बर्ड फेयर से मिलेगी अजमेर को नई पहचान, यूं होगा पूरी दुनिया में दबदबा

बर्ड फेयर से मिलेगी अजमेर को नई पहचान, यूं होगा पूरी दुनिया में दबदबा

raktim tiwari | Publish: Feb, 15 2018 06:40:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

इसमें पक्षियों की आवक बढ़ेगी। युवाओं के लिए भी रोजगार के विविध क्षेत्र खुल सकेंगे।

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

प्रवासी और देशी पक्षियों को रूबरू कराने वाला बर्ड फेयर अगले वर्ष शहरवासियों को कई सौगात देगा। इससे ना सिर्फ अजमेर की अंतर्राष्ट्रीय जगत में पहचान बढ़ेगी बल्कि यहां पर्यटन का नया क्षेत्र विकसित हो सकेगा। आनासागर झील के संरक्षण, संवद्र्धन के लिए सरकार, जनप्रतिनिधि और अफसर बरसों की कोशिशें कर रहे थे। बर्ड फेयर-2018 ने नवाचार की नई राह खोल दी है। इससे झील की सुंदरता तो निखरेगी ही, साथ ही इसमें पक्षियों की आवक बढ़ेगी। युवाओं के लिए भी रोजगार के विविध क्षेत्र खुल सकेंगे।

राजस्थान पत्रिका एवं जिला प्रशासन, नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण, मदस विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 9 से 11 फरवरी तक बर्ड फेयर का आयोजन हुआ। पिछले साल आयोजित बर्ड फेयर ने युवाओं को सर्टिफिकेट इन बर्डिंग कोर्स की सौगात और शहरवासियों को पक्षियों से दोस्ती करना सिखाया। इस बार आयोजित बर्ड फेयर शहर को भविष्य में नई पहचान दिलाएगा। अजमेरवासियों सहित देशी-विदेशी पर्यटकों को कई बदलाव देखने को मिलेंगे।

आनासागर के चारों ओर बनेगा साइलेंट जोन

फायदा-बर्ड फेयर के दैारान जिला कलक्टर गौरव गोयल ने प्रवासी पक्षियों और आनासागर झील के संरक्षण को जरूरी बताया उन्होंने आनासागर के चारों ओर साईलेंट जोन बनाने की घोषणा भी की है। प्रशासन की इस पहल से सुदूर देशों से आने वाले पक्षियों की तादाद बढ़ेगी। साथ ही उन्हें झील के आसपास प्रवास में परेशानी नहीं होगी। ध्वनि प्रदूषण पर पाबंदी लगने से कई प्रवासी और देशी परिन्दे प्राकृतिक माहौल में प्रजनन कर सकेंगे। शोधार्थियों और विद्यार्थियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरवासियों को बर्ड वॉचिंग में आसानी होगी।

नौजवानों के लिए शुरू होगा डिप्लोमा कोर्स

फायदा: पिछले साल आयोजित बर्ड फेयर से प्रेरित होकर महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी ने छह महीने का सर्टिफिकेट इन बर्डिंग कोर्स प्रारंभ किया है। बर्ड फेयर-2018 की अपार सफलता, प्रशासनिक अधिकारियों शहरवासियों के रुझान ने विश्वविद्यालय को फिर नवाचार के लिए प्रेरणा दी है। पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष अध्यक्ष प्रो. प्रवीण माथुर ने सत्र 2018-19 से विश्वविद्यालय में बर्ड वॉचिंग पर डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की घोषणा की। नए कोर्स में जुलाई से प्रवेश शुरू हो जाएंगे। इससे युवाओं को विशेष लाभ होगा। छात्र-छात्राओं के लिए भविष्य में यह रोजगार के अवसर खोलेगा। फॉरेस्ट गार्ड, ईको टूरिज्म, गाइड, पर्यावरण परामर्शी (कंसलटेंट), पक्षी विज्ञान क्षेत्र कॅरियर बना सकेंगे। निजी और सरकारी संस्थानों में नए पदों का सृजन हो सकेगा।

मछली पालन रोकथाम से परिन्दों को मिलेगी आजादी

फायदा: आनासागर झील में प्रतिवर्ष लाखों रुपए में मछली पालन का ठेका दिया जाता है। झील में मछली पकडऩे के लिए मछुआरे और ठेकाकर्मी जाल डालते हैं। देशी और प्रवासी परिन्दों की आजादी में यह बाधक बनते हैं। झील में पटाखे चलाकर परिन्दों को डराया जाता है। पक्षियों को घबराकर उड़कर इधर उधर जाना पड़ता है। ऐसे में सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के आगमन से प्रस्थान तक मछली पकडऩे पर रोक लगाई जानी चाहिए। जिला प्रशासन ने बर्ड फेयर 2019 के दौरान सर्दियों में मछली पालन पर रोक लगाने का फैसला किया है। इससे प्रवासी पक्षियों को कोलाहल से परेशान नहीं होगी। शहरवासी और पर्यटक खुले और शांत माहौल में बर्डवाचिंग कर सकेंगे।

सालाना कलैंडर में शामिल होगा बर्ड फेयर

फायदा : बर्ड फेयर अब जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के सालाना कलैंडर में नियमित कार्यक्रमों की सूची में शामिल होगा जिला कलक्टर गौरव गोयल ने पुष्कर मेले की तरह वर्ष 2019 से प्रतिवर्ष बर्ड फेयर की तिथियां और कार्यक्रम समय रहते तय करने को कहा है। इससे देशी और विभिन्न देशों के विदेशी पर्यटक तीन दिवसीय बर्ड फेयर कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे। जयपुर और अन्य शहरों की तर्ज पर अजमेर के बर्ड फेयर को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। पर्यटक समय पर अजमेर पहुंच सकेंगे। इससे किशनगढ़ हवाई अड्डे पर एयर ट्रेफिक बढ़ेगा। रेल, बस में यात्री भार में इजाफा होगा। साथ ही होटल और पर्यटन उद्योग को फायदा मिलेगा। पर्यटन का नया क्षेत्र विकसित होने पर आनासागर झील के संरक्षण कार्यक्रम में तेजी आएगी।

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