scriptCrores spent but digital revolution did not reach 28 tehsils even afte | करोड़ों खर्च लेकिन 13 साल बाद भी 28 तहसीलों तक नहीं पहुंची डिजिटल क्रांति | Patrika News

करोड़ों खर्च लेकिन 13 साल बाद भी 28 तहसीलों तक नहीं पहुंची डिजिटल क्रांति

-मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री के गृहजिलों में भी अधूरा काम

-13 जिलों की सभी तहसीलें नहीं हो सकी ऑनलाइन
-पटवारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं काश्तकार

अजमेर

Updated: March 11, 2022 02:35:22 pm

भूपेन्द्र सिंह
अजमेर. केन्द्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तहत राज्य की तहसीलों को ऑनलाइन किए जाने का काम कछुआ चाल से चल रहा है। वर्ष 2009 से चल रह इस प्रोजेक्ट पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन राज्य के 13 जिलों की 28 तहसीलें अभी तक ऑनलाइन नहीं हो सकीं। मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर में 3 व राजस्व मंत्री के गृहजिले बाड़मेर में सर्वाधिक 5 तहसीलों को ऑनलाइन नहीं किया जा सका है। जो तहसीलें ऑनलाइन नहीं हैं वहां काश्तकार व आमजन को सामान्य कामकाज के लिए अभी भी तहसील व पटवारी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ajmer
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तहसील ऑनलाइन की स्थिति

कुल तहसीलें 369, ऑन लाइन हुई 341 ,शेष् रही 28 तहसीलें।

ई-साइन की स्थिति

कुल खाता 11383111, कुल खसरा 43138801 ।

इन जिलों में अब तक नहीं हो सकी तहसीलें ऑनलाइन
अलवर में 1, बांरा में 3, बाड़मेर में 5, बीकानेर में 1, दौसा में 3, हनुमानगढ़ में 1, जोधपुर में 3, करौली में 1, पाली में 2, सवाईमाधोपुर में 1, सिरोही में 3, टोंक में 3 तथा उदयपुर की 1 तहसील को ऑन लाइन नहीं किया जा सका।
डिजिटाइजेशन ऑफ कैडस्ट्रल मैप कार्य में यह समस्या

1-आरएफपी के अनुसार डिजिटाइजेशन हेतु अन्तिम भू-प्रबन्ध की शीटें फर्म को स्केनिंग हेतु उपलब्ध करवाए जाने का प्रावधान है, लेकिन जिला स्तर से भू-प्रबन्ध की शीटें उपलब्ध नहीं होने से मोमिया/ लट्ठा शीटें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। जिन्हें स्केन तथा जांच करने में समस्या आ रही है।
2-अन्तिम भू-प्रबन्ध बन्दोबस्त में विभिन्न प्रकार के स्केल उपयोग में लिए गए थे, सम्पूर्ण राज्य में एकरूपता बनाए रखने के दृष्टिगत फाइनल शीटें 1:4000 स्केल पर दी जानी हैं। किन्तु इस स्केल पर शीटें दिए जाने पर शीटों की संख्या में वृद्धि / कमी हो रही है। जिसके भुगतान के संबंध में आरएफपी में कोई प्रावधान नहीं है। इस बाबत राजस्व मंडल मण्डल द्वारा राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाए जा चुके हैं लेकिन अब तक निर्णय नहीं लिया जा सका।
राजस्व रिकॉर्ड कटे-फटे

कई जगहों पर राजस्व रिकॉर्ड तो कई तहसीलों में तकनीकी समस्या आड़े आ रही है। कुछ ग्रामों के नक्शे कटे-फटे व जीर्णशीर्ण हैं। मालपुरा तहसील में नक्शे ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में गांवों के पूर्ण नक्शे डिजिटाइजेशन में समस्या आ रही है। जिसके संबंध में भू-प्रबन्ध विभाग को ग्रामों की सूची उपलब्ध करवा दी गई है। कार्य पूर्ण करवाए जाने हेतु निर्णय लिया जाना अपेक्षित है।
50 साल से तरमीम ही नहीं

अधिकाशं तहसीलों में 50 वर्ष से अधिक समय से भू-प्रबन्ध कार्य नहीं होने के कारण तरमीम कार्य लम्बित होने से राजस्व कार्मिक को तरमीम में समय अधिक लग रहा है। कई तहसीलों में खसरों पर विभिन्न न्यायालयों के स्थगन हैं। कई जगह तरमीम व खसरों का बंटवारा नहीं हुआ है।
हड़ताल व कोविड भी बने कारण

पटवारियों द्वारा जनवरी 2021 से अतिरिक्त पटवार मंडल के बहिष्कार के कारण पटवारियों द्वारा काम नहीं किए जाने से तरमीम नहीं होने से डिजिटाइजेशन के कार्य में प्रगति नहीं हुई। कोविड-19 के कारण प्रशासन द्वारा महामारी के प्रबन्ध के कारण अन्य किसी प्रकार का कार्य नहीं किए जाने से कार्य पूर्ण बंद रहा।
तहसील ऑनलाइन से यह फायदा

तहसील के ऑनलाइन होने से काश्तकार को हर काम के लिए पटवारी के चक्कर से मुक्ति मिलती है। जमाबंदी, गिरदावरी और नक्शे की नकल किसी भी ई-मित्र या स्वयं के कम्प्यूटर व लैपटॉप व मोबाइल पर कहीं भी रिकॉर्ड देखा और प्रिंट लिया जा सकता है। म्यूटेशन के बाद अपडेशन स्वयं होगा, नामांतरण, अपडेट हो जाएगा। डिजिटल रिकॉर्ड नेट पर उपलब्ध होने से समस्त रिकॉर्ड, नक्शे में तरमीम अपडेट की जाती है। हर खाता अपडेट होता है। विरासत से या बेचान से अन्य किसी भी प्रकार से हो बैंक रहन या रहन मुक्ति हो खाता अपडेट हो जाएगा। बैंक लोन लेने में आसानी। रिकॉर्ड अपडेड होने से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी),प्रधानमंत्री सम्मान निधि लेने में आसानी होती है। तहसील ऑनलाइन होने से कार्मिक वर्क फ्रॉम होम भी कर सकते हैं। भविष्य में इसका विशेष फायदा होगा।

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