Build up india: बहुत खूबसूरत है अजमेर, बनाएं पर्यटन सर्किट

केंद्र सरकार ने भी की है पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने की घोषणा।

By: raktim tiwari

Published: 24 May 2020, 08:29 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

पर्यटन के लिहाज से अजमेर राज्य का प्रमुख केंद्र बन सकता है। जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पर्यटन स्थलों का ‘सर्किट ’ बनाया जाए तो यहां के स्थानीय युवाओं, श्रमिकों और लघु-मझौले उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

केंद्र सरकार ने आम बजट में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी योजनाओं के लिए 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इनमें राजस्थान भी शामिल है। खासतौर पर अजमेर में पर्यटन हब बनने की प्रचुर संभावनाएं मौजूद हैं। विश्व स्तर पर कोरोना संक्रमण से पर्यटन को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। लेकिन पर्यटन भविष्य में अजमेर की रीढ़ साबित हो सकता है।

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जिले में है यह संभावनाएं...
-अजमेर में मुगलकालीन अकबरी किला, ढड्ढों की हवेली, लोढा हवेली, बारादरी, तारागढ़ को बनाया जा सकता है पर्यटन सर्किट
-सावर, मसूदा, सरवाड़, भिनाय, बघेरा, जूनिया के किले को बनाया जा सकता है ग्रामीण पर्यटन सर्किट
-किशनगढ़ में मार्बल स्लरी पर शूटिंग और नागरीदास पैनोरामा
-पुष्कर में जैसलमेर की तर्ज पर डेजर्ट सफारी, सांस्कृतिक महोत्सव-अरावली पर्वतश्रंखला पर माउन्टेन ट्रेकिंग
-नाग पहाड़ पर ईको और मेडिसन टूरिज्म

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साल भर रहती है पर्यटकों की आवाजाही
अजमेर में सालभर पर्यटकों की आवाजाही रहती है। पिछले साल दिसंबर तक 5 लाख विदेशी और 12 लाख देशी पर्यटक पुष्कर, अजमेर आए थे। इस साल 20 मार्च तक इटली, फ्रांस, इजरायल, जर्मनी, अमरीका और स्थानों से विदेशी पर्यटकों की आवाजाही 45 से 60 प्रतिशत तक थी। रेल, बस, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू होते ही पर्यटन फिर बढ़ेगा।


पर्यटन अजमेर के विकास की रीढ़ बन सकता है। पुष्कर, किशनगढ़ और अजमेर में कई शानदार लोकेशन हैं। फाइव-सेवन स्टार होटल, पर्वतारोहण, डेजट सफारी, आयुष जैसे नए पर्यटन क्षेत्र विकसित होंगे तो रोजगार बढ़ेगा। विदेशी निवेश से पर्यटन योजनाओं को पूरा किया जा सकेगा।
डॉ. अभिनव कमल रैना, पर्यटन विशेषज्ञ

मैं अजमेर में रहा हूं। आम दिन में अजमेर जिले के पुष्कर में 30 से 35 प्रतिश तक विदेशी और अन्य स्थानों पर घरेलू पर्यटक 70 प्रतिशत तक आते हैं। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र नए पर्यटन स्पॉट बनाए जा सकते हैं। गुजरात के कच्छ, हरियाणा के सूरजकुंड की तरह स्थानीय हस्तकला और उद्यमिता जैसे वृहद मेले पयर्टन को बढ़ावा दे सकते हैं।
प्रो निमित्त रंजन चौधरी, विभागाध्यक्ष टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली

raktim tiwari Reporting
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