scriptArmy had handed over the responsibility to BSF by conquering Lal Bamba | आर्मी ने पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी फतह कर बीएसएफ को सौंपी थी जिम्मेदारी | Patrika News

आर्मी ने पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी फतह कर बीएसएफ को सौंपी थी जिम्मेदारी

अटैक में गोली खाने वाले भिनाय निवासी महेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया तब का मंजर, 16 दिसम्बर 1971 की रात आर्मी ने पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी को कर दिया था नेस्तनाबूद (गौरव गाथा..भारत-पाक युद्ध 1971)

अजमेर

Published: December 18, 2021 02:16:20 am

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. भारत-पाक के बीच हुए 1971 के युद्ध में भारतीय जवानों ने गोलीबारी व तोपों से पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया था। पाकिस्तान से लाल बम्बा चौकी को कब्जाने व खाली करवाने के बाद भारतीय सेना ने बीएसएफ बटालियन को लाल बम्बा चौकी की जिम्मेदारी सौंप दी। इस चौकी पर कब्जा करने के दौरान अजमेर जिले के नांद (पुष्कर) हाल भिनाय निवासी बीएसएफ के जवान महेन्द्र सिंह राठौड़ पैर में गोली लगने से जख्मी हो गए। इसके बावजूद वे क्रॉस फायरिंग करते रहे। आज भी युद्ध का मंजर उनकी आंखों के सामने आने पर उनकी भुजाएं फड़क उठती हैं।
आर्मी ने पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी फतह कर बीएसएफ को सौंपी थी जिम्मेदारी
आर्मी ने पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी फतह कर बीएसएफ को सौंपी थी जिम्मेदारी
बीएसएफ से सेवानिवृत्त महेन्द्र सिंह राठौड़ (78) पुत्र मोहब्बत सिंह ने पत्रिका से खास बातचीत में 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध का आंखों देखा हाल बयां किया। राठौड़ ने बताया कि 15 दिसम्बर 1971 की रात भारत के श्रीगंगानगर पार करने पर पाकिस्तानी सीमा में लाल बम्बा चौकी पर भारी गोलीबारी एवं तोपों से हमला बोलकर पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया था। 16 दिसम्बर अलसुबह भारतीय सेना ने करीब एक किमी पीछे बीएसएफ की बटालियन को पाकिस्तान की लाल बम्बा चौकी पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का आदेश दिया। भारतीय सेना की कवर फायरिंग के बीच बीएसएफ की बटालियन आगे बढ़ते हुए लाल बम्बा चौकी तक पहुंच गई। बीएसएफ की बटालियन में करीब 40 जवान/सिपाही की सूचना पर 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने काउंटर अटैक कर दिया। इस गोलीबारी में महेन्द्र सिंह राठौड़ के पैर में गोली लगने से वे जख्मी हो गए। जख्मी होने के बावजूद वे क्रॉस फायरिंग करते रहे। आर्मी के आदेश पर बटालियन को पीछे हटना पड़ा।
हौसला बुलंद था भारतीय सैनिकों का

उन्होंने बताया कि भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों का बुलंद हौसला था। बीएसएफ बटालियन भारतीय सेना के साथ-साथ आगे बढ़ रही थी। बटालियन के सिपाही भी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ रहे थे।
गौरव गाथा सुन बेटे का भी फूल जाता है सीना

महेन्द्र सिंह के पुत्र शिवपाल सिंह बताते हैं कि उनके पिता की ओर से भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों व बीएसएफ बटालियन के सैनिकों की गौरव गाथा सुनकर उनका सीना भी गर्व से फूल जाता है।
19 बटालियन बीएसएफ में थे तैनात

महेन्द्र सिंह राठौड़ 19 बटालियन बीएसएफ में तैनात थे। श्रीगंगानगर में 1 एस चौकी पर पाकिस्तान की चौकी लाल बम्बा पर तैनात थे।

गोली लगने पर पांच किमी तक रेंगते हुए चले
ए कंपनी 3 प्लाटून नम्बर 69198021 सिपाही पद पर कार्यरत राठौड़ के पैर में गोली लगने के बाद पांच किलोमीटर तक रेंगकर चले। करीब 24 घंटे बाद मेडिकल टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर पूना में इलाज किया।

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