Amazing: अरावली में छुपा है नायाब खजाना, देखकर रह जाएंगे हैरान

वन विभाग की दस वर्षीय रिपोर्ट में बंद रहते हैं। जबकि इसे सार्वजनिक किया जाए तो जन जागरुकता बढ़ सकती है।

By: raktim tiwari

Published: 17 Oct 2020, 03:40 PM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

नाग पहाड़ और अरावली पर्वतमाला के निकटवर्ती मैदानी इलाके में औषधीय महत्व के कई पौधे और वनस्पति मौजूद है। आम लोग इस खजाने से बेखबर हैं। जिले में कितने औषधीय महत्व के पौधे और वनस्पति मौजूद है, इसके आंकड़ा वन विभाग की दस वर्षीय रिपोर्ट में बंद रहते हैं। जबकि इसे सार्वजनिक किया जाए तो जन जागरुकता बढ़ सकती है।

अरावली पर्वतमाला से जुड़े शास्त्री नगर, कोटड़ा, सराधना, तारागढ़, पुष्कर-अजमेर के बीच नाग पहाड, घूघरा घाटी, बीर, दांता, जतिया, सरवाड़, किशनगढ़, नूरियावास और ब्यावर के के विभिन्न हिस्सों के वन क्षेत्र शामिल हैं। यहां पाए जाने वाले कई पौधों से आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनती हैं।

यह पौधे हैं मौजूद
औषधीय-खरणी, कुमठा, अमलताश, आंवला, तुलसी, बेल, देसी बबूल, खैर, एरूंज, धोकड़ा, जूली फ्लोरा, नीम, खेजड़ी चुरैल, करंज, कचनार और अन्य
झाड़ी प्रजाति-डासण, गागण, बेर, पियागण, खरेणा,वज्रदंती, थोर, गुल ए बनफशा।
वृक्ष-खेजड़ी (राज्य वृक्ष), पीपल, नीम और अन्य

लोग नहीं जानते महत्व
आम लोग औषधीय पौधों की पहचान और उनका महत्व नहीं जानते हैं। वज्रदंती का उपयोग टूथपेस्ट में होता है। बापची पौधे निर्मित दवा दिमाग को ठंडा रखती है। इसके फल को रातभर पानी में भिगोने के बाद सुबह दूध के साथ प्रयोग में लिया जाता है। गुल ए बनफशा का भी स्वाथ्य के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रति दस वर्ष में यूं होता है सर्वेक्षण
-औषधीय पौधों और वनस्पति का सर्वेक्षण
-नदियों-झीलों में पानी की स्थिति-सूखे और बरसात का आकलन
-जलीय जीव-जंतुओं में वृद्धि-कमी
-पेड़-पौधों की लकड़ी की स्थिति
-रैंगने वाले जीव-जंतुओं का आकलन
-वन्य क्षेत्र में अतिक्रमण/हरियाली में कमी

मौसम/मृदा प्रकृति में बदलाव
काजरी और मेडिसनल बोर्ड भी करते सर्वे नाग पहाड़ अथवा जिले के वन्य और क्षेत्र में औषधीय पौधे- वनस्पति मौजूद है। इनकी गणना वन विभाग के अलावा बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया, जयपुर और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान केंद्र जोधपुर भी करते हैं। वन विभाग की टीम भी उनके साथ पौधों को चिन्हित कर रिपोर्ट भेजती है।

कई प्रजातियां खतरे में
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के. सी. शर्मा ने निर्देशन में एक शोधार्थी ने 14 साल पूर्व नाग पहाड़ और इसके आसपास के इलाकों में औषधीय महत्व के पौधों और वनस्पति पर शोध किया गया था। इसमें 2 हजार औषधीय और वनस्पतियां रेड जोन (विलुप्त या खतरा) में चिन्हित हुई थी


बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल मेडिसनल प्लांट बोर्ड वनस्पति-औषधीय पौधों का सर्वेक्षण करता है। पेड़-पौधों से जुड़े अहम बिंदुओं की आमजन को जानकारी मिले तो जागरुकता बढ़ सकती है।
प्रो. अरविंद पारीक, विभागाध्यक्ष बॉटनी, मदस विवि
प्रति दस वर्ष में वन विभाग औषधीय पौधों-वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, जलाशयों इत्यादि का व्यापक सर्वे होता है। यह रिपोर्ट केंद्र/राज्य सरकार तक जाती है।
सतीश शर्मा, सेवानिवृत्त मंडल वन अधिकारी

raktim tiwari Reporting
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