गरीब नवाज की मजार पर चढ़ता है ये गुलाब, अब यूं बनेगी इसकी उपयोगी खाद

टेम्पल वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के तहत दरगाह के पास एक नई मशीन लगाई जा रही है।

By: raktim tiwari

Published: 07 Jun 2018, 10:50 AM IST

अजमेर/नई दिल्ली।

दरगाह में चढऩे वाले गुलाब के फूलों से अब जैविक खाद बनेगी। क्षेत्र के किसानों के यह खाद कम कीमत पर उपलब्ध होगी, ताकि रासानिक उर्वरकों का प्रयोग कम हो। खाद बनाने का कार्य रमजान के बाद शुरू होगा। राजस्थान सरकार और आर्ट ऑफ लिविंग की कोशिशों से यह कार्य अंजाम तक पहुंचेगा। टेम्पल वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के तहत दरगाह के पास एक नई मशीन लगाई जा रही है। यह मशीन दरगाह से निकलने वाले फूलों और कचरे का निस्तारण करेगी।

आर्ट ऑफ लिविंग के रूरल डिपार्टमेंट के सदस्य दीपक शर्मा ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह से प्रतिदिन 2 टन फूल निकलते है। इसमें खासतौर से गुलाब के फूल होते हैं। अभी फिलहाल इन फूलों को जमीन के नीचे दबा दिया जाता है। इसके खाद बनने में 6 महीने का समय लग जाता है। इससे खाद तो बन जाती है, लेकिन भूजल प्रदूषित होता है। लेकिन नई तकनीक से जमीन में फूलों को दबाने की बजाय मशीन से खाद में तब्दील किया जाएगा।

कम समय में बनेगी खाद अजमेर के मौसम में शुष्कता ज्यादा है ऐसे में एक खास बायो इंजाइम की मदद से महज तीन दिनों में गुलाब की पंखुडिय़ों को खाद में तब्दील कर लिया जाएगा।

30 किलो तक खाद

गुलाब में पानी की मात्रा काफी होती है। मशीन निर्माताओं को इस बात की उम्मीद है कि दो टन गुलाब की पंखुडिय़़ों से लगभग 30 किलो तक खाद बन पाएगा। आमतौर बाजार में कम्पोस्ट खाद की कीमत 18 से 20 रुपए प्रति किलो होती है। लेकिन यहां के किसानों के लिए मात्र 6 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाएगा।

पुष्कर से आता है गुलाब

ख्वाजा साहब के मजार शरीफ पर चढऩे वाला 90 प्रतिशत से ज्यादा गुलाब पुष्कर सहित इसके निकटवर्ती गनाहेड़ा, बांसेली और अन्य गांवों में पनपता है। यह गुलाब अपनी खुश्बू और सुंदरता के लिए दुनिया भर में मशहूर है। मुगलकाल में बादशाह जहांगीर की बीवी बेगम नूरजहां ने इसी गुलाब से गुलाब का इत्र ईजाद किया था।

raktim tiwari Reporting
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