मिलीभगत : निजी स्कूल प्रबंधन की गड़बड़ी से माशिबो की साख पर उठ रहे कईं सवाल !

सैकंडरी परीक्षा में एक ही छात्र के 2 रोल नंबर व 2 रिजल्ट का मामला,मिलीभगत प्राइवेट स्कूलों की, बोर्ड के कामकाज पर असर

 

By: suresh bharti

Published: 31 Jul 2021, 11:01 PM IST

Ajmer अजमेर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा हाल ही जारी दसवीं कक्षा के परिणाम में एक ही विद्यार्थी के दो नामांक जारी होना प्राइवेट स्कूल प्रबंधन की परीक्षार्थियों के अभिभावकों से मिलीभगत का नतीजा बताई जा रही है। परीक्षा कार्यों से जुड़े शिक्षा विभाग के जानकार लोगों का कहना है कि ऐसा तभी संभव है जब अलग-अलग निजी स्कूलों द्वारा एक ही छात्र का स्वयं की स्कूल आईडी से प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर एनरोलमेंट कर दिया गया हो।

मालूम हो कि जोधपुर के दो निजी स्कूलों में चांदपोल निवासी कबीर शर्मा का एनरोलमेंट होने से उसके दो अलग-अलग नामांक आवंटित हो गए। जिनके आधार पर शुक्रवार को घोषित परीक्षा परिणाम में उसके रिजल्ट भी 2 जारी कर दिए गए। यह मामला राजस्थान पत्रिका ने 31 जुलाई के अंक में प्रकाशित किया था।

पहले एक्सेंट स्कूल में था छात्र

जोधपुर के चांदपोल निवासी कबीर शर्मा पुत्र रवींद्र नारायण-अंजनि शर्मा पूर्व में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित एक्सेंट सीनियर सैंकेंडरी स्कूल का छात्र था। जिसे बाद में जोधपुर की ही चांदना भाकर देवीरोड स्थित आर्यन सैकेंडरी स्कूल में एडमिशन दिलाया गया। जहां से इस साल वह कक्षा-10 में प्रविष्ट हुआ। उधर, इस साल दोनों ही स्कूलों के एनरोलमेंट के आधार पर उसके दो नामांक जारी होने के बाद परीक्षा परिणाम भी दो जारी कर दिए गए।

टीसी काटी नहीं, बगैर टीसी प्रवेश !

स्कूलों में बोर्ड परीक्षा फॉर्म व प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसा तभी संभव है जब किसी छात्र की पूर्व के स्कूल से टीसी नहीं काटी गई हो और अगले स्कूल ने उसे बगैर टीसी ही प्रवेश दे दिया हो। शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शाला-दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन टीसी काटी जाकर उसी के आधार पर ही किसी अन्य स्कूल में छात्र को आगे एडमिशन दिया जाता है। जबकि निजी स्कूलों के लिए यही प्रक्रिया प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर करनी होती है। लेकिन मौजूदा मामले में छात्र के अभिभावक व स्कूल प्रबंधन की ओर से ऐसा नही किया गया।

. . .तो फॉर्म ही नहीं भरा जाता

जानकारों के मुताबिक यदि कबीर की टीसी पिछले एक्सेंट स्कूल ने काटी होती तो छात्र का डेटा कहीं पर भी शो नहीं होने से उसका पिछले स्कूल से फॉर्म ही नहीं भरा जाता। लेकिन वहां टीसी नहीं कटने से उसका डेटा पिछले स्कूल में भी बोलता रहा। उधर, आयर्न स्कूल में भी तत्समय बगैर टीसी लिए छात्र को एडमिशन देने की अनियमितता कर उसका डेटा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया।

नतीजतन एक ही छात्र पोर्टल पर दो जगह बोलने लगा। बोर्ड परीक्षाओं में रोल नंबर अलॉट करने के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का पोर्टल स्वत: ही विद्यार्थियों का डेटा ‘पिक’ कर लेता है, जिससे मौजूदा मामले में दोनों निजी स्कूलों के स्तर पर बरती गयी लापरवाही से बोर्ड के स्तर पर एक ही छात्र को दो रोल नंबर आवंटित कर अलग-अलग रिजल्ट जारी कर दिया गया। एक्सेंट स्कूल के रोल नंबर 766953 पर उसे 600 में से 468 व आर्यन स्कूल के रोल नंबर 762288 पर 467 प्राप्तांक मिले।

जवाब मांगते सवाल. . .

-इस बार होमवर्क के आधार पर 10वीं कक्षा की मार्र्किंग होनी थी, तो क्या छात्र ने दोनों स्कूलों में होमवर्क सबमिट किया?

-जिस स्कूल में बच्चा अध्ययनरत ही नहीं उसने छात्र का 30 नंबर का इंटरनल एसेसमेंट किस आधार पर किया?
-दोनों अंकतालिकाओं में भी एक समान माक्र्स (केवल एक स्कूल में एक विषय को छोडक़र)

कैसे संभव हैं?

-जिस स्कूल का छात्र नहीं, उसने बोर्ड परीक्षा का फॉर्म कैसे भर दिया?

गौरतलब यह भी. . .

मामले में चौंकाने वाली हकीकत यह भी कि विवादित छात्र के मौजूदा चांदना भाकर देवीरोड स्थित आर्यन सैकेंडरी स्कूल का आनलाइन कामकाज भी चौपासनी रोड स्थित एक्सेंट सीनियर सैकंडरी स्कूल का ही कर्मचारी करता है। इसके अलावा इसी छात्र को गत कुछ साल पूर्व कम उम्र बताकर सबजूनियर वर्ग में राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में खिलाने का विवाद भी चौड़े आ चुका है।

suresh bharti Desk
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