Chhath pujan: दिखेगी पूर्वांचल की संस्कृति, यूं देंगे अस्त होते सूरज को अघ्र्य

कोरोना संक्रमण के चलते शहर में सामूहिक छठ पूजन कार्यक्रम नहीं होंगे। महिलाएं अस्त होते सूरज को अघ्र्य देंगी।

By: raktim tiwari

Published: 20 Nov 2020, 10:37 AM IST

अजमेर. छठ पर्व के तहत शुक्रवार को महिलाएं अस्त होते सूरज को अघ्र्य देंगी। महिलाएं पारम्परिक पूजन और लोक गीत गाकर घर-परिवार में खुशहाली की कामना करेंगी। कोरोना संक्रमण के चलते शहर में सामूहिक छठ पूजन कार्यक्रम नहीं होंगे।

शुक्रवार शाम को महिलाओं डूबते सूरज को विधि-विधान से अघ्र्य देंगी। इस दौरान बिहार-झारखंड और अन्य प्रांतों की महिलाएं मौजूद रहेंगी। इससे पहले गुरुवार को पंचमी तिथि पर खरना पर्व मनाया गया।

यूं करेंगी डाला छठ पूजन
महिलाएं शनिवार सुबह पानी में खड़े होकर अघ्र्य देंगी। इस दौरान सूर्य देवता की स्तुति की जाएगी। श्रीफल, केले-सेब, गन्ना, अगरबत्ती, फूल और मिष्ठान से पारम्परिक पूजा-अर्चना होगी। पूर्वांचल के लोकगीत भी गूंजेंगे। कोरोना संक्रमण के चलते आतिशबाजी, सामूहिक छठ पूजन कार्यक्रम नहीं होंगे। छठ पूजन के तहत 36 घंटे का निर्जला व्रत भी शुक्रवार से प्रारंभ होगा। बिहार-झारखंड और अन्य प्रांतों की महिलाएं यह व्रत रखेंगी।

यूं तैयार होते एडवोकेट, ना कंप्यूटर ना इंग्लिश स्पोकन लैब

रक्तिम तिवारी/ अजमेर. देश और राज्य को प्रतिवर्ष हजारों वकील देने वाले लॉ कॉलेज संसाधनों में पीछे हैं। इन कॉलेज में ना विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर ना इंग्लिश स्पोकन लैब है। पढ़ाई का दायरा 'किताबोंÓ तक सिमटा है। जबकि हाईटेक दौर में हिंदी के अलावा अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर ज्ञान आवश्यक है।

वर्ष 2005-06 में प्रदेश में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। इनमें अजमेर का कॉलेज भी शामिल है। अधिकांश कॉलेज में तीन वर्षीय एलएलबी के अलावा दो वर्षीय एलएलएम सहित डिप्लोमा इन लेबर लॉ और डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी पाठ्यक्रम संचालित हैं। भवनों में केवल लाइब्रेरीराज्य के लॉ कॉलेज के भवन 2012-13 में बने थे। इनमें सिर्फ लाइब्रेरी सुविधा है। विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लेब, खेलकूद जैसे संसाधन नहीं है। जबकि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार कंप्यूटर लेब, अंग्रेजी, हिंदी भाषा शिक्षण और अन्य सुविधाएं जरूरी हैं।

यूं जरूरी है अंग्रेजी सीखना
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ऑनलाइन सुनवाई शुरू हो चुकी है। याचिकाएं और फैसले अंग्रेजी में लिखे-पढ़े जाते हैं। इन्हें ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। अदालत में जज और कई नामचीन वकील अंग्रेजी में संवाद करते हैं। याचिकाओं पर बहस भी अंग्रेजी भाषा में होतीहै। भावी वकीलों को कंप्यूटर ज्ञान के अलावा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसलों को पढऩे, अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर के न्यायिक मुद्दों को समझने के लिहाज से अंग्रेजी शिक्षण जरूरी होता है।

raktim tiwari Reporting
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