बोले कांग्रेस नेता-कलक्टर साहब भाजपा के मंत्री घूम रहे सरकारी बस में, लगाइए इन पर बैन

dilip sharma

Publish: Jan, 13 2018 08:01:35 (IST)

Ajmer, Rajasthan, India
बोले कांग्रेस नेता-कलक्टर साहब भाजपा के मंत्री घूम रहे सरकारी बस में, लगाइए इन पर बैन

चार संहिता का पालन करने के लिए बाध्य करें । यदि ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध दिल्ली तक पहुंचाएगी।

अजमेर।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भाजपा के मंत्रियों पर सरकारी संसाधनों का उपयोग कर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

खाचरियावास ने कांग्रेस के मुख्य चुनाव कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अजमेर लोकसभा क्षेत्र में सरकार के मंत्री कालीचरण सर्राफ , राजेन्द्र राठौड़, अजय सिंह किलक, केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी, उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल व युनूस खान सरकार के संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

खाचरियावास ने बताया कि पटेल मैदान में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में हुई सभा में सरकारी बस उपलब्ध कराई गई। उन्होंने मंत्रियों पर सरकारी लवाजमे के साथ चुनाव प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की है कि सरकार का कोई भी मंत्री अजमेर लोकसभा क्षेत्र में आता है तो उसकी निगरानी के लिए पर्यवेक्षक लगाया जाए।

खाचरियावास ने केन्द्रीय मंत्री के किशनगढ़ जयपुर हाइवे को आठ लेन करने के ऐलान, युनूस खान के परबतसर के पास सड़क निर्माण की स्वीकृति को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि आचार संहिता का पालन करने के लिए बाध्य करें, यदि ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध दिल्ली तक पहुंचाएगी। खाचरियावास ने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर ज्ञापन जिला निर्वाचन अधिकारी व कलक्टर गौरव गोयल को सौंपा गया।

आचार संहिता की पालना जरूरी
चुनाव आयोग के अनुसार आचार संहिता की पालना जरूरी है। सरकार का कोई मंत्री या बोर्ड, निगम, का अध्यक्ष सरकारी कार का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद सियासी पार्टियां इसको तवज्जो नहीं देती। भाजपा और कांग्रेस सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए निजी और सरकारी वाहनों का इस्तेमाल करती रही हैं।

सरकार में पक्ष और विपक्ष में बैठने की दोनों एकदूसरे के खिलाफ आरोप लगाते हैं। जबकि चुनाव आयोग ने ऐसी शिकायतों पर प्रत्याशियों को नोटिस, गंभीर मामलों में नाम निरस्त करने, पुलिस में एफआईआर जैसे प्रावधान लागू किए हैं।

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