scriptThree newborn babies saved by performing complex surgery in Vadodara | वडोदरा में तीन नवजात शिशुओं की जटिल सर्जरी कर बचाई जान | Patrika News

वडोदरा में तीन नवजात शिशुओं की जटिल सर्जरी कर बचाई जान

सयाजी अस्पताल में सात महीने में जन्मी बच्ची को 80 दिन में मिली सांस

अहमदाबाद

Published: March 29, 2022 10:15:49 pm

वडोदरा. शहर के सयाजी अस्पताल के चिकित्सकों ने बाल रोग विभाग के वार्ड में तीन नवजात शिशुओं की जटिल सर्जरी कर जान बचाने में सफलता हासिल की है। इनमें से अस्पताल में 28 सप्ताह (सात महीने) के अधूरे महीनों में जन्मी बच्ची को 80 दिन तक आईसीयू में लंबे और जटिल उपचार के बाद नया जीवन देकर छुट्टी दे दी गई।
वडोदरा में तीन नवजात शिशुओं की जटिल सर्जरी कर बचाई जान
वडोदरा में तीन नवजात शिशुओं की जटिल सर्जरी कर बचाई जान
सांस लेना भूलती थी 7 महीने में पैदा हुई बेबी कैलाश

अस्पताल में बेबी कैलाश ने केवल 28 सप्ताह (7 महीने) की छोटी गर्भावस्था अवधि के बाद जन्म लिया, इसे चिकित्सकोंं की भाषा में एक बहुत ही नाजुक और खतरनाक स्थिति माना जाता है। केवल 1 किलोग्राम वजन और बच्ची के फेफड़े भी विकसित नहीं थे। चिकित्सकों ने फेफड़ों को फुलाने के लिए एक सर्फेकतंट दिया। फिर भी, सांस लेने में भूलने (एपनिया) की समस्या बनी रही। हृदय की सोनोग्राफी में भी पहले कुछ नहीं आया। साधारण ऑक्सीजन से लेकर सी-पेप मशीन और फिर वेंटिलेटर मशीन की समय-समय पर जरूरत रही।
13 दिन सी-पेप सपोर्ट, 18 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ-साथ टू डी इकोकॉर्डियोग्राफी में मॉडरेट से लॉर्ज पेटंटडक्ट्स आर्टेरियोसिस (पीडीए) की मौजूदगी के कारण उपचार करने में मशक्कत करनी पड़ी। पीडीए को बंद करने इंजेक्शन शुरू किए गए और पीडीए बंद होने पर बच्चे को ऑक्सीजन की आवश्यकता कम होने पर उसे ऑक्सीजन सपोर्ट से सफलतापूर्वक हटाया गया।
योद्धा के तौर पर उभरी मां-बेटी

80 दिन के लंबे और जोखिमभरे जिंदगी के शुरुआती दिनों में मां-बेटी योद्धा के तौर पर उभरी। एनीमिया, सेप्सिस, आर.ओ.पी. (आरओपी), लंबे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट की मदद से बच्ची का वजन 1.700 किलो हुआ। बच्ची को योद्धा के तौर पर अस्पताल से छुट्टी देते समय विभाग की अध्यक्ष डॉ. शीला अय्यर की एनआईसीयू की टीम में शामिल डॉ रिंकी, डॉ. स्नेहल, डॉ ऋषिता, डॉ. लोकेश, डॉ. भार्गव, डॉ. किशन के साथ पूरे नर्सिंग स्टाफ को गर्व महसूस हुआ।
गर्भावस्था से जुड़ी थी बेबी मीना की अन्ननली व श्वासनली

इसी प्रकार बेबी मीना की अन्ननली और श्वासनली गर्भावस्था से जुड़ी हुई थी और उसके जन्म के समय भी दोनों नलियां जुड़ी थीं। सर्जरी के बाद 20 दिन तक आईसीयू में उपचार के बाद उसे पूर्णतया माता के स्तनपान के साथ स्टेप डाउन वार्ड में रखा गया। उसे किडनी व हृदय की भी समस्या थी। चिकित्सक और स्टाफ अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग कर उसे जीवन की नई और सुरक्षित दिशा दे रहे हैं।
जन्म से ही धर्मिष्ठा के सीने में था आंतों का भाग

इनके अलावा धर्मिष्ठा का जन्म शरीर के अंगों का एक दूसरे में अवांछित प्रवेश की स्थिति में हुआ था। नवजात बच्ची के सीने में जन्म से ही आंतों का भाग था। उसका समय पर निदान करना कठिन था और नाजुक सर्जरी से परेशानी को दूर करने में अस्पाल की टीम ने मशक्कत की। इस दौरान स्टाफ नर्स भानुबेन ने प्रसूता को साहस दिलाया और नवजात बच्ची को स्तनपान कराने की पूरी प्रक्रिया में संवेदनशील होकर योगदान दिया।
निजी अस्पताल में जटिल उपचार के लाखों खर्च, यहां मुफ्त

गौरतलब है कि निजी अस्पताल में जटिल सर्जरी व उपचार के लिए लाखें रुपए खर्च करने पड़ते हैं लेकिन सयाजी अस्पताल में यह कार्य मुफ्त में हुआ। इस उपलब्धि के साथ एनआईसीयू का माहौल में हर्षोल्लास था। डॉ. शीला अय्यर ने अपनी समर्पित टीम की चिकित्सा सहायता से तीनों माताओं को जीवन बचाने की लड़ाई जीतने वाले बच्चों की देखभाल के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
अस्पताल की सर्वोत्तम सेवाओं में एक सफल अध्याय जोड़ा

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रंजनकृष्ण अय्यर ने कहा कि सयाजी अस्पताल के बाल रोग विभाग की टीम ने सरकारी अस्पताल की सर्वोत्तम सेवाओं में एक सफल अध्याय जोडऩे के लिए सभी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाल रोग एवं उपचार विभाग ने सावधानीपूर्वक बहुत ही खतरनाक, जटिल सर्जरी और चिकित्सा प्रक्रियाओं के साथ-साथ लंबा उपचार कर तीन नवजात बच्चों को नया जीवन दिया है। नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने इस चिकित्सा चमत्कार में योगदान दिया है।

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