डीएपी को लेकर न हों परेशान, एसएसपी भी है समस्या का समाधान

सरकार बोली- सरसों में सिंगल सुपर फॉस्फेट है विकल्प, सस्ता भी और कारगर भी - चंद व्यापारी मुनाफाखोरी के लिए कर रहे डीएपी ब्लैक

 

डीएपी को लेकर परेशान हो रहे किसानों को राज्य सरकार ने एसएसपी का विकल्प अपनाने की सलाह दी है। राज्य के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में डीएपी की आपूर्ति में सुधार लाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारी किसानों को विकल्प के तौर पर सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।

By: Dilip

Published: 11 Oct 2021, 01:23 AM IST

धौलपुर. डीएपी को लेकर परेशान हो रहे किसानों को राज्य सरकार ने एसएसपी का विकल्प अपनाने की सलाह दी है। राज्य के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में डीएपी की आपूर्ति में सुधार लाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारी किसानों को विकल्प के तौर पर सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
धौलपुर कृषि विभाग के उपनिदेशक विजय सिंह डागुर के अनुसार कृषि मंत्री कटारिया ने बताया कि हमारे देश में डीएपी उर्वरक की आपूर्ति काफी हद तक विदेशी आयात पर निर्भर है। इस साल आयात कम होने से पूरे देश में ही डीएपी की मांग एवं आपूर्ति में अंतर बढ़ गया है, जिससे अन्य राज्यों के साथ ही राजस्थान भी प्रभावित हुआ है। केन्द्र सरकार ने राज्य में इस साल अप्रेल से सितम्बर माह के दौरान 4.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरुद्ध 3.07 लाख मैट्रिक टन डीएपी ही आपूर्ति की। साथ ही अक्टूबर महीने में 1.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरुद्ध 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी स्वीकृत की है। इससे राज्य में डीएपी की कमी हो गई है।

अतिरिक्त सल्फर के कारण एसएसपी अपेक्षाकृत अधिक लाभदायक

कृषि मंत्री के निर्देशानुसार कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरक सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके का उपयोग करने की सलाह दे रहा है, ताकि डीएपी की कमी से संभावित नुकसान से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि एसएसपी एक फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें 18 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा पाई जाती है। इसमें उपलब्ध सल्फर के कारण यह उर्वरक तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए अन्य उर्वरकों की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता है।

कर रहे आपूर्ति में सुधार का प्रयास

राज्य सरकार डीएपी की आपूर्ति में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मंत्री ने बताया कि वे स्वयं और कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों से दैनिक सम्पर्क बनाए हुए हैं और डीएपी आपूर्ति में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने आपूर्ति में सुधार कर डीएपी की कमी को दूर करने के लिए आश्वस्त किया है।

एसएसपी डीएपी की तुलना में सस्ता एवं बाजार में आसानी से उपलब्ध

मंत्री कटारिया ने बताया कि एसएसपी उर्वरक डीएपी की तुलना में सस्ता एवं बाजार में आसानी से उपलब्ध है। प्रति बैग डीएपी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 9 किलोग्राम नाइट्रोजन पाई जाती है। यदि विभागीय सलाह अनुसार डीएपी के विकल्प के रूप में 3 बैग एसएसपी एवं 1 बैग यूरिया का प्रयोग किया जाता है, तो इससे भी कम मूल्य पर अधिक नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस तथा अतिरिक्त सल्फर प्राप्त किया जा सकता है। इससे 24 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम नाइट्रोजन एवं 16 किलोग्राम सल्फर मिलता है। उन्होंने बताया कि डीएपी के एक बैग की कीमत 1200 रुपए है, वहीं एसएसपी के 3 बैग की लागत 900 रुपए एवं यूरिया के एक बैग की लागत 266 रुपए सहित कुल 1166 रुपए खर्च होंगे, जो डीएपी के खर्चे से कम है। मंत्री ने काश्तकारों के मध्य एसएसपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं।

धौलपुर में यह स्थिति

जिले में वर्तमान में 450 मैट्रिक टन डीएपी तथा 1150 मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरक उपलब्ध है। कृषि अधिकारियों के अनुसार सरसों बुवाई के लिए एसएसपी का उपयोग किया जाए तो 20 अक्टूबर तक गेहूं की बुवाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीएपी की आपूर्ति हो सकेगी।

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