3148 प्रकरण निस्तारित,मासूम बच्चों को मिला माता-पिता का सहारा

राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामे से निपटे हजारों मामले

By: bhupendra singh

Published: 11 Sep 2021, 09:34 PM IST

अजमेर. वंचितों को त्वरित न्याय और आपसी समझाइश से मुकदमें समाप्त करने के उद्देश्य से शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों प्रकरणों का निस्तारण हुआ। लोक आदालत में पारीवारिक विवादों का निराकरण किया गया। बच्चों को माता-पिता का सहारा मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साचिव रामपाल जाट ने बताया कि लोक अदालत प्री लिटिगेशन के लिए धन वसूली मामलों, बीएसएनएल व बिजली पानी के बिल से संबंधित प्रकरणों, चैक अनादरण, एमएसीटी मामले, वैवाहिक, भरण पोषण एवं घरेलू हिंसा विवाद , श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद अन्य सिविल मामले,न्यायालय में लंबित दाडिक प्रकृति के ऐसे प्रकरण जो क्षम्य हो एवं ऐसे दांडिक प्रकरण जो लघु प्रकृति के प्रकरणों के निस्तारण के लिए आयोजित की गई।
19.30 करोड़ का अवार्ड जारी

अजमेर न्याय क्षेत्र में राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 16171 प्रकरण रखे गए। जिनमें न्यायालयों में लंबित प्रकरण 11065 प्रकरण तथा प्रि-लिटिगेशन के 5106 प्रकरण बैंच के समक्ष रखे गये। लोक अदालत में 3148 प्रकरण निस्तारित हुए तथा कुल 214098062 रुपये की अवार्ड राशि दी गयी। इनमें से 1157 प्रकरण प्रि-लिटिगेशन के निस्तारित हुए जिनमें 21053773 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। न्यायालयों में लम्बित 1991 प्रकरण निस्तारित हुए जिनमें 19 करोड़ 30 लाख 44 हजरी 289 रुपए की अवार्ड राशि दी गई।
एमएसीटी के 69 प्रकरण निस्तारित

मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) में मोटर वाहन दुर्घटना से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई न्यायाधीश राजेश गुप्ता ने की। इनमें से 69 प्रकरणों का निस्तारण आपसी समझाईश के माध्यम से किया गया। इन प्रकरणों में 3 करोड़ 68 लाख 85 हजार 500 रूपए की राशि के अवार्ड जारी हुए।
प्रि-लिटिगेशन व न्यायालय में लम्बित प्रकरणों का विवरण

अन्य दांडिक शमनीय के कुल 1548 रखे गये जिसमें से 662 प्रकरण निस्तारित हुए। वैवाहिक विवाद एवं अन्य सिविल विवाद के 1548 प्रकरण में से 307 प्रकरणों का निस्तारण किये गये। जिनमें 800000 रुप ए का अवार्ड राशि पारित की गई।
- एनआईएक्ट के 5675 प्रकरण में से 400 प्रकरण निस्तारित हुए। जिनमें 75229812 रुपये का अवार्ड राशि पारित की गई।

-मनी रिकवरी के 344 प्रकरणों में से 46 प्रकरण निस्तारित हुए जिनमें 20263443 रूपये का अवार्ड राशि पारित की गई।
-मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण अजमेर में कुल 945 प्रकरणों में से 198 निस्तारित हुए जिनमें कुल 87944000 रुपये का अवार्ड राशि पारित की गई।

-पारिवारिक विवाद के 836 प्रकरणों में से 194 प्रकरणों का निस्तारण हुआ। जिनमें कुल 437000 रुपये का अवार्ड राशि पारित की गई।
-श्रम विवाद के 19 प्रकरणों में से 7 प्रकरण निस्तारित हुए जिनमें 1661000 रूपये का अवार्ड राशि पारित की गयी।

-बिजली बिल (शमनीय चोरी मामलों सहित) के 173 प्रकरणों में से 173 प्रकरण निस्तारित हुए जिनमें 5347353 रूपये का अवार्ड राशि पारित की गई।
-अन्य सिविल मामले (किराया सुखाधिकार निषेधाज्ञा संविदा की पालना व इजराय) के 1486 प्रकरणों में से 311 प्रकरण निस्तारित हुए जिनमें 2161681 रूपये का अवार्ड राशि पारित की गई।

टूटे हुए परिवार फिर हुए एक,बच्चों को मिला सहारा
रमेश (परिवर्तित नाम) व सुनीता (परिवर्तित नाम) के प्रकरण में दोनो पक्षकारान का विवाह सन् 2010 में हुआ था एवं दोनो के एक पुत्र है। दोनो में विवाद होने से वे एक दूसरे से वर्ष 2017 से अलग अलग रह रहे थे। पक्षकारान द्वारा आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद के लिए याचिका 26 फरवरी 2020 को न्यायालय में पेश की गई। पक्षकारों को न्यायालय में पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक ने समझाईश की ,विवादों को भुलाकर साथ रहने हेतु समझाया गया, जिसके सफल परिणाम रहे। लोक अदालत में बैंच अध्यक्ष नवीन चौधरी ने भी समझाईश की। दोनो पक्षों में राजीनामा हुआ एवं दोनो आपस में साथ रहने पर राजी हुए। जिससे उनके पुत्र को माता व पिता दोनो का प्यार मिलेगा।

