हाईवे पर साल दर साल बढ़ रहे हादसे,११ माह में १५० की मौत

-धौलपुर से गुजरने वाले हाइवे पर साल-दर-साल बढ़ रहा हादसों का आंकड़ा, शिकायतों के बाद एनएचएआई कर रही उपेक्षा

हाइवे पर हादसों को रोकने के लिए तमाम दावे किए जा रहे हो, लेकिन असल हकीकत कुछ और ही है। बीते 11 महीने पर में जिले से गुजरने वाले तीन हाइवों पर सड़क हादसों में 150 जनों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दो सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके है। हादसों ने एनएचएआई की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।

By: Dilip

Updated: 26 Dec 2020, 10:50 PM IST

धौलपुर. हाइवे पर हादसों को रोकने के लिए तमाम दावे किए जा रहे हो, लेकिन असल हकीकत कुछ और ही है। बीते ११ महीने पर में जिले से गुजरने वाले तीन हाइवों पर सड़क हादसों में १५० जनों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब दो सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके है। हादसों ने एनएचएआई की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कई बार लिखित व मौखिक शिकायतों के बाद भी व्यवस्थाओं की पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जल्द ही हाइवे व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कराया गया तो बड़े हादसे होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

धौलपुर जिले से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते है। इसमें सबसे व्यस्तम राजमार्ग आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग-३ है। यह मार्ग जिले के करीब २६ किलोमीटर से होकर गुजरता है। मार्ग क्षेत्र में जिले के मनियां, सदर व कोतवाली थाना इलाके आते है जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग१२३ धौलपुर से भरतपुर को जोड़ता है। इस मार्ग पर सदर व सैप ऊ थाना इलाका से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग-११ बी धौलपुर से करौली जिले के जोड़ता हुआ मार्ग है। यह मार्ग कोतवाली, बाड़ी सदर, सरमथुरा आदि थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हाइवे पर हुए हादसों पर पुलिस की रिपोर्ट पर नजर डालें तो तीनों हाइवे पर इस वर्ष माह जनवरी से नवम्बर तक पुलिस थानों पर दर्ज मामलों में १५० जनों की मौत हो चुकी है।
धौलपुर-करौली मार्ग पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं

आंकडों पर नजर डाले तो जिले से गुजरने वाले हाइवों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं धौलपुर को करौली से जोडऩे वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-११बी पर हुई है। राजमार्ग के करीब ७५ किलोमीटर के क्षेत्र में बीते ११ महीने में ६२ जनों की मौत हो चुकी है। मुख्य कारण यहां यातायात संकेतकों का नहीं होना और मार्ग का घुमावदार होना है। वाहन अनियंत्रित रफ्तार से होकर गुजरते हैं और हादसों का शिकार हो जाते है।

अव्यवस्थाओं से घिरा राष्ट्रीय राजमार्ग-३
व्यस्ततम राजमार्गों में से एक आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग-३ जिले के करीब २६ किलोमीटर से होकर गुजरता है। मार्ग पर दुर्घटनाओं के आंकडों पर नजर डाले तो बीते नौ माह में जिले के पुलिस थानों पर दर्ज मामलों में ६१ जनों की मौत हो चुकी है। दुर्घटनाओं के होने का मुख्य कारण हाइवे क्षेत्र में जगह-जगह मनमानी के कट भी हैं।ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है। रोड लाइट नहीं है।आबादी क्षेत्र में लिंक रोड नहीं है। मार्ग के आबादी क्षेत्र में अतिक्रमण भी हादसों का कारण बना हुआ है। जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिसके कारण यहां हर समय बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है।

हाइवे-१२३ पर भी बढ़ रहे हादसे
धौलपुर को भरतपुर जिले से जोडऩे वाले राष्ट्रीय राजमार्ग १२३ पर भी हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। करीब ३५ किलोमीटर तक जिला क्षेत्र में बीते ११ महीने में दर्ज मामलों में २७ जनों की मौत हो चुकी है। हाइवे मार्ग पर दुर्घटना का सबसे मुख्य कारण सड़क पर आवारा पशुओं का बना रहना है। मार्ग पर कहीं भी मोड़ के लिए संकेतक नहीं है, जिसके कारण यहां वाहन अनियंत्रित रफ्तार के चलते दुर्घटना का शिकार हो जाते है।

दुर्घटनाओं से लें सबक , जागरुकता रखें व टालें हादसे

-हाईवे पर आवारा पशु दुर्घटना का बड़ा कारण हैं। सड़क पर पशु न आएं, हाईवे पर तेज गति से चलते वाहनों के सामने अचानक पशु आने वाले दुर्घटना का बड़ा कारण बनते हैं।

- हाईवे से लगे गांवों में सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

- हाईवे पर रोड डिवाइडर तो होते हैं, लेकिन लोगों को भी अपनी प्रवृत्ति को बदलना होगा, दूरी बचाने के लिए हाईवे पर गलत साइड में जाने से दुर्घटना का कारण बनते हैं

-कई वाहन चालक रात के समय वाहनों को बेतरतीब खड़ा करने से रात्रि में वाहन दिखते नहीं है जिससे दुर्घटनाएं हो जाती हैं

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