#corona Worship: घर ही बने मंदिर और चर्च, यहीं से प्रार्थना और दुआ

लोग घरों में ही रहकर भगवान से प्रार्थना-दुआ करते रहे।

By: raktim tiwari

Published: 22 Mar 2020, 02:09 PM IST

अजमेर.

जनता कफ्र्यू ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। लेकिन लोगों ने घरों को ही मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा चर्च समझ लिया। शहर के आगरा गेट गणेश मंदिर, बजरंगगढ़ बालाजी मंदिर, अम्बे माता मंदिर, मदार गेट बालाजी मंदिर और अन्य मंदिरों में सिर्फ पुजारियों ने सुबह पूजा-अर्चना की। लोगों ने घरों में रहकर पूजन किया। हमेख्वाजा साहब की दरगाह में भी चुनिंदा खादिमों ने दुआ की। शहर के चर्च में पादरियों ने प्रेयर और गुरुद्वारों में ग्रंथियों ने अरदास की। मसीह लोग संडे चर्च के लिए नहीं पहुंचे। लोग घरों में ही रहकर भगवान से प्रार्थना-दुआ करते रहे।

नहीं मिले साधन, पैदल पहुंचे घर

कई लोग ट्रेन और निजी बसों से अजमेर पहुंच गए। रेलवे स्टेशन और रोडवेज स्टैंड पर कोई संसाधन नहीं मिले। लोगों ने पैदल घरों तक पहुंचे। कुछ लोगों को पुलिसकर्मियों ने मानवीयता के आधार पर छुड़वाया।रेलवे स्टेशन पर थर्मल स्केनिंगडीआरएम नवीन परशुरामका खुद रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहे। ट्रेन में अजमेर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों को वापस घर भेजा गया। केवल उन्हीं यात्रियों को उतरने की अनुमति दी गई, जो लम्बे सफर से अजमेर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों और लोगों की थर्मल स्केनिंग की गई।

सब तरफ सिर्फ कोरोना की चर्चा
पूरे शहर में लोगों की जुबान पर सिर्फ कोरोना की चर्चा हुई। लोग घरों में आपसी बातचीत, फोन पर रिश्तेदारों-परिजनों अथवा मित्रों से कोरोना से बचने, मास्क पहनने, रूमाल बांधने, किसी से हाथ नहीं मिलाने की हिदायतें दीं। इसके अलावा नीम की पत्ती, तुलसी की पत्ती, लौंग-काली मिर्च सेवन जैसे घरेलू नुस्खे भी बताए।

नहीं जुटे दिहाड़ी मजदूर
वैशाली नगर-एलआईसी कॉलोनी, शास्त्री नगर चूंगी नाका, नगरा-प्रकाश रोड, आदर्श नगर में अक्सर सडक़ों पर दिहाड़ी मजदूर-कारीगरों की भीड़ रहती है। जनता कफ्र्यू के चलते मजदूर-कारीगर भी नहीं जुटे। कई निजी, सरकारी भवनों में निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां भी श्रमिकों ने छुट्टी रखी।

पहली बार ऐसा नजारा....
बाबरी मस्जिद ढहाने पर अजमेर में 1992 में कफ्र्यू लगा था। इसके अलावा भारत बंद, अजमेर बंद जैसा माहौल भी कई बार रहा है। लेकिन जनता कफ्र्यू जैसा नजारा पहली बार दिखा।

डॉ. प्रवीण बहल, पूर्व प्राचार्य
अक्सर मांगें नहीं मानने पर बाजार बंद होते रहे हैं। राजनैतिक दल और अन्य संगठन भी बंद का आह्वान करते हैं। इसमें अपील जारी करनी पड़ती है। जनता कफ्र्यू में सभी नागरिकों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझी है। सबने बड़ी आपदा से निबटने में सहभागिता दिखाई है।
अशोक बिंदल, अध्यक्ष अजमेर सर्राफा संघ

raktim tiwari Reporting
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