ऐसी गहरी दोस्ती की हर कोई देता है मिसाल , यूं निभाती है ये तीनों एक दूजे का साथ इसलिए है सबको इनकी दोस्ती पे नाज

ऐसी गहरी दोस्ती की हर कोई देता है मिसाल , यूं निभाती है ये तीनों एक दूजे का साथ इसलिए है सबको इनकी दोस्ती पे नाज

Sonam Ranawat | Updated: 06 Aug 2018, 07:30:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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अजमेर. मीनाक्षी, दीपा और बबीता ये कहने को लड़कियों के नाम है। लेकिन इन लड़कियों से लड़के भी घबराते है। तीनों का रहन सहन, खेल और जॉब एक है। यही इन लड़कियों की दोस्ती की खास बात है। तीनों कभी लड़कियों जैसे कपड़े नहीं पहनती, न ही लड़कियों जैसे हेयर स्टाइल रखती हैं। मेकअप करना तो बहुत दूर की बात है। तीनों ही क्रिकेट की बेहतरीन खिलाड़ी हैं। एक दूसरे की पक्की दोस्त भी हैं। इस खेल में लड़कों को भी मात दे चुकी हैं। तीनों शारीरिक शिक्षक है।
इनकी मुलाकात करीब 15 साल पहले सावित्री कॉलेज में हुई।

 

बबीता मीनाक्षी और दीपा की सीनियर थी। तीनों साथ क्रिकेट खेलती थी। खेलते-खेलते दोस्ती गहरी हो गई। समय के साथ और प्रगाढ़ हो गई। एक बार कॉलेज के समय बबीता को कप्तान को लेकर संशय हुआ। तो दोनों सहेलियों ने उसे कप्तान बनाने के लिए जी जान लगा लगा दी।

 

देती हैं एक-दूसरे का साथ
बबीता ने बताया कि जैसे लड़के अपने दोस्तों की मदद के लिए हर समय खड़ी रहती हंै वैसे वे भी हर परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ निभाती हैं। कुछ माह पहले बबीता की मम्मी की तबियत खराब हुई तो दोनों रोज अस्पताल आती। काफी देर तक रहती। वहीं मीनाक्षी के पिताजी की तबियत खराब हुई तो उस दौरान उसकी सहेलियों ने पूरा साथ दिया। मीनाक्षी जब बाहर नौकरी करती थी तो दीपा को कई काम बताती थी, वह उन्हें पूरा भी करती थी।

 

लड़कों को भी दे चुकी हैं मात
मीनाक्षी ने बताया कि एक बार महिला क्रिकेट टीम के कोच प्रेम सिंह ने लड़कियों की टीम को लड़कों की टीम से भिड़ा दिया। दोनों टीमों के बीच फ्रेंडली मैच हुआ। तीनों सहेलियां भी उस मैच में खेली। उस मैच में लड़कियों ने बाजी मार ली।

 

बॉयज सेक्शन से खरीदारी

मीनाक्षी ने बताया कि जैसे कपड़े हमें पसंद होते वैसे गल्र्स सैगमेन्ट में मिलते नहीं हैं। इसलिए खरीदारी बॉयज सेक्शन से ही होती है। आम तौर पर तीनों साथ ही खरीदारी करने जाती हैं।


लड़कों की लाइन में लगो

महिलाओं की लाइन में लगने के दौरान कई बार महिलाएं यह भी कह देती हंै कि लड़कों की लाइन में लगो। बबीता ने बताया कि जब मैं भीलवाड़ा में जॉब करती थी, तब कई बार टिकट लेने के दौरान ऐसा हुआ। वहीं स्कूल में कई बार छोटे बच्चे सर भी कह देते हैं।

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