ये हैं अजमेर के सबसे खूबसूरत मेहमान, इन्हें देखने के लिए जुटती है भीड़

पक्षियों के बारे में जानने और उनकी प्रजातियों को समझने की उत्सुकता नजर आई।

By: raktim tiwari

Published: 10 Feb 2018, 04:30 PM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

देश-विदेश से आए सुंदर पक्षियों को देखकर लोग रोमांचित हो उठे। स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों, पक्षी प्रेमियों सहित आमजन ने आनासागर झील में पक्षियों की अठखेलियां देखी। कुछ ने आसमान में उड़ते पंछियों को देखकर कैमरे से फोटो खींचे। कहीं-कहीं पक्षियों के बारे में जानने और उनकी प्रजातियों को समझने की उत्सुकता नजर आई। राजस्थान पत्रिका एवं जिला प्रशासन, नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण, मदस विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुए बर्ड फेयर-2018 के दूसरे दिन शनिवार को कई कार्यक्रम हुए।

रंगों और कूची से सतरंगी हुई दीवार
रंगों और कूची से क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान की दीवार सतरंगी हो उठी। वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता के तहत विद्यार्थियों और शहरवासियों ने दीवार पर नयनाभिराम पेंटिग्स बनाई। प्राकृतिक दृश्यों, अरावली पर्वतमाला, आनसागर झील में पक्षियों का कलरव, सांस्कृतिक विरासत और अन्य पेंटिग्स शानदार रही। चितेरों ने अंतर्मन में तैरते विचारों को दीवारों पर बखूबी प्रस्तुत किया। देखने वाले इनकी कला की प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सके।

बर्ड फेयर में यह रहे मौजूद

बर्ड फेयर में शिक्षाविद् डॉ. अनंत भटनागर, डॉ.अतुल दुबे, यूनाइटेड अजमेर की संयोजक कीर्ति पाठक, पार्षद ज्ञान सारस्वत, पक्षीविद् महेन्द्र विक्रम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र गांधी सहित कई मौजूद रहे।

कई पक्षी करते यहां प्रजनन

आनासागर झील से सटा छोटा उथला और छिछलेदार जलयुक्त टुकड़ा वास्तव में पक्षियों का पसंदीदा क्षेत्र है। इसे कई पक्षियों की प्रजातियों ने अपना घरौंदा बनाया है। पक्षी और प्रकृति प्रेमियों को यहां मिनी बर्ड सेंचुरी सा एहसास होता है। यहां कई पक्षी प्रजनन कर रहे हैं। सागर विहार कॉलोनी के पाथ-वे से सटी जमीन पर कुछ यूकेलिपट्स और बबूल के पेड़ लगे हैं। बीच के हिस्से में उथला पानी जमा है। देशी पक्षियों को जमीन का यह हिस्सा सबसे पसंद आया है। पानी में पाए जाने वाले कीट, काई और अन्य पदार्थ प्रवासी पक्षियों का मुख्य भोजन है। यहां सूर्योदय से सूर्यास्त होने तक यहां पक्षियों का जमावड़ा लगा रहता है। यह रात्रि में बबूल के पेड़ों पर बने घरौंदों में रहते हैं। इतनी बड़ी तादाद में आनसागर झील में भी देशी पक्षियों की प्रजातियां एकसाथ मौजूद नहीं हैं।

पक्षियों की कई प्रजातियां मौजूद

स्पॉट बिल डक, आईबिस, कॉमन मैना, परपल ग्रे हेरॉन, इग्रेट (व्हाइट ग्रे), मूरहेन, मैलार्ड, कॉमन टील, रफ, किंगफिशर, स्पून बिल, स्पॉट बिल्ड डक, नॉर्दन शॉवलर सहित 50 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं। पिछले साल गर्मियों में यहां सौ स्पॉटबिल डक, 200 कॉमन मैना और 80 से 100 मूरहेन ने प्रजनन किया है। कई पक्षियों के चूजे भी यहां देखे जा सकते हैं। पक्षियों के लिए यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहतरीन है। क्षेत्र में बबूल के पेड़ों की बहुतायत है।

बनाएं पक्षियों के आश्रय स्थल

सागर विहार कॉलोनी सहित आनासागर झील में बबूल के पेड़ देशी पक्षियों के आश्रय स्थल हैं। इन्हें बनाए रखना चाहिए। आसपास के लोग पेड़ों को काटकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। बबूल के पेड़ काटने पर तुरन्त रोक लगनी चाहिए। नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण, वन विभाग और जिला प्रशासन के थोड़े से प्रयासों से यह क्षेत्र संरक्षित हो सकता है।

बन सकती है मिनी बर्ड सेंचुरी

आनसागर में कई वर्षों से प्रवासी पक्षियां की आवाजाही होती रही है। 80 अैार 90 के दशक तक झील के आसपास कॉलोनियां नहीं थी। वैशाली नगर, पुष्कर रोड, आनसागर लिंक रोड और आसपास के इलाके में पक्षियों के लिए प्राकृतिक वैटलैंड मौजूद था। आबादी क्षेत्र बढ़ते ही यह वैटलैंड लगभग खत्म हो गए। हालांकि सरकार ने इस क्षेत्र में वैटलैंड विकसित करने की बात कही है। आनासागर देशी और प्रवासी पक्षियों का उत्तम आश्रय स्थल है। यहां पक्षियों के लिए खाद्य पदार्थ, जलवायु और पेड़-पौधे मौजूद हैं, जो इन्हें पसंद आते हैं। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणविद प्रयास करें तो यह पक्षियों का अहम स्थल और भविष्य का लघु पर्यटन केंद्र बन सकता है।

11 फरवरी को होंगे ये कार्यक्रम

सुबह 8 बजे -नेचर वॉक सागर विहार पाल, शाम 5 बजे समापन -रीजनल कॉलेज के सामने चौपाटी पर

raktim tiwari Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned