भीलवाड़ा उदयपुर की विद्युत व्यवस्था होगी 'हाईटेकÓ

केन्द्र सरकार ने किया चयनित, स्काडा सिस्टम लागू करने की तैयारी

उपभोक्ताओं को मिलेंगी सुविधाएं,विद्युत तंत्र सुधार पर खर्च होंगे करोड़ों

अजमेर डिस्कॉम

By: bhupendra singh

Published: 06 Sep 2021, 07:41 PM IST

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. अजमेर विद्युत वितरण निगम के तहत आने वाले भीलवाड़ा और उदयपुर जिले में बिजली व्यवस्था को 'हाइटेकÓ किया जाएगा। इसके लिए अजमेर शहर की तर्ज पर यहां स्काडा (सुपरवाइजी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजीसन) सिस्टम लागू किया जाएगा। अजमेर डिस्कॉम इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। उदयपुर और भीलवाड़ा की जनसंख्या 2.75 लाख से अधिक होने की वजह से इन शहरो मे स्काडा मय डिस्ट्रिब्यूशन मेंनेजमेंट सिस्टम के लिए प्रोजेक्ट के चुना गया है। इन दोनो शहरों का क्षेत्रफल तथा विद्युत उपभोग अजमेर जिले के लगभग समान है। स्काडा के जरिए ऑनलाइन काम होने से वर्तमान में जीएसएस पर जो कार्य कर्मचारियों के जरिए होता था वह काम अब कंप्यूटर से ऑनलाइन हो सकेगा। जिससे एक तरफ जहां करोड़ों रूपए की बचत तो होगी वहीं दूसरी तरफ दुर्घटनाओं में कमी आएगी। फीडर का जो डाटा वर्तमान में मीटर तथा अन्य उपकरणों से व्यक्तिगत रूप से लेना पड़ता है वह डाटा अब सीधे कंप्यूटर से ही देखा जा सकेगा। लोड पोजीशन, पावर ट्रांसफार्मर की जानकारियां तथा शटडाउन लेने का कार्य भी ऑनलाइन होगा।

सौ फीसदी मीटरिंग का लक्ष्य

कार्ययोजना के तहत 100 फीसदी मीटरिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें फीडर और डीटी मीटरिंग (जून 2023 तक), कृषि डीटी मीटरिंग (मार्च 2025 तक), प्रीपेड उपभोक्ता मीटरिंग मार्च 2025 तक एवम अन्य बुनियादी ढांचे के कार्यों के लिए योजनाएं शामिल हैं। छीजत में कमी पर लक्षित कार्य, वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लक्षित कार्य, छीजत में कमी पर केंद्रित कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

योजना से 100 शहर जुड़ेंगे

इस योजना के तहत 2.75 लाख से अधिक आबादी के देश 100 बड़े शहरों को शामिल किया गया है। इनमें उदयपुर व भीलवाड़ा के अलावा राजस्थान के कई अन्य शहर भी शामिल है जहां स्काडा सहित डिस्ट्रिब्यूशन मेंनेजमेंट सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।

इन शहरों में पूर्व में लागू हो चुका है स्काडा

पूर्व मे राजस्थान के पांच बडे शहरो जयपुर, कोटा, जोधपुर, बीकानेर और अजमेर मे केन्द्र सरकार की आरएपीडीआरपी योजनांतर्गत स्काडा मय डिस्ट्रिब्यूशन मेंनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जा चुका है। इन शहरों के 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रो को स्वचालित प्रणाली से जोड़ा जा चुका है।

केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय का रहा काम

केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र हेतु सुधार कार्यक्रम की रूपरेखा जारी की गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता और विश्वसनीय की बिजली आपूर्ति करना, वित्तीय और परिचालन रूप से कुशल वितरण क्षेत्र के एटीएंडसी घाटे को 12-15 प्रतिशत तक कम करना, 2024-25 तक एसीएस-एआरआर के अंतराल को शून्य तक कम करना है। इसमें सम्बंधित डिस्कॉम कम्पनी को कार्य योजना बनाकर देना होगा और उपलब्ध फंड तभी मुहैया होगा जब कार्य योजना के मुताबिक परिणाम मिलेंगे।

303758 करोड़ खर्च करने का प्रावधान

योजना मे कुल 3,03,758 करोड़ रुपए के खर्च करने का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार 97,631 करोड़ का अनुदान देगी। इस योजना को पार्ट ए और पार्ट बी मे बांटा गया है। पार्ट ए में मीटरिंग और वितरण बुनियादी ढांचे मे सुधार किया जाएगा और पार्ट बी मे प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण और अन्य सक्षम और सहायक गतिविधियां शामिल की गई है। कार्य योजना में मीटरिंग और वितरण बुनियादी ढांचा सम्बंधित कार्य, वित्तीय व्यवहार्यता और सुधार उपाय, परिणाम और मूल्यांकन को शामिल किया जाएगा। कार्य योजना ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नियोजित नोडल एजेंसी की राय से बनाई जाएगी जिसे राज्य स्तरीय वितरण रिफोर्म कमिटी द्वारा अनुमोदित करवाना होगा।

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