चंबल में दौड़ रही नावें, हर वक्त हादसे की संभावना

-कोटा हादसे के बाद भी नहीं चेत रहा प्रशासन, राजाखेड़ा, सरमथुरा में होता है नावों का अवैध संचालन

कोटा के चंबल क्षेत्र में नाव के डूब जाने की घटना के बाद जिले में अवैध रूप से संचालित नावों पर रोकने के लिए कोई तैयारी नजर नहीं है। जिला प्रशासन के तमाम कागजी दावों के बीच चंबल क्षेत्र में अवैध रूप से नावों का संचालन जारी है। चंबल नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले ग्रामीण पानी के रास्ते सफर कर रहे हैं।

By: Dilip

Published: 16 Sep 2020, 11:42 PM IST

धौलपुर/ राजाखेड़ा/ सरमथुरा. कोटा के चंबल क्षेत्र में नाव के डूब जाने की घटना के बाद जिले में अवैध रूप से संचालित नावों पर रोकने के लिए कोई तैयारी नजर नहीं है। जिला प्रशासन के तमाम कागजी दावों के बीच चंबल क्षेत्र में अवैध रूप से नावों का संचालन जारी है। चंबल नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले ग्रामीण पानी के रास्ते सफर कर रहे हैं। जिले के करीब पांच दर्जन से अधिक गांव के लोग राजस्थान और मध्य प्रदेश जाने के लिए नाव का सहारा लेते है, सडक़ से राजस्थान व मध्य प्रदेश की दूरी अधिक है और पानी के रास्ते यह दूरी कम हो जाती है। नदी में होकर नाव उन जगहों से गुजरती है, जहां घडि़याल मगरमच्छ होते हैं। यहां हमेशा हादसे का डर बना रहता है। जर्जर नावों से हो रहे बेरोकटोक संचालन से हर समय बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।

चंबल नदी जिले में करीब 145 किलोमीटर क्षेत्र बह रही चम्बल नदी के नजदीक करीब 69 गांव बसे हुए है। ऐसे में मध्य प्रदेश की जिला सीमा से लगे सरमथुरा व राजाखेड़ा क्षेत्र के करीब आधा दर्जन से अधिक घाटों से नावों का संचालन होता है। सडक़ से 100 से 150 किलोमीटर सफर तय करना होता है। वहीं, नाव से यह सफर केवल 20 से 25 किलोमीटर का ही रह जाता है। जल्दी पहुंचने के लिए स्थानीय लोग चंबल में खतरे का सफर तय करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

राजाखेड़ा में जर्जर नावों का अवैध संचालन
राजाखेड़ा के चंबल क्षेत्र में गढ़ी जाफर घाट , अंडवा पुरैनी घाट आदि मुख्य घाटों से प्रतिदिन करीब आधा दर्जन से अधिक नावों का संचालन मध्य प्रदेश की सीमा में पहुंचाने के लिए किया जाता है। यहां संचालित होने वाली नावें दशकों पुरानी है और हाल में पूरी तरह जर्जरावस्था में है। इनकी दशा सुधारने के प्रयास कभी नहीं हुए न ही इनको लाइसेंस देकर इनकी नियमित जांच प्रक्रिया अपनाई गई है। नावों पर क्षमता से कई गुना सवारियों को बैठाया जाता है और साथ मे कृषि उपज, दोपहिया वाहन, व्यापारिक समान भी सवारियों के साथ ढोया जाता है ।

राजाखेड़ा से मध्य प्रदेश की सडक़ सीमा की दूरी करीब 75 किलोलोमीटर से भी ज्यादा है, जबकि चम्बल नदी करके यह दूरी मात्र 25 किलोमीटर ही रह जाती है। ऐसे में 50 किलोमीटर का फेर बचाने के चक्कर में लोग नावों के भरोसे ज्यादा रहते है । इसके अलावा राजाखेड़ा के चंबल तटवर्ती गांवों के लोगों की रिश्तेदारियों भी मध्यप्रदेश में ज्यादा है । इसलिए बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती रहती है।

सरमथुरा में साधनों का अभाव, इसलिए नावों का सहारा
उपखंड क्षेत्र के डांग इलाके में बसे एक दर्जन गांव के लोग अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर भी प्रतिदिन नाव की सवारी कर अपना काम चलाते हैं, हालांकि बीते कई सालों में कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं लेकिन सब कुछ जानते हुए भी उनकी यह दिनचर्या बनी हुई है। क्षेत्र के मदनपुर इलाके के कारीतीर झिरी घाट शंकरपुर घाट आदि पर प्रतिदिन चंबल नदी को पार कर मध्य प्रदेश के सबलगढ़, कैलारस आदि क्षेत्रों में जाने के लिए ग्रामीण बड़ी संख्या में नाव की सवारी कर वहां पहुंचते हैं। स्थानीय ग्रामीण चंबल पार करके मात्र 10 या 15 किलोमीटर दूर बसे मध्य प्रदेश के सबलगढ़ कैलारस क्षेत्र में जाते हैं और वहां से अपना दैनिक जरूरतों का सामान खरीद कर वापस गांव पहुंचते हैं, इस आवागमन के दौरान 20 से 30 रूप्ए तक का ही खर्चा आता है। सडक़ मार्ग से डेढ़ सौ रुपए तक किराया और समय भी अधिक लगता है। यहां के डांग इलाके में बसे इन गांवों तक पक्की सडक़ें भी नहीं है ऐसे में यहां आने जाने का कोई साधन भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। ऐसे में लोगों के नावें ही आवागमन का माध्यम बनी हुई है।

हादसों के बाद भी नहीं चेत रहा प्रशासन
चंबल नदी में नावों के डूबने जैसी घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से नावों के संचालन पर रोक लगाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए जा रहे है। घाटों से संचालित होने वाली अधिकांश नावें जर्जरावस्था में है। संबंधित विभाग के जिम्मेदार नावों के स्थिति को देखकर भी मूक दर्शक बने हुए हंै। यहां कार्रवाई नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

इनका कहना है

नावों के संचालिन के लिए पाबंद किया गया है, संबंधित तहसीलदार, पटवारी, एडीएम व थाना प्रभारियों को भी नावों के संचालन के बारे मे विभाग को सूचना देने के लिए कहा गया है।

मनोज कुमार वर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, धौलपुर

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