कार्मिक विभाग का फरमान : रिटायर्ड एसीएमएचओ डॉ. हरचंदानी को चार्जशीट देने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई

कार्मिक विभाग की संयुक्त शासन सचिव मंजू राजपाल ने माना कि डॉ. हरचंदानी को बेवजह किया परेशान,
पांच साल बाद भी सेवानिवृत्ति परिलाभ रोकना माना अनुचित

By: suresh bharti

Published: 22 Jul 2021, 12:47 AM IST

Ajmer अजमेर. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. लक्ष्मण हरचंदानी को चार्जशीट थमाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश राज्य सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से जारी किए गए हैं। वहीं सेवानिवृत्ति के पांच साल बाद भी उन्हें अन्य परिलाभों से वंचित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से आदेश की प्रतियां छिपाने व देरी से जारी करने का डॉ. हरचंदानी ने आरोप लगाया है।

जांच में आरोप मिले निराधार

कार्मिक विभाग की संयुक्त शासन सचिव मंजू राजपाल ने गत 2 अप्रेल को आदेश जारी कर अजमेर के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच निराधार पाए जाने व उनके विरुद्ध आरोप अप्रमाणित मानते हुए विभाग द्वारा हैरान-परेशान करने की नीयत से चार्जशीट जारी कर समय नष्ट करने की बात कही है। उन्होंने चार्जशीट जारी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने को भी कहा है।

तीन माह बाद मिली आदेश की प्रति

सेवानिवृत्त डॉ. हरचंदानी ने आरोप लगाया कि विभागीय जांच में जारी आदेश की अप्रेल की प्रति उन्हें सीमएचओ अजमेर की ओर से 14 जुलाई को उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने स्वयं को बेवजह परेशान करने का आरोप भी लगाया।

यह था मामला

डॉ. हरचंदानी पर आरोप था कि 21 नवम्बर 2005 से एडिशनल सीएमएचओ (प.क.) अजमेर के पद पर रहते हुए 7 मार्च 20211 से 29 जुलाई 2013 तक सीएमएचओ अजमेर का कार्यभार भी वहन किया। इस अवधि में पद का दुरुपयोग करते हुए 3 जून 2013 को वरिष्ठ लिपिक पृथ्वीराज बुंदेल को निलम्बित कर मुख्यालय अति. निदेशक (प्रशासन) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राज. जयपुर कर दिया। लिम्बन आदेशों का अनुमोदन नहीं करते हुए इन आदेशों को समस्त परिलाभ दिए जाने के आदेश दिए गए।

लापरवाही व गंभीर दुराचरण के आरोप लगाए

डॉ. हरचंदानी पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गलत आदेश प्रसारित करते हुए 283562.81 की राजकीय राशि का अपव्यय कारित करने व लापरवाही व गंभीर दुराचरण के आरोप लगाए। हालांकि जांच अधिकारी ने आरोप अप्रमाणित पाए। सेवानिवृत्त सीएमएचओ डॉ. राजेश खत्री व सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जयपुर ने भी अपने बयानों में हरचंदानी के पद के दुरुपयोग व राजकोष को हानि पहंचाने का तथ्य प्रमाणित नहीं होना स्वीकार किया है।

विधिक नोटिस दिया

डॉ.हरचंदानी ने अपने वकील प्रीतम सिंह सोनी के जरिए चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव को विधिक नोटिस देकर परिलाभ दिलाने की मांग की है। साथ ही नोटिस में उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाकर प्रताडि़त करने व सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले परिलाभ से वंचित करने के दुराशय व षडय़ंत्र रचने का आरोप लगाया है। नोटिस में पूर्व जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. बी. आर. मीणा, मौजूदा निदेशक डॉ. ओ. पी. थाकन, अतिरिक्त निदेशक डॉ. गजेन्द्र सिंह सिसोदिया, तत्कालीन संयुक्त निदेशक को पक्षकार बनाया गया है।

suresh bharti Desk
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