अक्षय पात्र की भट्टी बंद एवं सरकारी स्कूलों के चूल्हे बुझे

शहरी क्षेत्र में अक्षय पात्र योजना के तहत तैयार हो रहा था मिड डे मील, अस्पताल में अक्षय कलेवा पर भी विराम, सरकारी स्कूलों में बच्चों की छुट्टियों का असर, ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन परिवारों की कुक कम हेल्पर का भी छिना रोजगार, स्कूल में बच्चों के शिक्षण कार्य की इजाजत का इंतजार

By: CP

Published: 23 Aug 2020, 01:27 AM IST

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद होने एवं बच्चों के अवकाश के चलते अजमेर में अक्षय कलेवा प्लांट की भट्टी एवं सरकारी स्कूलों के चूल्हे बुझे हुए हैं। शहरी क्षेत्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन की ओर से गर्म पोषाहार उपलब्ध करवाने का कार्य मार्च से बंद पड़ा है। अस्पताल में रियायती दर पर उपलब्ध अक्षय कलेवा पर भी विराम लग गया है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों भोजन पकाने वाली जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं भी रोजगार छिन गया है। इन महिला कार्मिकों के तीन महीनों के मानदेय की गाइड लाइन सरकार की ओर से नहीं मिली है।
अजमेर जिले में सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले कक्षा आठवीं तक कर करीब 2 लाख 26 हजार छात्र-छात्राओं के लिए वर्तमान में स्कूलों में पोषाहार नहीं पक रहा है। अजमेर शहर के करीब 2300 बच्चों के लिए केन्द्रीयकृत रसोई के तहत तोपदड़ा स्थित अक्षय पात्र फाउंडेशन गर्म भोजन उपलब्ध करवाता है वह प्लांट भी बंद पड़ा है। कोरोना के चलते छात्र-छात्राओं के अवकाश से स्कूलों में रौनक लौटने का इंतजार किया जा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से 2. 26 लाख बच्चों को मिला गेहूं व चावल

राज्य सरकार की ओर से अजमेर जिले की सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढऩे वाले छात्र छात्राओं को गेहूं एवं चावल बांटा जा रहा है। 94 दिनों के लिए कक्षा 6 से 8 तक प्रति विद्यार्थी 14 किग्रा 100 ग्राम एवं कक्षा एक से पांच तक प्रति छात्र 9 किग्रा.400 ग्राम गेहूं व चावल बांटा जा रहा है।

कुक कम हेल्पर (महिलाओं) के मानदेय की नहीं गाइड लाइन

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में पोषाहार पकाने वाली कुक कम हेल्पर को मिलने वाला मानदेय अप्रेल, जुलाई का मानदेय नहीं मिला है। राज्य सरकार की ओर से इन दो महीनों के लिए गाइड लाइन नहीं मिली है। ग्रीष्मावकाश में इन्हें मानदेय स्वीकृत नहीं है। ऐसे में इनका रोजगार का दूसरा जरिया भी नहीं है।

अक्षय पात्र पर एक नजर

23000 बच्चों का भोजन तैयार होता है अक्षय पात्र की रसोई में
100 स्कूल शहर की जिनमें पका पोषाहार सप्लाई होता है।
08 स्कूल पुष्कर के पंजीकृत
30 स्कूल पैराफेरी गांव के पंजीकृत
400 लोगों का प्रतिदिन अस्पताल के लिए बनता था अक्षय कलेवा

कोरोना काल में विकल्प बना अक्षय पात्र

कोरोना काल में अक्षय पात्र फाउंडेशन की रसोई से 10 लाख लोगों के लिए भोजन सप्लाई किया गया। जिला प्रशासन के बाद नगर निगम, भामाशाहों के सहयोग से तैयार करवाया भोजन। प्रतिदिन 6 हजार लोगों का खाना तैयार किया। एक दिन में रिकॉर्ड एक लाख रोटियां भी तैयार की गई। करीब 100 लोगों को सूखी खाद्य सामग्री के पैकेट वितरित किए। इंदिरा रसोई के बाद अस्पताल में अक्षय कलेवा योजना बंद कर दी गई है।

इनका कहना है

अक्षय पात्र में मार्च माह से ही स्कूली बच्चों का पोषाहार नहीं बन रहा है। करीब 2300 बच्चों का यहां गर्म भोजन सप्लाई किया जाता है। अस्पताल में अक्षय कलेवा योजना बंद कर दी गई है। स्कूल खुलने का इंतजार है। कोरोना के समय जिला प्रशासन के निर्देश पर करीब 10 लाख लोगों के लिए भोजन तैयार किया था।

बलवीर सिंह, रीजनल असिस्टेंट मैनेजर, अक्षय कलेवा फाउंडेशन

जिले में करीब 2 लाख 26 हजार बच्चों पोषाहार का सूखा राशन गेहूं-चावल बांटा जा रहा है। 2 लाख बच्चों को बांट चुके हैं। पीसांगन ब्लॉक की सूचना का इंतजार है।

के.जी. सोमानी, पोषाहार प्रभारी, जिशिअ (प्रारं.)कार्यालय अजमेर

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