लोन देने के नाम पर किसानों से हो रहा ये मजाक, अगर चाहिए लोन तो चुकानी होगी उनको ये कीमत

प्रदेश के किसानों को कॉपरेटिव सोसायटी या सहकारिता बैंक से खेती करने के लिए लोन चाहिए तो उन्हें पहले तीन हजार की यूरिया, डीएपी खाद की खरीद करनी होगी।

By: सोनम

Published: 09 Dec 2017, 08:16 PM IST

मनीष सिंह चौहान /ब्यावर. प्रदेश के किसानों को कॉपरेटिव सोसायटी या सहकारिता बैंक से खेती करने के लिए लोन चाहिए तो उन्हें पहले तीन हजार की यूरिया, डीएपी खाद की खरीद करनी होगी। किसान को भले ही यूरिया डीएपी की जरुरत नहीं है। लेकिन लोन तभी मंजूर किया जाएगा जब उसकी जेब में सहकारी समिति के गोदाम से खरीदे गए खाद की तीन हजार रुपए की पर्ची होगी। बैंक या सहकारी समिति में पर्ची दिखाए जाने के बाद ही लोन की राशि जारी होगी। यूरिया या डीएपी की खरीद में लोन का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं रखा गया है।

 

तीन लाख का लोन लेने वाले या दस हजार का लोन लेने वाले किसान भी इतने ही तीन हजार की राशि के यूरिया की खरीद करेंगे। सभी के लिए एक निश्चित राशि तय कर दिए जाने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। कई किसान पूरे साल भर ही पांच सौ रुपए से अधिक खाद की खरीद नहीं करते हैं। इसके बावजूद तीन हजार की खाद खरीदने के तुगलकी आदेशों से किसान कॉपरेटिव सोसायटी से दूरी बनाकर लोन के लिए महाजनों के चंगुल में फंसते जा रहे हैं।

 

 

 

 

 

13 बैंक हैं जिले में
अजमेर जिले में 13 कॉपरेटिव बैंक हैं। केवल अजमेर शहर में दो बैंक है, जबकि जिले में अन्य जगह एक बैंक है। इन बैंकों के अधीन सहकारी समितियां भी है। जिले में अजमेर के जयपुर रोड, खाइलैण्ड मार्केट के बाहर, ब्यावर, मसूदा, बिजयनगर, भिनाय, केकड़ी, सरवाड़, नसीराबाद, पुष्कर, पीसांगन, किशनगढ़ व अरांई में बैंक किसानों के लिए खुले हुए हं।

एक लाख से अधिक किसान है जुड़े
जिले की 13 कॉपरेटिव बैंकों से तकरीबन एक लाख से अधिक किसान सीधे जुड़े हुए हैं। इन किसानों को साल में दो बार छह-छह माह के अंतराल में नई फसल उगाने पर लोन की आवश्यकता पड़ती है। सालों से किसान इन्हीं बैंकों के भरोसे लोन उठा रहे हैं।

banks fraud with farmers for loan compulsion to by compost

फैक्ट फाइल
सहकारी समिति के सूत्रों का कहना है कि जिस किसान के एक बीघा जमीन है। उसे खेती के लिए दस किलो यूरिया व बीस किलो डीएपी की छह माह में एक मर्तबा आवश्यकता पड़ती है। 21 रुपए प्रति किलो की दर से बिकने वाला डीएपी 420 रुपए तथा यूरिया 60 रुपए का किसान छह माह में खरीदता है। किसान अधिकतम पांच सौ रुपए में एक फसल तैयार कर लेता है। पूरे साल में एक हजार रुपए सभी फसलों को तैयार करने के लिए चाहिए। ऐसे में तीन हजार का यूरिया व डीएपी खरीदकर वह कहां संभालेगा इसी कारण किसान अब दूरी बना रहे हैं।

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काटकर दे रहे हैं लोन
ग्राम सेवा सहकारी समितियां तथा कॉपरेटिव बैंक से किसानों को यह आदेश आने के बाद तीन हजार रुपए काटकर लोन दिया जा रहा है। तीन हजार की यूरिया डीएपी खरीद की रसीद दिखाने के बाद रोका गया तीन हजार का लोग दूसरी किश्त के रुप में जारी किया जा रहा है।

मवेशी पालकों को नहीं जरुरत

अधिकारियों की माने तो जिन किसानों ने बकरियां व गौवंश पाल रखा है, उन किसानों को यूरिया डीएपी खाद की जरुरत ही नहीं पड़ती। बकरियों का खाद पूरे साल भर तक काम आता है। ऐसे में इन किसानों को जबरन यूरिया व डीएपी थोपा जा रहा है।

 

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रजिस्ट्रार ने इसके आदेश जारी किए थे। अब इसमें ढिलाई दी गई है।
बजरंगलाल, प्रबंध निदेशक, दी अजमेर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक, अजमेर

यूरिया व डीएपी की खरीद के आदेश गलत हैं। इस बारे में शिकायत मिली थी। सहकारिता मंत्री व विभाग को इस बारे में लिखा गया है। किसानों का हित पहले है। इन आदेशों से यूरिया कंपनी को फायदा होगा। इसी कारण हम ऐसे आदेश निरस्त करवाएंगे।
शंकरसिंह रावत, विधायक, ब्यावर

सोनम Reporting
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