Ajmer News : दरगाह में चढऩे वाले गुलाब के फूलों से बन सकती है खाद

ajmer news : विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में मजार पर चढऩे वाले गुलाब के फूलों का बेहतर उपयोग हो सकता है। केंद्र सरकार के अधीन दरगाह कमेटी गुलाब के फूलों का उपयोग कर नया उद्योग शुरू कर सकती है। इससे जैविक खाद, अगरबत्ती, गुलाबजल व इत्र आदि बनाए जा सकते हैं।

By: Yuglesh kumar Sharma

Published: 17 Jun 2020, 01:51 AM IST

युगलेश शर्मा.

अजमेर. विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह (dargah) में मजार पर चढऩे वाले गुलाब के फूलों का बेहतर उपयोग हो सकता है। केंद्र सरकार के अधीन दरगाह कमेटी गुलाब के फूलों का उपयोग कर नया उद्योग शुरू कर सकती है। इससे जैविक खाद, अगरबत्ती, गुलाबजल व इत्र आदि बनाए जा सकते हैं। यह न केवल पर्यावरण और स्वच्छता के लिए एक मिसाल होगी बल्कि कइयों को रोजगार भी मिल सकेगा। खास बात यह है कि कमेटी को इसके लिए नया खर्चा नहीं करना पड़ेगा। पूर्व में इन्हीं योजनाओं के लिए लाखों रुपए की मशीनें खरीदी जा चुकी है, जिनका फिलहाल कोई उपयोग नहीं हो रहा।

रासायनिक खाद से मिलेगी मुक्ति

दरगाह में रोजाना करीब 1 टन गुलाब के फूल चढ़ाए जाते हैं। ये गुलाब तीर्थनगरी पुष्कर से आते हैं। इनसे खाद बनाने के लिए दो साल पहले दरगाह कमेटी ने करीब 21 लाख रुपए की मशीन खरीदी। इसमें 1 टन फूलों से करीब 15 किलो खाद बन सकती है। इससे न केवल पर्यावरण एवं स्वच्छता के लिए एक मिसाल कायम होगी बल्कि कम्पोस्ट का उपयोग पौधों के लिए करने से रासायनिक खाद से भी मुक्ति मिलेगी।

यह योजनाएं भी ठंडे बस्ते में
दरगाह कमेटी ने मजार पर चढ़ाए जाने वाले गुलाब के फूलों से अगरबत्ती, गुलाबजल और इत्र बनाए जाने की भी योजना बनाई थी। इसके लिए करीब 12 साल पहले मशीनें भी खरीदी गई। यहां तक की कई महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी दिया गया लेकिन बाद में योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

विरोध के कारण किया बंद

उक्त योजनाओं को लेकर दरगाह के कुछ खादिमों ने विरोध कर दिया था। हालांकि दो साल पहले फूलों से खाद बनाने के प्लांट का उद्घाटन हुआ। तब खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे लेकिन कुछेक खादिमों के विरोध के चलते यह कार्य भी बंद कर दिया गया।


समझाइश से निकल सकता है हल

दरगाह कमेटी अगर पहल कर विरोध करने वाले खादिमों से बात करे, समझाइश करे तो रास्ता निकल सकता है। पूर्व में खाद शब्द पर एतराज होने के बाद दरगाह कमेटी ने इसे बरकती पत्तियां नाम दिया और कायड़ विश्राम स्थली में फूलों का बाग तैयार कर उसमें ही खाद काम में लेने का निर्णय किया गया। इस बाग में उगने वाले फूल ही मजार पर सेज-ए-गुल के रूप में पेश किए जाने का निर्णय भी किया गया। लेकिन यह कार्य भी आज तक शुरू नहीं हुआ है।

इनका कहना है

खादिमों और अंजुमन को विश्वास में लेकर ही मजार शरीफ पर चढ़ाए जाने वाले फूलों से अगरतबत्ती, बरकती पत्तियां आदि बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि फूलों का बेहतर सदुपयोग हो और आस्था को किसी तरह की ठेस नहीं पहुंचे।

-अमीन पठान, अध्यक्ष दरगाह कमेटी

गुलाब के फूलों का बेहतर उपयोग हो लेकिन यह ध्यान में रखा जाए कि किसी तरह से आस्था को ठेस नहीं पहुंचे। बाकी हमारा कोई एतराज नहीं है।

-मोइन हुसैन चिश्ती, सदर अंजुमन

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Yuglesh kumar Sharma Reporting
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