बीसलपुर बांध : हर सालभर 9 टीएमसी पानी तो उड़ जाता है भाप बन कर, रोकने का नहीं कोई उपाय

इतने पानी से बुझ सकती है जयपुर, अजमेर और टोंक की नौ महीने की प्यास, बांध की भराव क्षमता 33 टीएमसी

By: baljeet singh

Updated: 10 Sep 2021, 12:52 AM IST

बीसलपुर बांध जयपुर, अजमेर और टोंक जिले की लगभग 1 करोड़ आबादी की जीवन रेखा है। क्योंकि इतनी बड़ी आबादी की प्यास यही बांध बुझा रहा है। लेकिन इस बार सुस्त रहे मानसून के कारण बांध में बहुत कम पानी आया है। बांध से पानी सप्लाई में कटौती भी शुरू हो गई है। ताकि अगले वर्ष अगस्त तक इन तीनों जिलों की पेयजल जरूरतों को पूरा किया जा सके। लेकिन चौंकाने वाली बात यह भी है कि बांध से सालभर में 9 टीएमसी पानी तो भाप बन कर उड़ जाता है। जितना पानी भाप बन कर उड़ता है, उससे जयपुर अजमेर और टोंक के लिए 9 महीने पेयजल सप्लाई हो सकती है। लेकिन जल संसाधन और जलदाय विभाग पानी के भाप बन कर उडऩे से रोकने को लेकर पूरी तरह से बेबस ही नजर आ रहे हैं। इंजीनियर यही कह रहे हैं कि भाप बन कर उड़ रहे पानी को रोकने की तकनीक फिलहाल उनके पास नहीं है।

मान कर ही बैठे हैं- 9 टीएमसी पानी तो उड़ेगा ही
बीसलपुर बांध की भराव क्षमता 33 टीएमसी के लगभग है। जिसमें से तीनों जिलों की पेयजल जरूरतों के लिए 16 टीएमसी पानी आरक्षित है। 8 टीएमसी पानी टोंक जिले में सिंचाई के काम आता है। वहीं लगभग 9 टीएमसी पानी हर साल भाप बन कर उड़ जाता है। जल संसाधन विभाग व जलदाय विभाग के इंजीनियर कह रहे हैं कि इस नुकसान को तो उठाना ही होगा।

तकनीक अभी परीक्षण के स्तर पर ही
इंजीनियरों के अनुसार बैलून या फोमिंग तकनीक से पानी को भाप बन कर उडऩे से रोकने का प्रयोग परीक्षण में है। किसी छोटे तालाब में बैलून डाल कर पानी के भाप बनने से कुछ हद तक रोका जा सकता है। लेकिन बड़े बांधों में यह तकनीक कारगर नहीं है।

कोई कारगर तकनीक नहीं
बांध से बड़ी मात्रा में पानी भाप बन कर उड़ जाता है। जितना पानी भाप बन रहा है उससे पेयजल जरूरतें काफी हद तक पूरी हो सकती हैं। लेकिन यह नुकसान हमें उठाना ही होगा। कोई कारगर तकनीक अभी तक नहीं आई है।
- रवि सोलंकी, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

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