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इंतजार : खेतों को बुवाई और किसानों को खाद का

जिले भर में डीएपी का संकट
धरतीपुत्रों को फसलें बोने में परेशानी

अजमेर

Updated: October 22, 2021 01:35:07 am

तरूण कश्यप.

अजमेर. खाद के देशव्यापी संकट से अजमेर जिला भी अछूता नहीं है। जिले के किसान डीएपी की अनुपलब्धता के कारण परेशान हैं। रबी फसलों की बुवाई का समय आ गया है। किसानों ने खेतों की हकाई कर ली है लेकिन डीएपी नहीें मिलने से फसलें बोने में कठिनाई हो रही है।
इंतजार : खेतों को बुवाई और किसानों को खाद का
इंतजार : खेतों को बुवाई और किसानों को खाद का
तीन दिन से नहीं खाद की आपूत्र्ति

मदनगंज-किशनगढ़. किशनगढ़ में क्रय विक्रय सहकारी समिति की दुकानों पर लगातार तीन दिन से इफ्को की डीएपी खाद और एनपीके खाद की सप्लाई नहीं आई। ऐसे में अब चना और सरसों की बिजाई को लेकर किसानों की चिंता दिनों दिन बढऩे लगी है और कई किसान तो मजूबरन निजी दुकानों पर महंगे भावों में खाद की खरीदारी कर रहे हैं। किशनगढ़ की क्रय विक्रय सहकारी समिति की रूपनगढ़ रोड स्थित सहकारी समिति की मुख्य दुकान और पुरानी मिल चौराहे के पास स्थित शाखा दुकान बुधवार को भी नियमित समय पर सुबह १० बजे से शाम ५.३० बजे तक खुली। लेकिन ना ही डीएपी और ना ही एनपीके खाद की सप्लाई आई। कई किसान समिति की दुकानों पर खाद की खरीदारी के लिए आए भी, लेकिन खाद उपलब्ध नहीं होने पर पुन: निराश लौट गए।
एनपीके खाद

सहकारी समिति की मुख्य दुकान में ३० मार्च को एनपीके खाद का १७ बैग का स्टॉक था और एक अप्रेल से १५ अक्टूबर तक एनपीके खाद के स्टॉक के १७ बैग समेत ३ हजार ३०० बैग बिक्री हो गए। १६ अक्टूबर को खाद की सप्लाई नहीं आई और १७ अक्टूबर को अंतिम बार ७०० बैग बिक्री के लिए आए और एक ही दिन में यह सभी बैग बिक गए। इसके बाद से लगातार तीसरे दिन खाद की सप्लाई समिति की दुकानों पर नहीं आई।
डीएपी खाद
सहकारी समिति की दुकानों पर ३० मार्च तक डीएपी खाद के ३ हजार ९४३ बैग का स्टॉक था। एक अप्रेल से यह ३ हजार ९४३ बैग समेत १५ अक्टूबर तक ४ हजार २७० डीएपी खाद के बैग बिक गए। इसके बाद से डीएपी खाद की सप्लाई नहीं आ रही है।
दस हजार डीएपी कट्टों की डिमांड

जवाजा. किसानों का संकट कम नहीं हो रहा। मानसून की बेरूखी और अनियमितता से पहले ही नुकसान झेल चुके किसान अब डीएपी को लेकर चिंतित है। बीज बुवाई के साथ ही खेतों में डाला जाने वाले विशेष खाद किसानों को आसानी से नहीं मिल रहा। क्रय-विक्रय सहकारी समिति से डीएपी खाद के करीब 10 हजार कट्टे हर साल खेतों तक पहुंचते है। लेकिन इस बार के हालात पूरी तरह उलट है। काश्तकारों को सहकार भंडार के अलावा खुले बाजार में भी डीएपी नहीं मिल रहा। इधर, ब्यावर क्रय-विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष शहाबुद्दीन काठात का कहना है कि क्षेत्र में 10 हजार कट्टे डीएपी की डिमांड भेजी गई। किंतु डीएपी की बजाय यूरिया मिला, जिसका अधिकतर उपयोग फसल बोने के बाद रहेगा। फिलहाल डीएपी की जरूरत ज्यादा है।
देलवाड़ा (जवाजा) निवासी सुनिल चांगल का कहना है कि डीएपी कहीं नहीं है। इस साल बरसात भी कम रही। पानी का स्टोरेज नहीं है। सहकार भण्डार के अलावा दुकानों पर भी डीएपी नहीं मिल रहा। रबी की फसल मुश्किल लग रही है।
इनका कहना है...

