CONGRESS: चुनाव से पहले ही भारी पड़ी अंदरूनी कलह और गुटबाजी

सिंबल देने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी करने से कतराती रही। टिकट और सिंबल को लेकर पर्यवेक्षक से लेकर स्थानीय नेतृत्व पल्ला झाडऩे में लगे हैं।

By: raktim tiwari

Published: 17 Jan 2021, 09:18 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कांग्रेस में परस्पर गुटबाजी, अंदरूनी फूट और एकदूसरे की खिलाफत का नतीजा प्रत्याशी चयन में सामने आ गया। सिंबल देने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी करने से कतराती रही। टिकट और सिंबल को लेकर पर्यवेक्षक से लेकर स्थानीय नेतृत्व पल्ला झाडऩे में लगे हैं।

नगर निगम के 80 वार्ड पार्षदों का चुनाव होना है। जहां नामांकन में पार्टी सिम्बल के बगैर विभिन्न वार्डों से प्रत्याशी नामांकन करने पहुंच गए थे। जिला प्रशासन को सिंबल देने के बावजूद देर रात कांग्रेस की अधिकृत सूची जारी नहीं हो सकी थी। जिन दिग्गजों और युवाओं के टिकट कटे उनकी नाराजगी को भांपते हुए कांग्रेस पदाधिकारी और स्थानीय नेता रटे-रटाए जवाब देने में जुटे हैं। हालात यह हैं कि अब कांग्रेस 80 के मुकाबले महज 74 वार्ड में चुनाव लड़ रही है।

कहां क्या स्थिति
दरगाह इलाके में 11,12 और 13 वार्ड में सिंबल नहीं दिया। वार्ड 29 में नामांकन नहीं भरने से भाजपा का खाता खुल गया। वार्ड 7 में तारा यादव और वार्ड 77 में भारती भंडारी का नामांकन खारिज हो गया। वार्ड 7 में भाजपा और रालोपा मेंं सीधी टक्कर है।। वहीं वार्ड 77 में भाजपा प्रत्याशी के सामने तीन निर्दलीय हैं।

गुटबाजी को रखा बुलंद
प्रदेश उपाध्यक्ष और कांग्रेस के पर्यवेक्षक हरिमोहन शर्मा और जिला प्रभारी हाकम अली खान ने टिकट वितरण से पहले पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, उत्तर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता, पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन और कांग्रेस नेता हेमंत भाटी और डॉ. राजकुमार जयपाल से चर्चा की थी। आमराय बनाकर पैनल बनाए जाने थे। लेकिन स्थानीय नेताओं ने गुटबाजी का 'झंडाÓ बुलंद रखा।

सिर्फ सिफारिश पर प्रत्याशी चयन!
नाम नहीं छापने की शर्त पर प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष स्तर के नेता बताया कि स्थानीय नेताओं ने पैनल में ज्यादा से ज्यादा सिफारिशी नाम ज्यादा दिए। उनके सुझाए गए वार्डवार प्रत्याशियों की हार-जीत का कोई होमवर्क शामिल नहीं था। कांग्रेस के नगर निगम चुनाव पर्यवेक्षक शारदाकांत शर्मा और सगीर अहमद को तो गुरुवार देर रात तक पैनल नहीं सौंपे गए थे। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की दखल के बाद उन्हें पैनल मिल पाए।

कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व का फैसला अंतिम होता है। स्थानीय नेताओं ने जैसे पैनल दिए उसके अनुसार टिकट वितरण हुआ है। कार्यकताओं को किसी व्यक्ति अथवा गुट के बजाय पार्टी के प्रति वफादारी रखनी चाहिए। कांग्रेस एकजुट है और हमेशा रहेगी।
हरिमोहन शर्मा, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और पर्यवेक्षक

कांग्रेस की रीति-नीति से कोई कार्यकर्ता अलग नहीं है। संगठन ने जिन्हें भी चुनाव में प्रत्याशी बनाया है, उनके लिए हम काम करेंगे। चुनाव में व्यक्तिगत नाराजगी हो सकती है, लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता सदैव समर्पित रहा है। जिनको टिकट नहीं मिले उनके सम्मान के लिए नेतृत्व से गुजारिश करेंगे।
हेमंत भाटी, कांग्रेस नेता
टिकट सदैव आमराय और शीर्ष स्तर से तय होते रहे हैं। कांग्रेस ने जिसको भी प्रत्याशी बनाया है, उसके लिए कार्यकर्ता कामकाज करेंगे।
विजय जैन, पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष

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