मेडिसिन ब्लॉक और पार्किग निर्माण के ठेके देने में हो रही है मनमर्जी

चहेती फर्म के लिए नियम ही बदल डाले,निरस्त हुआ टेंडर
अब दोबार लगाया

स्मार्ट सिटी का हाल

By: bhupendra singh

Published: 24 Jun 2020, 08:02 AM IST

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर.संभाग का सबसे बड़ा जवाहर लाल नेहरू अस्पताल (जेएलएन) jlv में पहले ही बजट के अभाव में जरूरी निर्माण बंद है, जैसे-तैसे काम चल रहा है। अब स्मार्ट सिटी के अंतगर्त अस्पताल के लिए 65.41 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके जरिए अस्पताल में मेडिसिन medicin block ब्लॉक,पिडियाट्रिक्स ब्लॉक तथा मॉचर्री ब्लॉक का निर्माण होना है। इनके निर्माण से मरीजों का बेहतर इलाज उपलब्ध होगा सुविधाएं मिल सकेगी। डॉक्टर व नर्सिगं स्टाफ की परेशानी भी दूर होगी। यहां लैब भी बनाई जानी है। इस वर्ष जनवरी माह में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल अफसरों सहित जेएलएन अस्पताल का निरीक्षण करते हुए त्वरित निर्माण के निर्देश भी दे चुके है। लेकिन चिकित्सा मंत्री के जिले में ही करोड़ रुपए का बजट उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल में जरूरी निर्माण स्मार्ट सिटी के अभियंताओं की लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। अभिय्ंाता मनचाही favorite firm ठेका फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमर्जी से नियमों में फेर बदल Change the rules कर रहे हैं जिससे बार-बार टेंडर tender निरस्तcanceled किए जा रहे हैं। इससे काम में देरी तो हो ही रही है। बार-बार टेंडर करने पर धन भी बर्बाद हो रहा है। यह हाल तो तो तब है जब केन्द्र सरकार पहले ही स्मार्ट सिटी के काम की प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए चेतावनी दे चुकी है। स्मार्ट सिटी के नाम पर गिनाने के लिए केवल 4 काम ही नजर आ रहे हैं।

प्राइवेट काम का अनुभव भी शामिल कर लिया
स्मार्ट सिटी के अभियंताओं ने मेडीसिन ब्लॉक का ठेका चहेती फर्म को देने के लिए नियम ताक पर रख दिए। प्राइवेट काम करने का अनुभव रखने वाली फर्मो को भी टेंडर भरने की अनुमति दे दी गई। जबकि सरकारी तथा उपक्रमों के काम करने का ही अनुभव ठेकेदार फर्मो से मांगा जाता था। लेकिन मेडिसिन ब्लॉक के काम के लिए प्राइवेट काम का अनुभव भी मांग लिया गया और चहेती फर्म ने उपलब्ध भी करवा दिया। इसके लिए फर्म ने अपने ही सीए का प्रमाण पत्र भी दे दिया। लेकिन यह टैक्स कटौती से मिलान नहीं कर रहा था इसके बावजूद स्मार्ट सिटी के अभियंताओं ने ठेके की तकनीकी व फाइनेंसिशयल बिड खोल र्ली। ठेके के दौरान अर्नेस्ट मनी का 2 प्रतिशत लिया जाना था लेकिन आधा प्रतिशत अर्नेस्ट मनी ही ली गई।

इन्होंने भरे थे टेंडर
अस्पताल में मेडिसिन ब्लॉक निर्माण के लिए एम/एस संकल्प रियलमार्ट प्राइवेट लिमिटेड,एम/एस रमेश कुमार बंसल तथा एम/एस हरि नारायण खंडेलवाल ने टेंडर दाखिल किया था। एम/एस संकल्प रियलमार्ट प्राइवेट लिमिटेड को एल-1 पाया गया। इन्होनें -5.84 (बिलो) रेट दाखिल किया। अभियंाताओं ने इसके नाम पर अप्रूवल भी दे दी थी। अस्पताल में मेडिसिन ब्लॉक पर 36.93 करोड़,पिडियाट्रिक्स ब्लॉक पर 21.41 करोड़ रूपए,मल्टी लेवल पार्र्किंग ब्लॉक पर 5.42 करोड़ तथा मोर्चरी ब्लॉक पर 1.65 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। पहले मेडिसिन ब्लॉक व पार्किग का कार्य एक साथ ही था लेकिन बाद में इसके दो टुकड़े कर दिए गए।

इसलिए निरस्त हुआ टेंडर

मेडिसिन ब्लॉक निर्माण के लिए फर्म विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए मनमर्जी के नियम बनाने और ठेका देने की शिकायत स्मार्ट सिटी एसीईओ तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होनें इसका टेंडर निरस्त कर दिया। अब फर्मो से प्राइवेट काम के बजाय सरकारी निर्माण कार्य का अनुभव का रखने की शर्त के साथ नए सिरे से इनके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए है।
अजमेर में अपनाए जा रहे मनमाने नियम

जयपुर व उदयपुर स्मार्ट सिटी में प्राइवेट काम करने वालों को टेंडर नहीं दिए जा रहे हैं। जबकि स्मार्ट सिटी अजमेर में जेएलएन अस्पताल में होने वाले कार्य, सीवरेज डालने के कार्य,शहर में विभिन्न पार्को के निर्माण,हरिभाऊ उपाध्याय नगर में बनाए जाने वाले गांधी स्मारक के टेंडर भी प्राइवेट निर्माण का अनुभव रखने वालों को देने के लिए नियम जोड़ दिया गया था।
इनका कहना है

लैंड का इश्यू था। प्रशासनिक कारणों से टेंडर निरस्त किया है। अब मेडिसिन ब्लॉक व पार्किग एक साथ बनेगी। प्राइवेट का भी व्यू रखा गया था लेकिन अब इसे हटा दिया गया है।
अनिल विजयवर्गीय,मुख्य अभियंता स्मार्ट सिटी,अजमेर

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bhupendra singh Reporting
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