Big issue: आबोहवा से बिगड़ता शहर, घुल रहा धुएं का जहर

बीते साल 25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद सिटी बस, ऑटो टैम्पो, कार-जीप और दोपहिया वाहनों के पहिए थम गए थे। अब कोरोना के साथ फिर बढऩे लगा ग्राफ।

By: raktim tiwari

Published: 22 Feb 2021, 08:37 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए बीते साल मार्च से मई तक हुआ लॉकडाउन पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद साबित हुआ था। लेकिन आठ महीने में हालात बदतर हो चले हैं। ऐलिवेटेड रोड निर्माण कार्य से सड़कें खस्ताहाल हैं। आए दिन जाम और वाहनों की रेल-पेल से शहर में फिर से प्रदूषण बढ़ गया है।
बीते साल 25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद सिटी बस, ऑटो टैम्पो, कार-जीप और दोपहिया वाहनों के पहिए थम गए थे। जिले के ब्यावर, पीपलाज की पत्थर, सीमेंट फैक्ट्रियों और किशनगढ़ के मार्बल यूनिट में भी उत्पादन ठप रहा। इसका फायदा पर्यावरण को मिला। आम दिनों में 120 से 145 के बीच रहने वाला अजमेर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 41 से 45 जा पहुंचा था। प्रदूषण नियंत्रक मंडल के मानकों के अनुसार यह स्वास्थ्यवद्र्धक माना जाता है।

आठ महीने में फिर हालात बदतर
बीते साल 20 मई से लागू हुए मॉडिफाइड लॉकडाउन के बाद से हालात बदल गए हैं। आठ महीने में हालात बदतर हो चले हैं। सड़कों पर सुबह से देर रा तक दोपहिया, चौपहिया वाहन दौड़ रहे हैं। ऐसे में शहर में प्रदूषण बढऩे लगा है। पिछले आठ महीने में एयर क्वालिटी इंडेक्स वापस 115 से 130 के बीच पहुंच गया है। इनमें ट्रक, ट्रेलर, ट्रेक्टर, बस, ऑटो, टैम्पो, दोपहिया-तिपहिया वाहन शामिल हैं।

ऐलिवेटेड रोड कार्य बना मुसीबत
शहर में पुराने आरपीएससी भवन-कचहरी रोड से मदार गेट, स्टेशन रोड, बाटा तिराहा और आगरा गेट, पृथ्वीराज मार्ग, स्टेशन रोड होते हुए ऐलिवेटेड रोड कार्य जारी है। सड़कों पर गड्ढों और खुदाई से सड़कें खस्ताहाल हैं। यहां आए दिन वाहनों का जाम लगता है। वाहनों से निकलने वाले धुएं और धूल-मिट्टी से इन इलाकों में पिछले कई महीनों से प्रदूषण मानक 90 से 110 तक बना हुआ है।

ऐसे समझें एयर क्वालिटी इंडेक्स सूचकांक को
0-100:अच्छा यानि कोई दिक्त नहीं
101-200: मॉडरेट बाहर जाने से बचें
201-300: श्वसन संबंधित बीमारियों के मरीजों को तकलीफ
301-400: लंबे समय से बीमार रोगियों को दिक्कत
401-500: बाहर बिल्कुल नहीं निकलें

नियमित नहीं होती प्रदूषण जांच
जयपुर, मुंबई और अन्य शहरों में जगह-जगह प्रदूषण मापने के स्वचलित यंत्र लग चुके हैं। पेट्रोल-डीजल पम्प पर प्रदूषण की जांच होती है। दिल्ली में तो सम-विषम फार्मूले पर वाहन चलाए जा चुके हैं। अजमेर में जहरीले धुएं के मापन और प्रदूषण की नियमित जांच नहीं होती। केवल वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराते वक्त प्रदूषण सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है।

raktim tiwari Reporting
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