आत्मशुद्धि का महान पर्व है:साध्वी

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, अहमदाबाद के तत्वावधान में शहर के शाहीबाग स्थित ओसवाल भवन में शनिवार से शुरू पर्युषण महापर्व पर आचार्य महाश्रमण की सुश

By: मुकेश शर्मा

Published: 22 Aug 2017, 04:01 AM IST

अहमदाबाद।श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, अहमदाबाद के तत्वावधान में शहर के शाहीबाग स्थित ओसवाल भवन में शनिवार से शुरू पर्युषण महापर्व पर आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या साध्वी चंदनबाला ने कहा कि सही मायने में देखा जाय तो ‘आत्मशुद्धि का महान पर्व पर्युषण है’।

उन्होंने तेरापंथ जैन समाज के चतुर्थ आचार्य जयाचार्य महाराज के जीवन पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते कहा कि हमें उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। पर्युषण पर्व के प्रथम दिन को खाद्य दिवस बताते हुए साध्वी लावण्यश्री आदि ठाणा- आठ ने कहा कि हमें अपनी दिनचर्या में बदलाव कर खान-पान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। पर्युषण महापर्व अन्त:करण में छिपे पाप को परिष्कृत करते हुए हमें पावन, पवित्र व मन को पुनीत बनाता है। मन की पवित्रता ही पर्युषण महापर्व की सबसे बड़ी साधना व आराधना है। वर्ष में एक बार आने वाला यह पर्व हमें बाहर से भीतर की ओर प्रस्थान करने का आह्वान करता है। मन की शुद्धि , विचारों की पवित्रता व आचरण का पुरुषार्थ ही पर्युषण महापर्व की सफलता है।

इस अवसर पर साध्वी वर्धमाश्री ने गीतिका का गान किया। तेरापंथी सभा के आह्वान एवं साध्वीवृंद की प्रेरणा से अखंड जाप शुरू किया गया। इससे पूर्व तेरापंथ महिला मंडल की महिलाओं ने मंगलाचरण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में तेरापंथी सभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र सुराणा , अरुण बैद और अशोक सेठिया ने विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम एवं तेरापंथ युवक परिषद, अहमदाबाद की ओर से चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया, जो आगामी 25 अगस्त तक जारी रहेगा।

‘आत्मालोचन व मैत्रीभाव का पर्व है पर्युषण’

तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि सुधाकर ने कहा कि पर्युषण पर्व आत्मालोचन व मैत्रीभाव का पर्व है। वे जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की अहमदाबाद पश्चिम इकाई की ओर से यहां नवरंगपुरा क्षेत्र स्थित ईश्वर भुवन में आयोजित पर्युषण महापर्व के पहले दिन शनिवार को धर्मसभा में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि अभ्यास और साधना से जीवन का सुधार व बदलाव संभव है। जो पापी और दुर्बल मनोबल वाला व्यक्ति होता है वह भी नियमित अभ्यास से अपने विचार व व्यवहार को पवित्र और सुंदर बना सकता है। पर्युषण का समय जीवन के शोधन और परिवर्तन का समय है। इस पर्व पर दूसरों की और न झांक कर अपनी और देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्युषण में उपवास और तपस्याएं होती है, लेकिन निराहार रहना ही तपस्या नहीं है। उसके के साथ अपने शुद्ध आध्यात्मिक स्वरूप के निकट निवास करना चाहिए। उप और वास मिल कर उपवास शब्द का निर्माण हुआ है। उपवास के साथ-साथ स्वाध्याय, जाप और ध्यान की साधना करके आत्मा के पवित्र स्वभाव में रमण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्युषण आत्मालोचन एवं मैत्री भाव के विकास का पर्व है, भूलों को सुधारने और प्रमाद को छोडऩे का पर्व है। मुनि दीप कुमार ने कहा कि आत्म शुद्धि परम धर्म है।

पर्युषण से हमें आत्मावलोकन की प्रेरणा मिलती है। जीवन को कलापूर्ण व सफल बनाने के लिए विषमता में भी समता से जीना सिखाना जरूरी है। धार्मिक व्यक्ति की पहचान उसके आचार और विचार से होती है। पर्युषण महापर्व हमें स्वयं को जानने और समझाने का अवसर देता है। राग द्वेष से ऊपर उठकर जीने व आत्मस्त बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व का प्रारम्भ खाद्य संयम दिवस के साथ होता है। आहार से ही आरोग्य (स्वास्थ्य) और अध्यात्म की प्राप्ति संभव है। जितना सात्विक पवित्र भोजन होगा, हमारे विचार भी उतने ही सात्विक होंगे। तपस्विनी इंद्रा देवी सिंघी ने मासखमण की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। सोनल सजल बारड ने मंगलाचरण व राजेन्द्र बोथरा ने संचालन किया।


संजय बेंगानी ने बताया कि नवरंगपुरा क्षेत्र में कॉमर्स छह रास्ता स्थित ईश्वर भुवन में रविवार सवेरे सवा 9 बजे से मुनि ‘स्वाध्याय दिवस’ पर स्वाध्याय व जैन इतिहास पर विशेष प्रवचन देंगे। रविवार शाम सात बजे से सामूहिक प्रतिक्रमण किया जाएगा। रात सवा 8 बजे से से ‘थोट्स मैनेजमेंट’ विषय पर विशेष वक्तव्य होगा। नमस्कार महामंत्र अनुष्ठान सवेरे 6 से रात्रि 11 बजे तक चलेगा।

मुकेश शर्मा Reporting
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