मिले मां-बाप, खिले चेहरे
सुनील शर्मा व दिपीका (परिवर्तित नाम) के प्रकरण में दोनो पक्षकारान का विवाह वर्ष 2012 में हुआ था एवं दोनो के दो संताने-एक पुत्र व एक पुत्री है। दोनों में विवाद काफी लम्बे समय से विवाद चल रहा था तथा वे एक दूसरे से वर्ष 2017 से अलग-अलग रह रहे थे। 26 नवम्बर 2020 को सुनील द्वारा प्रार्थना-पत्र पेश किया गया। पक्षकारान को न्यायालय में पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक,न्यायाधीश द्वारा समझाईश करवाई गई पक्षकारान के मध्य समझौता वार्ता कर उन्हें आपसी विवादों को भुलाकर साथ रहने हेतु समझाया गया। दोनो पक्षों में राजीनामा हुआ।

पति-पत्नी ने भुलाए मतभेद
राहुल व दिव्या (परिवर्तित नाम) के प्रकरण में दोनो पक्षकारान का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था एवं दोनो में विवाद होने से वे एक दूसरे से सन् 2018 से अलग अलग रह रहे थे। पक्षकारान को न्यायालय में पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक, न्यायाधीश द्वारा समझाईश करवाई गई ,उन्हें आपसी विवादों को भुलाकर साथ रहने हेतु समझाया गया।

श्रम विवादों का निस्तारण
प्रकरण 15/2021 भरतराम बनाम शिंभूराम व अन्य प्रकरण में नियोजन के दौरान भरतराम के चोटग्रस्त हो जाने पर प्रतिकर का वाद प्रार्थी की ओर से 23जून 2021 को प्रस्तुत किया गया था। जिसमें पक्षकारान को समझाईश किए जाने के बाद आपसी सहमति से 1.50 लाख रूपये में राजीनामा हुआ।

प्रकरण संख्या 13/2021 मुन्नी देवी व अन्य बनाम शिंभूराम व अन्य उक्त प्रकरण में नियोजन के दौरान मृतक सुशील की मृत्यु हो जाने पर वास्ते प्राप्त करने प्रतिकर राशि क्लेम प्रार्थना पत्र 26 मार्च 2021 को प्रस्तुत किया गया । जिसमें पक्षकारान को समझाईश के उपरांत राशि रूपये 6 लाख 21हजार रूपए का अवार्ड पारित कर राहत दी गई।

प्रकरण संख्या 8/2021 साबुद्वीन उर्फ शहाबुद्वीन व अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड प्रकरण नियोजन के दौरान प्रार्थी के चोटग्रस्त हो जाने पर प्रतिकर की राशि दिनाक 23 फरवरी 2021 को क्लेम प्रस्तुत किया गया था। जिसमें पक्षकारान समझाईश करने के बाद1.90 लाख रूपए का अवार्ड पारित किया गया।

कंचनदेवी बनाम चिराग
इस प्रकरण में नियोजन के दौरान कर्मकार दलवीरसिंह की मृत्यु हो जाने पर उसके वारिसान की ओर से क्लेम 17 जनवरी 2021 को प्रस्तुत किया गया था। जिसमे पक्षकारान के मध्य लोक अदालत की भावना से राजीनामा होने पर राशि रूपये 7 लाख का अवार्ड पारित कर राहत दी गई।

सफलता की कहानी
दिवानी इजराय सं 37/2017 उनवानी श्रीराम सिटी यूनियन फाईनेन्स लिमिटेड बनाम चिरंजी लाल लंबित न्यायालय अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम 2 अजमेर में पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों में समझाईश की गयी डिक्री की राशि लगभग 8054 रूपये थी जिस पर 29अक्टूबर 2012 से 18 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज मय कॉस्ट अदायगी पारित की गयी थी ईजराजय की कार्यवाही 11 अप्रैल 2014 से लंबित थी। समझाईश कर प्रकरण का निस्तारण 12500 रूपये में किया गया।

सफलता की कहानी
फौजदारी प्रकरण संख्या 766/2011 सरकार बनाम अफसर व अन्य में दोनों पक्षकारों के मध्य समझाईश की गई। परिवादिया दिलनाज (परिवर्तित नाम) लता (परिवर्तित नाम) के बीच मध्य सौहार्दपूर्ण तरीके से राजीनामा हुआ तथा 10 वर्ष पुराना पारिवारिक प्रकरण निपटारा किया गया।

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