महिला सुपरवाइजर बोली : निकलो दफ्तर से बाहर, काम तो करती नहीं...आ गई सरकारी नौकरी मांगने !

भिनाय उपखंड मुख्यालय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बदसलूकी, गुस्साई आशा सहयोगिनियों ने महिला एवं बाल विकास कार्यालय पर किया प्रदर्शन, आरोपी महिला सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग, मीडियाकर्मियों को भी समाचार कवरेज करने से रोका

By: suresh bharti

Updated: 20 Oct 2020, 11:59 PM IST

ajmer अजमेर. भिनाय उपखंड मुख्यालय स्थित महिला एवं बाल विकास कार्यालय पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब वहां मौजूद महिला सुपरवाइजर ने आशा सहयोगिनियों को दफ्तर से बाहर निकलने को कहा। साथ में कामचोर, लापरवाह और व्यर्थ का मानदेय लगाने के आरोप लगाए। दरअसल, आशा सहयोगिनियां मंगलवार को नौ सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन देने गई थी,लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलने पर महिला सुपरवाइजर को ज्ञापन देना चाहा।

इस दौरान तकरार के बीच मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए। आरोप है कि महिला सुपरवाइजर ने कहा कि आंगनबाडिय़ों पर ताले लटके रहते हैं। आशा सहयोगिनियां बच्चों को पोषाहार नहीं खिलाती। इनको राज्य सरकार फोकट में हर माह 2700 रुपए का मानदेय दे रही है। यह सुनकर आशा सहयोगिनियां भड़क गई। विरोध प्रदर्शन के बीच नारे लगाने से माहौल गर्मा गया।

तुम जैसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती

महिला सुपरवाइजर ने साफ कहा कि आशा सहयोगिनियां काम तो करती नहीं और आ गई सरकारी नौकरी मांगने। तुम जैसी को मांगें मान ली तो संविदा कार्मिकों का क्या होगा। आंगनबाड़ी पर काम ही कितना सा होता है। अरे...यह तो हमारी मेहरबानी है जो तुमको मानदेय तो मिल रहा है...वर्ना तुम तो इसके काबिल भी नहीं हो।

इसके जवाब में आशा सहयोगिनियों ने भी कहा कि सरकारी योजनाओं से पात्र परिवारों को लाभान्वित कराने, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लक्ष्य पूरे करने, महिला व बच्चों को कुपोषण से बचाने, गर्भवती महिलाओं व बच्चों के टीके सहित कई कार्य कौन करता है? कोरोना संक्रमण के समय आशा सहयोगिनियां गली-मोहल्लों व घरों पर निगरानी के लिए तैनात रही। ढाई हजार रुपए के मानदेय में और कितना काम कराओगी मैडम...।

आज से कार्य बहिष्कार

प्रदेश की आशा सहयोगिनियां बुधवार से कार्य का बहिष्कार कर आंदोलन का आगाज करेंगी। भिनाय उपखण्ड अधिकारी संजू मीणा को ज्ञापन देकर नौ सूत्रीय मांगें स्वीकार करने की सरकार से मांग की गई। वास्तव में आशा सहयोगिनियां महिला एवं बाल विकास अधिकारी को ज्ञापन देने गई थी, लेकिन वहीं कार्यवाहक अधिकारी की गैरहाजिरी में महिला सुपरवाइजर को ज्ञापन देना चाहा। तभी दोनों पक्षों के बीच तकरार होने के बाद विवाद बढ़ गया।

वीडियो डिलिट करो, समाचार मत छापना

आरोप है कि आशा सहयोगिनियों और महिला सुपरवाइजर के बीच विवाद होने का मोबाइल वीडियो बना लिया गया। साथ में मीडियाकर्मी रिपोर्टिंग कर रहे थे। यह देख महिला सुपरवाइजर ने कहा कि वीडियो डिलिट करिए.. मामले को क्यों बेकार में तूल दे रहे हो। कुछ उल्टा-सीधा समाचार छापोगे....मेरा फोटो क्यों खींच रहे है....बंद करो यह सब...जवाब में मीडियाकर्मियों ने कहा-मैडम हम तो लाइव कवरेज कर रहे हैं। इसमें किसी तरह का पक्षपात या या गलत नहीं है। आपको अपना पक्ष रखना है तो बताइए...। वह बोली-मुझे कुछ नहीं कहना मेरे ऊपर भी अधिकारी हैं...

कोई ज्ञापन लेने से मना नहीं कर सकता

हंगामे के बाद कार्यवाहक महिला एवं बाल विकास अधिकारी सत्यनारायण केवट ने कहा कि विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी ज्ञापन लेने से मना नहीं कर सकता। आशा सहयोगिनियों को धमकाना गलत बात है। मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता की निंदा करता हूं। मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

suresh bharti Desk
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