Big issue: यूं तैयार होते एडवोकेट, ना कंप्यूटर ना इंग्लिश स्पोकन लैब

पढ़ाई का दायरा 'किताबों तक सिमटा है। जबकि हाईटेक दौर में हिंदी के अलावा अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर ज्ञान आवश्यक है।

By: raktim tiwari

Published: 20 Nov 2020, 10:22 AM IST

रक्तिम तिवारी/ अजमेर.

देश और राज्य को प्रतिवर्ष हजारों वकील देने वाले लॉ कॉलेज संसाधनों में पीछे हैं। इन कॉलेज में ना विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर ना इंग्लिश स्पोकन लैब है। पढ़ाई का दायरा 'किताबों तक सिमटा है। जबकि हाईटेक दौर में हिंदी के अलावा अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर ज्ञान आवश्यक है।

वर्ष 2005-06 में प्रदेश में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। इनमें अजमेर का कॉलेज भी शामिल है। अधिकांश कॉलेज में तीन वर्षीय एलएलबी के अलावा दो वर्षीय एलएलएम सहित डिप्लोमा इन लेबर लॉ और डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी पाठ्यक्रम संचालित हैं। भवनों में केवल लाइब्रेरीराज्य के लॉ कॉलेज के भवन 2012-13 में बने थे। इनमें सिर्फ लाइब्रेरी सुविधा है। विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लेब, खेलकूद जैसे संसाधन नहीं है। जबकि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार कंप्यूटर लेब, अंग्रेजी, हिंदी भाषा शिक्षण और अन्य सुविधाएं जरूरी हैं।

यूं जरूरी है अंग्रेजी सीखना
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ऑनलाइन सुनवाई शुरू हो चुकी है। याचिकाएं और फैसले अंग्रेजी में लिखे-पढ़े जाते हैं। इन्हें ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। अदालत में जज और कई नामचीन वकील अंग्रेजी में संवाद करते हैं। याचिकाओं पर बहस भी अंग्रेजी भाषा में होतीहै। भावी वकीलों को कंप्यूटर ज्ञान के अलावा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसलों को पढऩे, अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर के न्यायिक मुद्दों को समझने के लिहाज से अंग्रेजी शिक्षण जरूरी होता है।

कई कॉलेज-यूनिवर्सिटी अग्रणीय
देश में कई सरकारी और निजी विधि कॉलेज, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर लेब हैं। इनमें एलएलबी, एलएलएम और डिप्लोमा कोर्स में अध्ययनरत विद्यार्थियों को कंप्यूटर पर कामकाज करने के अलावा तकनीकी गुर सीखने का अवसर मिलता है। कई लॉ स्कूल में तो विद्यार्थी ऑनलाइन प्रोजेक्ट तैयार करते हैं। उनके ऑनलाइन लेक्चर होते हैं। न्यायिक क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों का त्वरित अध्ययन और समूह चर्चा होती है। खासतौर पर कोरोना संक्रमण में तो वर्चुअल सुनवाई, कंप्यूटर का इस्तेमाल जरूरी हो चुका है।


यूजीसी में पंजीकृत नहीं
यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों को पंजीयन होता है। संस्थाओं में शैक्षिक विभाग, शिक्षकों और स्टाफ की संख्या, भवन, संसाधन, सह शैक्षिक गतिविधियों के आधार पर पंजीयन होता है। पंजीकृत कॉलेज-विश्वविद्यालयों को विकास कार्यों, शैक्षिक कॉन्फे्रंस, कार्यशाला, भवन निर्माण के लिए बजट मिलता है। राज्य के लॉ कॉलेज के यूजीसी के इस नियम में पंजीकृत नहीं है।

अब तक पिछड़े हैं कॉलेज
प्रदेश के लॉ कॉलेज अब तक पिछड़े हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित व्याख्यातओं की नियुक्ति के बावजूद शिक्षक कम हैं। कुछव्याख्याता अपने सियासी रसूखात के चलते विश्वविद्यालयों और कॉलेज शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित हैं। पृथक प्राचार्य पद सृजित नहीं है। वरिष्ठ रीडर ही यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

raktim tiwari Reporting
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