scriptBusy in rural farms and barns, MNREGA battered in the district | ग्रामीण खेत-खलिहानों में व्यस्त, जिले में मनरेगा हुआ पस्त | Patrika News

ग्रामीण खेत-खलिहानों में व्यस्त, जिले में मनरेगा हुआ पस्त

- फसलों का वक्त होने के कारण श्रमिक नहीं दिखा रुचि - डेढ़ माह में मात्र 10 हजार श्रमिक ही बढ़े

जिले में ग्रामीणों के रबी फसलों में व्यस्त होने के कारण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पस्त पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि डेढ़ माह से लेकर अभी तक श्रमिकों की संख्या में कोई खासा इजाफा नहीं हुआ है।

 

अजमेर

Published: December 18, 2021 01:53:17 am

धौलपुर. जिले में ग्रामीणों के रबी फसलों में व्यस्त होने के कारण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पस्त पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि डेढ़ माह से लेकर अभी तक श्रमिकों की संख्या में कोई खासा इजाफा नहीं हुआ है। एक नवम्बर को जहां 13 हजार 6 श्रमिक नियोजित थे, वहीं दीपावली के डेढ़ माह बाद भी जिले में श्रमिकों की संख्या बढ़ कर केवल 24 हजार 211 तक ही पहुंच पाई है। अधिकारियों का तर्क है कि ग्रामीणों के खेती-किसानी में व्यस्त होने के कारण कोई कार्य नहीं मांगने आ रहा है। वहीं, फसलें बोई होने के कारण भूमि भी खाली नहीं है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों के कार्य स्वीकृत करने के बाद भी ग्रामीण नहीं आ पा रहे हैं। पहले बारिश के कारण स्वीकृत नहीं हो पाए कार्य
ग्रामीण खेत-खलिहानों में व्यस्त, जिले में मनरेगा हुआ पस्त
ग्रामीण खेत-खलिहानों में व्यस्त, जिले में मनरेगा हुआ पस्त
जून माह के बाद बारिश तथा बाढ़ आने के कारण जिले के ग्रामीण इलाकों में अधिक पानी भरने के कारण कार्य स्वीकृत नहीं हो पाए। ऐसे में नियोजित श्रमिकों का आंकड़ा नीचे गिर गया था। इसके बाद धीरे-धीरे कार्य स्वीकृत होने लगे, इतने में ही रबी की फसल बुवाई का समय आ गया, फिर दीपावली का त्योहार होने के कारण ग्रामीण वर्ग रंगाई-पुताई में जुट गया। अधिकारियों को संभावना थी कि दीपावली के बाद श्रमिक संख्या में बढ़ोतरी होगी। लेकिन, आशा के अनुरूप श्रमिक संख्या में इजाफा नहीं हो पाया है। मेहनताना भी है बड़ा कारण मनरेगा में कार्य करने वाले श्रमिकों को टास्क आधारित राशि दी जाती है। इसमें भी काफी दिन लग जाते हंै। इसके विपरीत दीपावली पर रंगाई पुताई तथा खेतों में कार्य करने पर करीब 400 से 500 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी पड़ जाती है। ऐसे में जिन ग्रामीणों के खेती-बाड़ी नहीं है, वे दूसरे किसानों के खेतों में कार्य कर मजदूरी कमा लेते हंै। इस कारण भी ग्रामीण नरेगा में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यह चल रहे कार्य
जिले में मनरेगा में ग्रेवल सड़क, गड्ढे, तालाब, तलाई आदि के कार्य संचालित किए जा रहे हैं। ब्लॉक पंचायत कार्य वर्तमान श्रमिक श्रमिक (1 नवंबर) बाड़ी 35 29 7984 2856 बसेड़ी 28 26 3891 3489 धौलपुर 35 35 2161 1863 राजाखेड़ा32 31 3696 1940 सैंपऊ 39 36 3958 2270 सरमथुरा 22 18 2521 1578 कुल 191 175 24211 136 इनका कहना है जिले में श्रमिक संख्या थोड़ी बढ़ी है। वर्तमान में ग्रामीण रबी की फसलों में व्यस्त हैं। इस कारण मनरेगा में श्रमिक संख्या नहीं बढ़ पा रही है। - रामबोल सिंह, अधिशासी अभियंता, मनरेगा

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