों। राज्य में अगले महीने दो चरणों में -9 व 14 दिसम्बर- विधानसभा चुनाव होने हैं।

इन बार राज्य की सभी 182 विधानसभा सीटों पर पहली बार वीवीपैट लगे ईवीएम के साथ चुनाव कराया जाना है। इस चुनाव में 70,182 वीवीपैट मशीनों का उपयोग किया जाएगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल)-बैंगलूरु और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 46 हजार उपकरण सीधे मंगाए गए हैं। शेष नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से मंगाए गए हैं।

‘चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाएं’

गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की मांग पर याचिकाकर्ता से चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 नवम्बर को होगी।

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी. एम. पंचोली की खंडपीठ ने गत शुक्रवार को याचिकाकर्ता और राज्य सरकार की ओर से दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रखा था। राज्य सरकार कह चुकी है कि सरकार इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले सकती क्योंकि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा ने राज्य में नियमित डीजीपी की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि राज्य में पिछले कई वर्षों से प्रभारी डीजीपी से काम चलाया जा रहा है। राज्य में 15 अप्रेल 2016 से नियमित पूर्णकालिक डीजीपी कार्यरत नहीं है। तब पी.सी. ठाकुर का तबादला कर पी पी पांडे को प्रभारी डीजीपी बना दिया गया था। पांडे की सेवानिवृत्ति के बाद गीता जौहरी को प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया है। यह बांबे पुलिस (गुजरात संशोधन) अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के विपरीत है।

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