Big challenge: सरकारों के लिए चुनौती बन रही मानव तस्करी

मानव तस्करी पर नहीं लग पाई है रोकथाम। बच्चों को मजदूरी का लालच देकर गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भेजा जाता है।

By: raktim tiwari

Published: 18 Oct 2020, 08:28 PM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बावजूद देश और प्रदेश में मानव तस्करी पर अंकुश नहीं लग पाया है। राजस्थान सहित महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, तेलंगाना और अन्य प्रदेश में मानव तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस की मानव तस्करी यूनिट ने कई मामलों में किशोरवय बालक-बालिकाओं और महिलाओं को मुक्त कराया है। लेकिन वृहद स्तर पर मानव तस्करी जारी है।

वैश्विक स्तर पर 18 साल से कम उम्र के बालक-बालिकाओं और महिलाओं-पुरुषों को बंधक बनाकर तस्करी का काम जारी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ बच्चों और महिलाओं की तस्करी होती है। इनसे बाल श्रम, यौन शोषण अथवा अन्य जानलेवा उद्यमों में कामकाज कराया जाता है। राजस्थान से उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, कोटा और अन्य हिस्सों से बच्चों को मजदूरी का लालच देकर गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भेजा जाता है।

जीते हैं भयावह जिंदगी
मानव तस्करी में चपेट आए बच्चे,महिलाएं भयावह जिंदगी जीते हैं। आरा-तारी की फैक्ट्रियों, कारखानों, होटल-ढाबों में इन्हें दो वक्त का खाना भी ढंग से नसीब नहीं होता। मजदूरी मांगने पर तस्करों-संचालकों द्वारा मारपीट की जाती है। जोखिम भरे कामकाज के दौरान कई बालक-बालिकाओं के तो हाथ-पैर भी कट चुके हैं।

देश में तीन साल में मानव तस्करी (लाख में)
2017-15,488
2018-19,223
2019-22, 524
फैक्ट फाइल (देश में तस्करी)
18 साल से नीचे के किशोर-15, किशोरी-35 (प्रति हजार)
18 साल से ऊपर के युवा-3 पुरुष, 12 मादा
(नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो)

प्रदेशवार मानव तस्करी ग्राफ
राजस्थान-849, महाराष्ट्र-655, बिहार-451, दिल्ली-490, तेलंगाना-438, असम-3352019 में शिरडी से लापता लोग-30 हजार (आरटीआई के अनुसार)

केस-1

मानव तस्करी यूनिट ने दो साल पहले गगवाना के निकट हाइवे पर होटल से छापा मारकर छह बाल श्रमिकों को मुक्त कराया था। सभी बच्चे आसपास के गांव के थे। इनसे होटल में बाल श्रम कराया जाता था।
केस-2
24 परगना नॉर्थ के नेजटहाट थाना पुलिस ने दस वर्षीय बालक को उसके सौतेले पिता ने बेच दिया था। मानव तस्करी यूनिट और पश्चिम बंगाल पुलिस ने उसे बीते दिसंबर में लौंगिया मोहल्ला से मुक्त कराया था।

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raktim tiwari Reporting
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