अब तो DGP कपिल गर्ग तक बोल गए, 'सरकारी तंत्र के सहयोग से पनप रहे बजरी माफिया'

Manish Singh | Updated: 14 Jun 2019, 03:51:22 PM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

अजमेर में क्राइम मिटिंग लेने आए आए डीजीपी, राजस्थान पत्रिका के सवाल पर बोले

जयपुर/अजमेर।

राजस्थान में बजरी माफियाओं का आतंक इस पैमाने तक पहुंच गया है कि इससे पुलिस तक लाचार सी नज़र आने लगी है। नौबत यहां तक पहुंच गई है कि प्रदेश के पुलिस मुखिया भी मानने लग गए हैं कि बजरी माफियाओं को पनपाने में सरकारी तंत्र भी अहम भूमिका निभा रहा है।

दरअसल, DGP कपिल गर्ग शुक्रवार को अजमेर के पुलिस लाइन मैदान में संपर्क सभा में शामिल होने के लिए पहुंचे हुए थे। सभा के बाद गर्ग मीडिया से मुखातिब हुए और बजरी माफियाओं सहित कई सवालों के जवाब दिए।

'बजरी माफियाओं को सरकारी तंत्र का सहयोग'
पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने राज्य में बढ़ते बजरी माफिया और अपराध के सवाल पर माना कि आज बजरी एक समस्या विकराल रूप ले गई है। ये समस्या भी है तो लोगों की आवश्यकता भी। यही कारण है कि बजरी माफिया पनप रहे है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन माफियाओं को सरकारी तंत्र का भी सहयोग मिल रहा है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि बजरी से संबंधित विभाग और पुलिस कमी को ढूंढकर उसके नियंत्रण के भी प्रयास करेंगे।

पुलिस के हौंसले बुलंद, अपराधों में आई कमी
DGP कपिल गर्ग ने कहा कि राज्य में अपराधों को खोलने में पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है, जिसकी वजह से पुलिस के हौंसले बुलंद हैं। गत वर्ष की तुलना में वर्तमान में अपराधों में कमी भी आई है। विभाग के कनिष्ठतम (कॉंस्टेबल) पुलिस कर्मियों से संपर्क सभा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अपराध बढ़ रहा है लेकिन पुलिस उन पर नियंत्रण बनाने और उन्हें खोलने के लिए बेहतर स्थिति में है।

'एफआईआर दर्ज़ करने के निर्देश'
डीजीपी कपिल गर्ग ने बताया पुलिस ने 235 संवेदनशील अपराधों में से 35-37 को छोड़ सभी मामलों को खोला है और पुलिस चाहती है कि किसी भी अपराध की सबसे पहले एफआईआर दर्ज हो।

उन्होंने कहा कि देश को पुलिस अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था से मिली है जिसका परिणाम यह रहा है कि हम अपने आप को बदल नहीं पाए या उस हद तक सफल नहीं हो सके। एक समय एफआईआर दर्ज कराना ही अपने आप में चुनौती हुआ करता था लेकिन आज एफआईआर की प्रक्रिया सरल है। पहले अपराध पंजीकृत ही नहीं होते थे लेकिन वर्तमान में सरकार की नीति है कि हर अपराध पंजीकृत हो क्योंकि किसी भी मामले में न्याय दिलाने का पहला चरण ही एफआईआर दर्ज कराना है।

गर्ग ने कहा कि अपराध घटते बढ़ते रहते हैं लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराना पीडि़त का पहला दायित्व है और प्रदेश की पुलिस भी चाहती है कि कोई भी पीडि़त एफआईआर दर्ज कराने से महरूम न रहे। उन्होंने कहा कि' डिकाय ऑपरेशन' करना भी अपराध दर्ज करने के लिए ही किया जा रहा है ताकि कोई भी अपराधी छूट न सके।

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