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Big Issue: कॉलेज में खत्म ना हो जाए कॉमर्स, मंडरा रहा यह खतरा...

राज्य के कॉलेजों में भी कॉमर्स फेकल्टी की सीटों पर पर्याप्त दाखिले होते थे। लेकिन धीरे-धीरे स्कूलों में कॉमर्स संकाय बदहाल हो गया है ।

अजमेर

Published: June 07, 2022 05:00:10 pm

रक्तिम तिवारी

राज्य में स्कूल स्तर पर कॉमर्स विषय बदहाल है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कॉमर्स में लगातार विद्यार्थियों की कमी जारी है। कॉलेजों में पिछले सत्र में कॉमर्स में सीटें खाली रही थीं। हालात यही रहे तो इसका सीधा असर कॉलेजों के प्रथम वर्ष के दाखिलों पर पड़ सकता है।
कहीं कॉलेज में खत्म ना हो जाए कॉमर्स, मंडरा रहा यह खतरा...
कहीं कॉलेज में खत्म ना हो जाए कॉमर्स, मंडरा रहा यह खतरा...
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कॉमर्स में एक दशक पहले तक विद्यार्थियों की तादाद 1 लाख तक हुआ करती थी। जिससे राज्य के कॉलेजों में भी कॉमर्स फेकल्टी की सीटों पर पर्याप्त दाखिले होते थे। लेकिन धीरे-धीरे स्कूलों में कॉमर्स संकाय बदहाल हो गया है ।
कॉलेजों में भी घट रही तादाद

कॉलेजों में भी कॉमर्स में विद्यार्थी घट रहे हैं। सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में सत्र 2021-22 में प्रथम वर्ष कॉमर्स की 90 सीट खाली हैं। बीकानेर, कोटा, सीकर, उदयपुर सहित अन्य बड़े कॉलेजों में भी 30 से 40 प्रतिशत तक दाखिले नहीं हुए हैं। राजकीय महाविद्यालय हिंडौन में तो मात्र 6 विद्यार्थी हैं। उपखंड स्तर पर खुले नए कॉलेजों में तो विद्यार्थियों की संख्या गिनती लायक है।
शिक्षकों की कमी

जिला मुख्यालय के शहरी क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत स्कूल को छोड़ दें तो 70 प्रतिशत उपखंड और ग्रामीण स्तर के स्कूल में कॉमर्स पढ़ाने वाले शिक्षक पर्याप्त नहीं हैं। राज्य के तिजारा खेरवाड़ा, रावतभाटा, अरांई, भिनाय, मांगरोल जैसे कई कॉलेजों में कॉमर्स संकाय ही नहीं है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की वरिष्ठ अध्यापक ग्रेड द्वितीय-2022 भर्ती में भी कॉमर्स विषय में पद नहीं हैं। आयोग की सहायक आचार्य कॉलेज शिक्षा भर्ती-2020 में कॉमर्स के तीन विषयों में 265 पदों की भर्ती प्रक्रियाधीन है।
विज्ञान और कला संकाय में बैंक, बीमा, टेक्निकल, मेडिकल, प्रशासनिक और अन्य नौकरी-व्यवसाय के कई विकल्प हैं। कॉमर्स फील्ड सीए, सीएस, मैनेजमेंट जैसे कुछ फील्ड तक सीमित हैं। कॉमर्स के पाठ्यक्रमों को स्कूल-कॉलेज स्तर तक जॉब ओरिएंटेड बनाने के अलावा औद्योगिक डिमांड के अनुसार बनाने की जरूरत है। तभी इस संकाय में रुझान बढ़ेगा।
प्रो. कैलाश सोडाणी, पूर्व कुलपति मदस विवि

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