कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं एनेस्थेटिक चिकित्सक

कोविड-19 के आईसीयू में मरीजों को वेंटीलेटर व ऑक्सीजन पर कर रहे हैं सपोर्ट, जेएलएन मेडिकल कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन

By: CP

Published: 17 Oct 2020, 01:50 AM IST

अजमेर. कोरोना संक्रमित मरीजों को आईसीयू में अगर कोई संभालने और केयर करने वाला है तो वह है एनेस्थेटिक चिकित्सक एवं रेजीडेंट चिकित्सक। यही वजह है कई मरीजों को मौत के मुंह से भी बाहर खींच कर लाया जा सका। वेंटीलेटर, बाईपैप मशीन एवं ऑक्सीजन सिलैण्डर के माध्यम से मरीजों को संभालने वाले एनेस्थेटिक चिकित्सकों की मेहनत को जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से सराहा गया।

कॉलेज के सभागार में शुक्रवार को विश्व निश्चेतना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में प्रिंसीपल डॉ. वी.बी. सिंह ने कहा कि निश्चेतना विभाग ने कोविड 19 के मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जान बचाई। एनेस्थेटिक चिकित्सकों, रेजीडेंट की सेवाओं के माध्यम से अपना दायरा बढ़ाया है। मरीजों का भरोसा जीता है। पहले ऑपरेशन के लिए बेहोशी के लिए ही एनेस्थेटिक की पहचान थी लेकिन अब मरीज को वेंटीलेटर व ऑक्सीजन के माध्यम से बचाने, श्वास नली में डालना, न्यूट्रिशन आदि कार्य का विस्तार हुआ है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने कहा कि जब देश व समाज में सामाजिक दूरी रख कर कोरोना से बचने की सलाह दी जा रही है ऐसी परिस्थिति में एनेस्थेटिक चिकित्सकों ने मरीज से सटकर, पास रहकर उनका इलाज किया, उनकी जान बचाई। घंटों तक मरीज के पास रहकर उन्होंने ऑक्सीजन, वैंटीलेटर आदि का सहारा दिया। विभाग के रेजीडेंट ने भी अच्छी सेवाएं दीं। अतिरिक्त प्रिंसीपल डॉ. एस.के. भास्कर, डॉ. डॉ. संजीव माहेश्वरी भी मौजूद रहे। निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कविता जैन ने कहा कि एनेस्थेटिक सिर्फ बेहोश ही नहीं करता वरन आईसीयू केयर और दर्द निवारण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कोविड मरीजों के उपचार के दौरान कई रेजीडेंट चिकित्सक खुद संक्रमित हो गए लेकिन ठीक होने पर पुन: आईसीयू में ड्यूटी देने पहुंच गए। प्रोफेसर डॉ. अरविन्द खरे ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर से बाहर आकर एनेस्थेटिक चिकित्सकों न रेजीडेंट ने कोविड 19 के आईसीयू की बागडोर संभाली। एनेस्थिसिया विभाग के चिकित्सकों ने सभी चिकित्सकों को कोविड 19 के मरीजों के उपचार के लिए प्रशिक्षित किया। पर्सनल प्रोटेक्शन, पेशेन्ट प्रोटेक्शन, हैंड हाईजीन, पीपीई किट पहनने तथा उतारने की विधि, इन्फेक्शन कंट्रोल, ऑक्सीजन थैरेपी, वेंटीलेटर मैनेजमेंट आदि के बारे में प्रशिक्षित किया। सीनियर प्रोफेसर डॉ. नीना जैन ने बताया कि हर वर्ष जनजागरूकता कार्यक्रम विभाग की ओर से किए जाते रहे हैं। संगोष्ठी में डॉ. वीना पटौदी, डॉ. वीना माथुर, डॉ. पूजा माथुर, डॉ. सुरेन्द्र सेठी, डॉ. मैना सिंह, डॉ. दीपक गर्ग. डॉ. बीना ठाडा, डॉ. मीरा, डॉ. दीपिका, सीनियर रेजीडेंट व जूनियर रेजीडेंट उपस्थित रहे।

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