21 सेवाओं को प्राइवेट सिक्योरिटी कानून में लाने पर विचार

देशभर में सुरक्षा के लिहाज से अहम बन चुकीं प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों के दिन जल्द बहुरने की संभावना है। केन्द्र सरकार इन एजेंसियों को मेन गार्ड सर्

By: मुकेश शर्मा

Published: 22 Aug 2017, 10:08 PM IST

अहमदाबाद।देशभर में सुरक्षा के लिहाज से अहम बन चुकीं प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों के दिन जल्द बहुरने की संभावना है। केन्द्र सरकार इन एजेंसियों को मेन गार्ड सर्विस और कार-आम्र्ड गार्ड सर्विस की सेवाएं के साथ 21 नई सेवाएं देने के लिए कानूनी मंजूरी देने पर विचार कर रही है। इसके लिए नीति आयोग ने राज्य सरकारों से सुझाव मांगे हैं। गुजरात सरकार की ओर से नीति आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में नई 21 सेवाओं को प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी (रेग्युलेशन) एक्ट-२००५ (पसारा)के तहत कानूनी दायरे में लाने की सिफारिश की है।

देश में आज करीब १५,००० प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियां हैं, जिनमें ५५ लाख से अधिक सिक्योरिटी गार्ड सेवाएं दे रहे हैं। वार्षिक २० प्रतिशत की दर से प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों का विकास हो रहा है। पसारा के तहत भले ही उन्हें दो सेवाएं देने की मंजूरी हो, लेकिन आज प्राइवेट एजेंसियां मुद्रा पोर्ट, एशिया के बड़े पेट्रोल कॉम्पलैक्सों में से एक जामनगर पेट्रो कॉम्पलैक्स, हैदराबाद एयरपोर्ट सहित कई राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों व स्थापत्यों की सुरक्षा की कमान संभाल रही हैं। देश के करीब ८० फीसदी औद्योगिक इकाइयों, कंपनियों, संस्थानों की सुरक्षा प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियां संभाल रही हैं। इसे देखते हुए पसारा एक्ट में संशोधन की जरूरत महसूस की गई है।

गार्डों की संख्या राज्यों की पुलिस से करीब तीन गुना

गुजरात सरकार की ओर से इस मामले में ड्रॉफ्ट तैयार करने में शामिल गुजरात पुलिस की तकनीकी सेवाओं के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) नरसिम्हा एन.कोमर बताते हैं कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों के पास उपलब्ध गार्डों की संख्या आज राज्यों की पुलिस की संख्या से करीब तीन गुना अधिक हो गई है। ऐसे में इनके विकास की विपुल संभावनाएं हैं। गुजरात में करीब १२ सौ सिक्योरिटी एजेंसियां हैं।

सिक्योरिटी एजेंसियां आज औद्योगिक इकाईयों से लेकर बैंकों, एटीएम, ज्वैलरी शोरूम, मॉल, घरों, व्यावसायिक कॉम्पलैक्सों की सुरक्षा से लेकर एयरपोर्ट, पोर्ट की सुरक्षा भी कर रही हैं। तकनीकी रूप सेएडवांस भी हो रही हैं। जबकि पसारा के तहत उन्हें मैनगार्ड और कार-आम्र्ड सर्विस की ही मंजूरी है। ऐसे में जब देश में पुलिस बल की कमी है और सुरक्षा की चुनौती बढ़ रही है तब जरूरत महसूस की गई है कि अन्य करीब उभरती हुई 21 सेवाओं को भी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों को कानून करने की मंजूरी दी जाए। साथ ही राज्यों में अभी जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) के अधीनस्थ निगरानी व्यवस्था है। उसकी जगह रेग्युलेटरी अथोरिटी गठित की जाए। गुजरात सरकार की ओर से नीति आयोग को भेजे ड्राफ्ट में इस बात की सिफारिश की गई है।

हथियार लाइसेंस की मंजूरी पर हो विचार: माहूरकर

सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (कैप्सी) के उपाध्यक्ष विक्रम माहूरकर बताते हंै कि यह बात सही है कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों की संख्या व सेवाओं का दायरा काफी बढ़ा है। हम पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की आंख कान बनकर काम कर रहे हैं। जरूरत है कि एजेंसियों को बैंकों, कैश, गोल्ड डिलिवरी वेन की सुरक्षा, ज्वैलरी शोरूम, एटीएम की सुरक्षा के लिए हथियारों के लाइसेंस दिए जाएं। आम्र्ड एक्ट के तहत हथियार का लाइसेंस सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा या फिर फसल सुरक्षा के लिए दिया जाता है। यह भी सच्चाई है कि बैंकों, कैश-गोल्ड डिलिवरी, शोरूमों में हथियारधारी गार्ड तैनात हैं। ऐसे में कानून में इस बाबत विचार किया जाए। एसोसिएशन ने भी इस मामले में सरकार को लिखा है।

नगेन्द्र सिंह

मुकेश शर्मा Reporting
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