डीएपी की कमी है। सप्लाई कम है। किसान अगर चाहे तो जैविक खेती अपना सकते हैं। कम्पोस्ट, गोबर, हरी खाद इत्यादि का खेतों में उपयोग करके भी रबी की फसल बोई जा सकती है।
-विनोद छाजेड़, सहायक उपनिदेशक, कृषि विस्तार ब्यावर

किसानों पर दोहरी मार

केकड़ी. गत दिनों हुई बेमौसम बारिश के कारण किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बारिश के कारण कई खेतों में पपड़ी जम गई। पपड़ी जमने के कारण सरसों का बीज अंकुरित नहीं हो सकता। कृषि विभाग के अनुसार पपड़ी जमने की स्थिति में दोबारा बुवाई करनी होगी। ऐसे में किसान को खाद व बीज की खरीदारी दोबारा करनी पड़ेगी। केकड़ी में वर्तमान में डीएपी खाद के ८ हजार बैग की आवश्यकता है। केकड़ी क्रय-विक्रय सहकारी समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निरूपम पाण्डेय ने बताया कि समिति की ओर से पिछले दिनों कुल २२०० बैग विक्रय किए गए है। खाद की अनुपलब्धता के बारे में पिछले दिनों केकड़ी प्रवास के दौरान चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को अवगत कराया है। जल्दी ही खाद उपलब्ध होने की उम्मीद है।
निराश होकर लौटना पड़ा

सराना. सराना जीएसएस में खाद की कमी को देखते हुए चने की बुवाई को लेकर किसान दूर-दूर से खाद लेने के लिए सराहना जीएसएस पर पहुंच रहे हैं मगर अधिकांश को निराश होकर लौटना पड़ा। क्रय विक्रय सहकारी समिति पर चना व सरसों की बुवाई के लिए इन दिनों एनपीके,एबीएपी, एडीएपी खाद का स्टॉक नहीं है। सराना रोड क्रय विक्रय सहकारी समिति की मुख्य शाखा पर किसानों की काफ ी भीड़ देखी जा सकती है। पिछले दिनों किसानों की भीड़ काबू में नहीं आने पर पुलिस को मौके पर पहुंचकर व्यवस्था बनानी पड़ी। जीएसएस व्यवस्थापक रंगलाल माली ने बताया कि डीएपी खाद का स्टॉक आया था जो किसानों को दिया गया। खाद की फि र भी कमी रही तो बिजाई के लिए और खाद मंगवाया जाएगा।
अधिकारियों को भेज रखी है डिमांड

सावर. कृषि विभाग के अनुसार सावर क्षेत्र में अब तक करीबन २०० मीट्रिक टन डीएपी खाद की आपूर्ति हो चुकी हैं तथा फसलों की बुवाई के लिए अब ३०० मीट्रिक टन डीएपी खाद की और जरूरत हैं। क्षेत्र के किसान प्रतापकुमार कहार, जगदीश माली, घीसालाल आदि ने डीएपी खाद की पर्याप्त आपूर्ति की मांग की हैं।सहायक कृषि अधिकारी बाबूलाल मीणा का कहना है कि रबी की फसलों की बुआई के लिए डीएपी खाद की कमी चली रही हैं। खाद की आपूर्ति के लिए क्षेत्र के ग्राम सेवा सहकारी समिति और खाद डीलरों ने आवश्यकता अनुसार डीएपी खाद आपूर्ति की मांग कर डिमाण्ड आगे भेज रखी हैं। सावर क्षेत्र में अभी और ३०० मीट्रिक टन डीएपी खाद की जरूरत हैं। डीएपी खाद की मांग अनुसार आपूर्ति के लिए विभाग के आला अधिकारियों को अवगत कराया गया हैं।
बुवाई में हो रही देरी

भिनाय. कस्बे में गत तीन दिनों से डीएपी खाद नहीं मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम सेवा सहकारी समिति व्यवस्थापक शोभाराम माली ने बताया कि १८४० कट्टे दिए जा चुके हैं। २००० खाद के कट्टों की और मांग की हुई है। शुक्रवार तक आपूर्ति होने की उम्मीद है। ग्राम कनेईकला निवासी किसान विष्णु दत्त शर्मा ने बताया कि डीएपी खाद नहीं मिलने से सरसों व चना की बुवाई करने में देरी हो रही है।
सब्सिडी बढ़ाने पर विचार

डीएपी की आपूर्ति के लिए सरकार ने हाल ही में रूस के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद डीएपी की कीमतों को स्थिर रखना है। साथ डीएपी की उपलब्धता के लिए भारत की जॉर्डन, चीन और मोरक्कों पर से कम करना है। उर्वरक मंत्रालय ने भी सभी कम्पनियों को निर्देश दिए हैं कि वे उर्वरकों की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं करें। माना जा रहा कि डीएपी की कीमतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार फर्टिलाइजर कम्पनियों को मिलने वाली सब्सिडी में में बढ़ोतरी कर सकती है।
यह हो सकते हैं विकल्प

खाद के संकट को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को इसके विकल्प बताए हैं। पहला विकल्प सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी)है। दूसरा नाइट्रोजन फॉस्फोरस व पोटेशियम (एनपीके)है। एसएसपी के दो कट्टे व यूरिया के एक कट्टे का मिश्रण डीएपी के एक कट्टे के बराबर है। वहीं एनपीके के डेढ़ कट्टे एसएसपी के एक कट्टे के बराबर हैं।

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