थाने में युवक को बेरहमी से पीटने का आरोप

-कंचनपुर थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों पर आरोप, एसपी ने भी नहीं सुनी पीडि़त की गुहार, इस्तगासा दायर

आमजन में पुलिस का विश्वास बढ़ाने को लेकर उच्चाधिकारी भले ही तमाम दावे कर रहे हो, लेकिन इसका असर धौलपुर पुलिस पर नजर नहीं आ रहा। यहां कंचनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में पानी को लेकर दो पक्षों में हुए झगड़े में पुलिस एक पक्ष के युवक को थाने ले आई और यहां उसे साथ जमकर मारपीट की।

By: Dilip

Published: 11 Apr 2021, 11:48 PM IST

बाड़ी. आमजन में पुलिस का विश्वास बढ़ाने को लेकर उच्चाधिकारी भले ही तमाम दावे कर रहे हो, लेकिन इसका असर धौलपुर पुलिस पर नजर नहीं आ रहा। यहां कंचनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में पानी को लेकर दो पक्षों में हुए झगड़े में पुलिस एक पक्ष के युवक को थाने ले आई और यहां उसे साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान युवक के शरीर में कई स्थानों पर गंभीर चोटें आयी है। पुलिस ने पीडि़त युवक को 151 में पाबंद कर छोड़ दिया। गंभीर बात यह रही कि पीडि़त आरोपी पुलिसकर्मियों की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक से भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के बाद न्यायालय में इस्तगासे के जरिए कंचनपुर थाना प्रभारी देवेंद्र शर्मा व पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

जानकारी के अनुसार कंचनपुर थाने के गांव दादुर निवासी पीडि़त युवक विनोद पुत्र रामभरोसी ने इस्तागासा के जरिए दर्ज कराए मामले में आरोप लगाया है कि गांव में लगे एक सरकार हैंडपंप पर स्थानीय लोग पानी भरते है। हैण्डपंप का पानी नीचे चले जाने पर स्थानीय ग्रामीणों की मदद से यहां समर मोटर लगा दी गई, जिसका उपयोग सभी लोग करते है। हैण्डपंप के पास ही स्थानीय निवासी रूमी पुत्र लखपत के पशु भी बांधे जाते है।

हादसे की संभावना के चलते समर मोटर के तार को बढ़ाते हुए इसका कनेक्शन विनोद ने अपनी घर के बाहर दीवार पर लगा दिया। इस बात से नाराज होकर रूमी पुत्र लखपत कंचनपुर थाने पहुंच गया और पुलिस से शिकायत कर दी। पुलिस ने मामले पर पड़ताल किए बिना ही पीडि़त विनोद कुमार को उसके घर से उठाकर थाने ले आई। यहां थाना प्रभारी देवेन्द्र शर्मा व पांच पुलिसकर्मियों ने विनोद के साथ जमकर मारपीट की, जिसमें उसके गंभीर चोटें भी आई। इसके बाद पुलिस ने पीडि़त को रातभर थाने में बैठा कर रखा और सुबह धारा 151 में पाबंद कर मेडिकल के बाद छोड़ दिया।

पीडि़त का आरोप है कि पुलिस ने मामले में किसी से भी शिकायत नहीं करने और चुप रहने की धमकी भी दी। मामले को लेकर पीडि़त ने जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र भी भेजा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के बाद इस्तगासे के जरिए मामला दर्ज कराया।

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