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Big issue: कार्यवाहक कुलसचिव और प्राचार्यों के भरोसे चल रहे इंस्टीट्यूट

संस्थान किसी तरह व्यवस्थाओं को चला रहे हैं। इसका सीधा असर उनके विकास कार्यों और शैक्षिक नवाचार पर पड़ रहा है।

अजमेर

Published: January 05, 2022 09:47:19 am

रक्तिम तिवारी/अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, एसपीसी-जीसीए, लॉ और इंजीनियरिंग कॉलेज 'कार्यवाहकों के भरोसे संचालित है। विवि में कुलसचिव तो कॉलेजों में स्थाई प्राचार्य नहीं हैं। संस्थान किसी तरह व्यवस्थाओं को चला रहे हैं। इसका सीधा असर उनके विकास कार्यों और शैक्षिक नवाचार पर पड़ रहा है।
post vacant in institutes
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स्थाई आरएएस की नहीं नियुक्ति
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में बीते साल अक्टूबर में तत्कालीन कुलसचिव कालूराम का तबादला हुआ। तबसे अतिरिक्त संभागीय आयुक्त गजेंद्र सिंह राठौड़ को कार्यवाहक प्रभार सौंपा गया है। सरकार ने किसी आरएस अधिकारी को स्थाई कुलसचिव की जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। विवि में कुलपति सिर्फ शैक्षिक प्रधान होते हैं। जबकि कुलसचिव परिसर में विकास कार्यों, परीक्षात्मक और निर्माण कार्यों की निविदाओं, फर्नीचर खरीद, रद्दी बिक्री, कर्मचारियों की डीपीसी-फिक्सेशन जैसे अहम कार्य अंजाम देते हैं। यहां कुलसचिव की गैर मौजूदगी में वित्त नियंत्रक को जिम्मेदारी को सौंपने से कई बार नुकसान हो चुका है।
दो बार आवेदन, नियुक्तियां अटकी
इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में स्थाई प्राचार्य नहीं है। बड़ल्या कॉलेज में में साल 2015 से स्थाई प्राचार्य पद रिक्त है। मौजूदा वक्त यहीं की रीडर डॉ. रेखा मेहरा के पास अतिरिक्त प्रभार है। महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में 2017 में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अजयसिंह जेठू के बाद प्रो. रंजन माहेश्वरी कार्यवाहक प्राचार्य रहे। अब डॉ. जितेंद्र डीगवाल अस्थाई जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। दो बार फॉर्म भरवाने के बावजूद दोनों कॉलेजों में प्राचार्यों की नियुक्तियां अटकी हैं।
16 साल से नहीं बना कैडर
राज्य के लॉ कॉलेजों में 16 साल से स्थाई प्राचार्य नहीं है। विधि शिक्षकों का पृथक कैडर नहीं बनने से वरिष्ठता तय करना मुश्किल है। अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में वरिष्ठतम सह आचार्य को ही कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। स्थाई प्राचार्य और संसाधनों की कमी से लॉ कॉलेजों को बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिल पाई है।
कहां कितने विद्यार्थी-कार्य
मदस विवि-800 विद्यार्थी: दीक्षांत, कॉलेज सम्बद्धता, परीक्षाएं, सांस्कृतिक समारोह और अन्य कार्य
बड़ल्या इंजीनियरिंग कॉलेज- 2200 हजार विद्यार्थी: भवन निर्माण, नियुक्तियां, प्रवेश, सेमेस्टर परीक्षाएं और अन्य
महिला इंजीनियरिंग कॉलेज-1100 हजार विद्यार्थी: भवन निर्माण, प्रवेश, सेमेस्टर परीक्षाएं और अन्य कार्य
लॉ कॉलेज-850 विद्यार्थी: भवन निर्माण, विकास कार्य, मूट कोर्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, छात्रसंघ चुनाव और अन्य कार्य

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