आदिवासियों को रिझाने की कोशिश

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 13 2017 04:38:10 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
आदिवासियों को रिझाने की कोशिश

युवा रोजगार और किसान अधिकार यात्रा के अंतिम दिन बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आदिवासियों को रिझाने की भरसक कोशिश की। छोटा उदयपुर में मंग

अहमदाबाद/दाहोद।युवा रोजगार और किसान अधिकार यात्रा के अंतिम दिन बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आदिवासियों को रिझाने की भरसक कोशिश की। छोटा उदयपुर में मंगलवार को कलाकारों के साथ लोकनृत्य किया तो बुधवार को दाहोद के सलैया गांव में कबीर मंदिर में भजन- कीर्तन किए। राहुल ने देवगढ़ बारिया, लीमखेड़ा, फागवेल आदिवासी इलाकों में सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने छोटा उदेपुर के दरबार हॉल में आदिवासी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आदिवासी पर्यावरण को बेहतर समझते हैं। वे भारतीय संस्कृति का एकीकृत भाग हैं। उनके बगैर देश का विकास नहीं हो सकता। यदि कांग्रेस की सरकार आएगी तो आपक ी पुरानी पीढ़ी का सम्मान लौटाएगी। राहुल गांधी ने एक बार फिर विकास के गुजरात मॉडल भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि गुजरात सरकार की मार्केटिंग हकीकत से बिलकुल अलग है।

नर्मदा का पानी नहीं मिला....

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासियों को नर्मदा का पानी देने और किसानों का कर्ज माफ करने की भी घोषणा की थी। उनको घर, रोजगार, बिजली और अन्य सुविधाएं देने की बात की थी, लेकिन क्या हुआ?

अभिभावकों ने पुलिस से मांगी मदद

घाटलोडिया के त्रिपदा इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधन पर उनके बच्चों के साथ पढ़ाई में भेदभाव करने, दूसरे टर्म की फीस भरने के लिए दबाव डालने, यह फीस नहीं भरने पर बच्चों को किताबें नहीं देने का आरोप लगाते हुए अभिभावकोंने घाटलोडिया पुलिस से मदद के लिए गुहार लगाई है।

मंगलवार को अभिभावकों ने लिखित में पुलिस निरीक्षक को याचिका देते हुए स्कूल प्रबंधन पर डोनेशन लेने, उनके बच्चों के साथ पढ़ाई में भेदभाव करने और दूसरे टर्म की फीस के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।

थाने में शिकायत पत्र सौंपने वाले अभिभावकों में से एक अमित पंचाल ने त्रिपदा इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन पर ३० हजार रुपए का डोनेशन लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने तब कहा था कि वह इस डोनेशन की राशि को फीस में समाहित कर लेंगे, लेकिन अब दूसरे टर्म की फीस में उसे समाहित करने से इनकार करते हुए दूसरे टर्म की फीस भरने का दबाव डाल रहे हैं।

स्कूल प्रबंधन की ओर से उनके बच्चों के साथ दुव्र्यवहार किया जा रहा है। उन्हें स्कूल की ओर से किताबें नहीं दी गई हैं। उन्हें अच्छी तरह से पढ़ाया भी नहीं जाता है। बच्चे आकर शिकायत करते हैं। पहले टर्म की परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं भी हमें नहीं दिखाई गईं हैं। इन सब मुद्दों की शिकायत जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी (डीपीईओ), फीस निर्धारण समिति, प्रधान शिक्षा सचिव (स्कूल)सुनयना तोमर, शिक्षामंत्री भूपेन्द्र सिंह चुड़ास्मा के कार्यालय में भी की जा चुकी है। तीन महीने में डीपीईओ से तीन बार गुहार लगाई। वह इस मामले में फीस निर्धारण समिति के पास जाने को कहते हैं।

कार्रवाई का आश्वासन देते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। फीस समिति कहती है कि उन्होंने तो अभी फीस तय ही नहीं की, उनकी ओर से निर्धारित फीस से ज्यादा फीस कोई स्कूल लेगा तो ही वह कार्रवाई कर सकते हैं। उससे पहले कार्रवाई करने का अधिकार डीपीईओ को है। डीपीईओ और फीस समिति के बीच हम ***** रहे हैं। सरकार सुन नहीं रही। ऐसे में पुलिस से मदद मांगी है।

उधर डीपीईओ एम.पी.मेहता ने बताया कि अभिभावकों की मांग को सुना गया है। उनकी शिकायत को लेकर स्कूल प्रबंधन से भी बातचीत की जा रही है।

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