कोराना इफेक्ट : निजी स्कूलों का खाली पिटारा, शिक्षक बना 'बेचारा Ó

कोरोना के चलते विद्यालय बंद होने का प्रभाव, अजमेर व चूरू जिले के करीब ३५ हजार शिक्षक बेरोजगार,स्कूल संचालक बोले-फीस नहीं आई तो कहां से देंगे वेतन,शिक्षकों की चाहत-कुछ कटौती करके ही दे दो तनख्वाह

By: suresh bharti

Updated: 07 Sep 2020, 12:30 AM IST

अजमेर/चूरू. कोरोना के चलते प्रदेश के सरकारी व निजी विद्यालय बंद हैं। सरकारी शिक्षकों को तो वेतन मिल रहा है, लेकिन निजी स्कूलों के शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। पहले ही स्कूलों से कम वेतन मिलता था। अब तो बीते पांच माह से एक पैसा भी नहीं मिला। ऐसे शिक्षकों के सामने रोजीरोटी का संकट पैदा हो गया है। कर्जा लेकर कब तक घर का खर्चा चलाएं।

उधर, स्कूल संचालकों का तर्क है कि जब अभिभावक ही फीस जमा नहीं करा रहे हैं तो शिक्षकों को वेतन कहां से दें। अभिभावक कहते हैं कि जब बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे हैं तो फीस क्यों जमा कराएं। मतलब कोरोना से सबको आर्थिक तंगी से रूबरू करा दिया।

शिक्षकों के सामने और कोई विकल्प नहीं

कई शिक्षक तो मनरेगा में काम कर रहे हैं। कोई मेट बन गया तो कुछ मजदूरी करने को बाध्य हैं। निजी स्कूलों के कई शिक्षक सब्जी बेचने लगे हैं तो कुछ चाय का ठेला लगा बैठे। कोविड-19 को लेकर बंद निजी स्कूलों के शिक्षक सड़क पर आ गए हैं। शिक्षकों के सामने और कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में निजी शिक्षक ठाले बैंठे हैं। हालात इस कदर है कि कई शिक्षक स्कूल से रिलीव होने के बाद मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं। वहीं कई शिक्षक रोजगार के लिए भटक रहे हैं।

कार्य मुक्त कर किया रिलीव

अजमेर व चूरू जिले में करीब 1500 निजी स्कूलें संचालित हंै। यहां करीब 35 हजार शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। मार्च माह में लॉकडाउन लागू होने के बाद निजी स्कूलो में विद्यार्थियो का शिक्षण कार्य पूर्णत: बंद कर दिया गया था। छह माह के बाद बावजूद भी शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसी स्थित में दोनों जिले में निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षण कार्य सुचारू करने के लिए अस्थाई तौर पर रखे शिक्षक-शिक्षिकाओं को कार्य मुक्त कर रिलीव कर दिया है। ऐसे में अब उन शिक्षकों के लिए पहली बार बेरोजगारी वाला शिक्षक दिवस आया है।

निजी संचालकों ने नहीं रखा ख्याल

लॉकडाउन अवधि के बाद 6 माह बीत गए हैं। चूरू जिले में करीब 15 हजार शिक्षक बेरोजगार हैं। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों का दायित्व बनता था कि आंशिक राहत देते हुऐ वेतन शुरू रखना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक दर्जन

स्कूलो में मिली राहत

जिले की कुछ निजी स्कूलो में 50 प्रतिशत शिक्षको का राहत मिली है, जहां उन्हे 50 प्रतिशत वेतन मिल रहा है। इन शिक्षकों से संचालन ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से शिक्षण कार्य करवा रहे हंै। साथ ही शहर की एक स्कूल संचालक ने निजी शिक्षकों को घर-घर भेजकर विद्यार्थियो की स्थिति जानने का प्रयास किया है।

गुरु बन गए नरेगा श्रमिक

पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि निजी स्कूलों से रिलीव होने के बाद कई शिक्षकों ने मनरेगा में नाम लिखवा कर घर का पालन-पोषण शुरू किया। अब मनरेगा से मिलने वाले 2 हजार रुपए से काम चला रहे हैं तो कई शिक्षक मजदूरी करने को मजबूर हैं। एक निजी स्कूल के शिक्षक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल से रिलीव कर दिया, अब मनरेगा में मजदूरी कर रहा हूं।

इनका कहना है

हमारे स्टाफ को वेतन कहां से दें। जब राज्य सरकार आरटीई का बकाया भुगतान ही हमें नहीं कर रही है। हमारे बिजली के बिल जमा कराने तक मुश्किल हो रही है।

मास्टर दाऊद काजी, अध्यक्ष निजी शिक्षण संस्था संघ, सुजानगढ़

जब अभिभावक हमें फ ीस व राज्य सरकार हमारी बकाया राशि नहीं चुका रही है। ऐसे में आर्थिक संकट बहुत बड़ा है। ऐसे में स्टाफ को वेतन देना कठिन है। फि र भी कुछ संस्थाएं आंशिक वेतन दे रही है।
मनोज मित्तल, सदस्य प्रदेश कमेटी, स्कूल शिक्षा परिवार।

हमारी ग्राम पंचायत में कई ऐसे बेरोजगार युवक लॉकडाउन में मनरेगा में कार्य कर रहे हैं जो पहले निजी स्कूलों में पढ़ाते थे। रोजगार में किसी तरह की शर्म नहीं करनी चाहिए। स्वाभिमान के साथ जीना सीखना होगा।

भंवरलाल मेघवाल, एडीपी, ग्राम पंचायत, गुलेरिया। निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन न

मिलने से घर परिवार की आर्थिक दशा ठीक नहीं है। इसको लेकर हमने 2-3 बार मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन देकर पैकेज की मांग भी की, लेकिन राज्य सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

राजूसिंह भाटी, शिक्षक निजी स्कूल, सुजानगढ़।

मेरे जैसे अन्य शिक्षक 5-6 माह से बेरोजगार है, स्कूलें बंद है। घर का कैसे गुजारा करें। राज्य सरकार को सोचना चाहिए। आहत को राहत पहुंचाना सरकार का काम है। केन्द्र व राज्य सरकार ने कोरोना पीडि़तों के लिए कई पैकेज घोषित किए,लेकिन निजी शिक्षकों की अनदेकी की गई।

महावीरप्रसाद, शिक्षक निजी स्कूल, सुजानगढ़।

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