शोपीस बने रोडवेज बसों के सीसीटीवी कैमरे

अब नंबरों के सहारे चोरी पकडऩे की तैयारी , परिचालक धड़ल्ले से कराते हैं बिना टिकट यात्रा
धौलपुर. रोडवेज प्रशासन ने बसों में परिचालकों की कारगुजारी रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य जोर-शोर से किया गया। लेकिन अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में बस परिचालकों के बिना टिकट यात्राएं कराने के मामले भी सामने आ रहे है। बसों में अंकित नंबरों के जरिए मुख्यालय व स्थानीय डिपो अधिकारियों के पास ऐसी शिकायतेें पहुंच रही है।

By: Dilip

Updated: 10 Sep 2020, 11:26 PM IST

अब नंबरों के सहारे चोरी पकडऩे की तैयारी

-परिचालक धड़ल्ले से कराते हैं बिना टिकट यात्रा
धौलपुर. रोडवेज प्रशासन ने बसों में परिचालकों की कारगुजारी रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य जोर-शोर से किया गया। लेकिन अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में बस परिचालकों के बिना टिकट यात्राएं कराने के मामले भी सामने आ रहे है। बसों में अंकित नंबरों के जरिए मुख्यालय व स्थानीय डिपो अधिकारियों के पास ऐसी शिकायतेें पहुंच रही है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान रोडवेज की ओर से संचालित धौलपुर डिपो की करीब ६५ बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जयपुर स्थित मुख्यालय की एक कंपनी को दी गई थी।

कैमरों का उद्देश्य रोडवेज बसों में बैठे यात्री रोडवेज प्रबंधन की ‘तीसरी आंख’ की जद में रखने, यात्री बिना टिकट यात्रा करने से रोकने, परिचालकों पर भी प्रबंधन की सीधी नजर रखने, किसी भी रूट की बस में वास्तविक यात्रियों की संख्या का पता करने, बस मार्ग पर निर्धारित स्टॉपेज पर रुक रही हैं या नहीं की जानकारी रखने और एक्सप्रेस बसों के स्टॉपेज नहीं होने पर भी हर जगह रुकने पर भी पाबंदी लगाना था।

अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। बसों के अंदर अधिकारियों के मोबाइल नंबर के जरिए परिचालकों की चोरी पकडऩे की व्यवस्था की गई। हालांकि मुख्यालय व स्थानीय स्तर पर बिना टिकट यात्रा कराने की शिकायातें भी मिल रही है। जिनसकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम है।

फ्लाईंग की जानकारी हो जाती है लीक

अनुबंध समाप्त होने के बाद अब रोडवेज प्रबंधन को भौतिक रूप से मार्गों पर जाकर औचक कार्रवाई का भार आ गया। ऐसे में रोडवेज की फ्लाइंग की जानकारी परिचालकों को ओर से मोबाइल के जरिए मार्ग पर अन्य परिचालकों को दी जाती है, जिससे वह सर्तक हो जाते है। कैमरों से बस स्टैण्ड पर बैठे बैठे ही स्थिति का जायजा लिया जा सकता था और परिचालक की चोरी पकड़ी जा सकती थी।

बसों के अंदर मुख्यालय व डिपो अधिकारियों के नंबर अंकित रहते है, जिन पर शिकायत की जा सकती है। आए दिन यात्रियों को बिना टिकट यात्रा कराने की शिकायतें मिलती रहती है।
पुनीत कुमार द्विवेदी, प्रबंधक यातायात, धौलपुर

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