scriptColleges give training after studies, so that companies can get good | कॉलेज पढ़ाई के बाद देते हैं प्रशिक्षण, जिससे कम्पनियों में मिल सके अच्छी नौकरी | Patrika News

कॉलेज पढ़ाई के बाद देते हैं प्रशिक्षण, जिससे कम्पनियों में मिल सके अच्छी नौकरी

 

 

शुरू किया स्टार्ट-अप - पेट्रोल बाइक को बना रहे इलेक्ट्रिक , अब तक करीब 800 लोगों को दे चुके हैं प्रशिक्षण , सालाना ८ लाख रुपए की आय

कहते हैं असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। यही अनुभव सीखने वाले सरमथुरा निवासी एक युवक ने असफलता के सफलता की सीढ़ी चढऩा शुरू कर दिया।

अजमेर

Updated: February 21, 2022 02:02:07 am

सरमथुरा. कहते हैं असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। यही अनुभव सीखने वाले सरमथुरा निवासी एक युवक ने असफलता के सफलता की सीढ़ी चढऩा शुरू कर दिया। स्थानीय निवासी विनय गोयल को एक सीख ने आज एन्टरप्रेन्योर बना दिया है। आज वे सैकड़ों युवक-युवतियों को प्रशिक्षण तो ही दे ही रहे हैं, साथ ही लाखों रुपए का रेवन्यू भी जनरेट कर रहे हैं। गायेल ने हाल ही एक ‘युविक ऑटोमोबाइल’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया है। जिसके में वो बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में अपना योगदान देने के साथ युवक-युवतियों को प्रशिक्षण और नौकरी दिलवा रहे हैं। सालाना आय करीब 8.10 लाख रुपए है। विनय बताते है कि उनकी कंपनी ने पूरे भारत में 25 विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया है। साथ ही 200 से अधिक कॉलेज में वेबिनार कर चुके है। उनका मुख्य उद्देश्य गरीब वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा देना है। जिसमें वह आसपास रोजगार पा सके। उनकी कंपनी 15 गरीब छात्रों को 5 अलग-अलग देशों में इंटर्नशिप दिला चुकी है। नई-नई टेक्नोलॉजी के साथ आईसी इंजन को इलेक्ट्रिक में बदल देते है।
कॉलेज पढ़ाई के बाद देते हैं प्रशिक्षण, जिससे कम्पनियों में मिल सके अच्छी नौकरी
कॉलेज पढ़ाई के बाद देते हैं प्रशिक्षण, जिससे कम्पनियों में मिल सके अच्छी नौकरी
ऐसे शुरू हुआ सफर
विनय ने बताया कि जब उन्होंने अपनी ग्रेजुेएशन खत्म की और जॉब के लिए इंटरव्यू देने गए तो देखा कि वहां उनके जैसे सेकड़ों अभ्यर्थी आए हुए हैं। लेकिन उन्होंने सिर्फ चयन किया 2 लोगों का। ऐसा नहीं था कि बाकी डिसर्ब नहीं करते थे, लेकिन हमारा चयन नहीं हो पाने में सबसे बड़ा रोल था प्रायोगिक ज्ञान का। बच्चा पढ़ तो लेता था, लेकिन उसको नियमित जीवन में इस्तेमाल नहीं कर पाता था और यहीं वो मात खा जाता है। अगर दूसरे देश से तुलना करें तो उनको प्रेक्टिकल फॉर्म में ही सब सिखाया जाता है। इसलिए वहां रोजगार ज्यादा है। उन्होंने कोशिश करने के बाद कहीं अच्छी जगह जॉब की, वहां जाकर पे्रक्टिकल स्किल सीखी। लेकिन, मेरे अंदर हमेशा से यही चल रहा था कि पे्रक्टिकल ज्ञान से लोग अच्छी जॉब ले सकते है और इसको मैं अपना रोजगार भी बना सकता हूं और इससे और लोगों की मदद भी कर सकता हंू। यही सोच कर जॉब छोड़ विजन को पूरा करने जयपुर वापस आ गया। मैंने सबसे पहले अपनी टीम तैयार की, जो मेरी तरह ही सोचती है और समझती है।
आपदा को बनाया अवसर
स्टार्टअप करते समय कोविड बीच में आ गया, 6 महीने इंतजार किया, लेकिन फिर सोचा क्यूं ना इस आपदा को ही अवसर बनाया जाए। क्यूंकि इस समय कॉलेज ऑनलाइन चालू थे, इसका मतलब प्रायोगिक ज्ञान जीरो और हमने उन्हीं लोगों को प्रायोगिक स्किल देना स्टार्ट किया। उन लोगों को सिखाया कि कैसे इंटरव्यू देना है, कैसे खुद को जॉब के लिए रेडी करना है। आज हम इस मुकाम पर पहुंच गए है कि 800 अलग-अलग राज्य के बच्चे हमारे यहां ऑनलाइन-ऑफ लाइन ट्रेनिंग कर चुके हैं। 75 से अधिक विदेश से बच्चे, जिनमें से अधिकर बच्चे कहीं ना कहीं अब जॉब कर रहे हैं। कई सारे जरूरतमंद युवक-युवती को हमने अपनी तरफ से रोजगार लगवाना स्टार्ट किया। कोविड के समय पर काफी जरूरतमंद लोगों को यहां फ्री में प्रशिक्षण दिया गया है। इस तरह हमने 20 से अधिक बच्चों को सीधे जॉब लगवाई। हमारे साथ पूरे देश से लगभग 25 से अधिक कॉलेज ट्रेनिंग पार्टनर बन चुके हैं। जिनके साथ हमने एओयूू साइन किया हुआ है। साथ ही हमने 200 से अधिक कॉलेज में वेबिनार प्रायोजित करवाया है। साथ में 5 से अधिक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से चल रहा है। हमारे यहां स्टूडेंट्स खुद का नया बिजनेस स्टार्ट करने की भी ट्रेनिंग लेते हैं कि कैसे वो अपना खुद का बिजनेस स्टार्ट कर सकते हैं। हम प्रदूषण को कम करने के लिए और इलेक्ट्रिक को बढ़ावा देने के लिए रेट्रॉ फिटिंग भी बच्चों को सिखाते हैं। जिसमें इंजन बाइक को बैटरी से चलाया जाता है। यह हमारा जयपुर प्रताप नगर में सेंटर हैं। इस को जनवरी 2021 में स्टार्ट किया गया है।

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