बारिश की मार, मनरेगा में नहीं मिला रोजगार

जिले में घट गई मनरेगा श्रमिकों की संख्या, जून में आंकड़ा पार कर गया था 25 हजार, अब रह गए सिर्फ 6 हजार

गांवों से पलायन रोकने और गांव में ही रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू करने वाले तत्कालीन केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद की पुण्यतिथि पर ही जिले में मनरेगा में रोजगार औंधे मुंह गिर गया है। कोरोना के बाद जिले में जहां जून माह में श्रमिकों की संख्या 25 हजार पार कर गई थी, वहीं सितम्बर माह में मात्र 6 हजार ही श्रमिक रह गए हैं।

By: Dilip

Published: 14 Sep 2021, 01:04 AM IST

महेश गुप्ता

धौलपुर. गांवों से पलायन रोकने और गांव में ही रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू करने वाले तत्कालीन केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद की पुण्यतिथि पर ही जिले में मनरेगा में रोजगार औंधे मुंह गिर गया है। कोरोना के बाद जिले में जहां जून माह में श्रमिकों की संख्या 25 हजार पार कर गई थी, वहीं सितम्बर माह में मात्र 6 हजार ही श्रमिक रह गए हैं। जिले में 191 पंचायतों में से जहां 182 पंचायतों में कार्य चल रहे थे, वहीं अब केवल 85 पंचायतों में ही कार्य संचालित हैं। ऐसे में रोजगार की स्थिति डांवाडोल है। इसका प्रमुख कारण बारिश बताया जा रहा है। बारिश के कारण गांवों में आए बाढ़ के पानी से पोखरों तथा खेतों व खाली जमीन में पानी भरने के कारण साइट बंद कर दी गई थी। इस कारण ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल पाया। अब ग्रामीणों को फिर से रोजगार देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

यह है जिले में रोजगार की स्थिति
जिले में पांच ब्लॉक की कुल 191 ग्राम पंचायतों में से केवल 85 में ही कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 825 मस्टररोल स्वीकृत हैं और 6 हजार 375 श्रमिक ही कार्यरत हैं। इसमें सैंपऊ ब्लॉक में 39 पंचायतों में से 26 में कार्य स्वीकृत कर रखे हैं। इनमें 2093 श्रमिक नियोजित हैं। बसेड़ी की 19 पंचायतों में 1502, बाड़ी की 35 में से 18 पंचायतों में 1419, धौलपुर की 35 पंचायतों में से 16 पंचायतों में 759 तथा राजाखेड़ा की 32 पंचायतों में से केवल 6 पंचायतों में ही कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 602 श्रमिक ही नियोजित हैं। जिले में कुल 304 कार्य ही स्वीकृत हैं।

नहीं मिट रहा कोरोना का दंश
जिले में कोरोना काल में बड़ी संख्या में रोजगार छिन गए थे। वहीं दूसरे शहरों व महानगरों में रहने वाले लोग भी गांव में आ गए। ऐसे में रोजगार की समस्या पैदा हो गई। इसके चलते कोरोना के बाद शुरू किए गए मनरेगा कार्यों में बड़ी संख्या में श्रमिक नियोजित हुए। अब बारिश के कारण काम बंद कर दिए गए। ऐसे में लोगों को रोजगार नहीं मिला। वहीं, बसेड़ी पंचायत समिति में तो एक ग्राम विकास अधिकारी ने मस्टररोल में नाम जोडऩे के लिए 15 हजार घूस मांग ली। जिसे एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। राज्य सरकार का मानना था कि स्थानीय लोगों तथा बाहर से आए प्रवासियों को स्थानीय स्तर ही रोजगार मिल सके। इसके लिए मनरेगा में बड़ी संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए।

यह होते हैं प्रमुख कार्य
मनरेगा में प्रमुख तौर पर जल संरक्षण के कार्य स्वीकृत किए जाते हैं। लेकिन वर्तमान में बारिश के कारण इनको भी बंद कर दिय गया है। वहीं सिंचाई विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा वन विभाग की ओर से भी पौधरोपण, तालाब खुदाई, ग्रेवल सड़क निर्माण कार्य भी कराए जा रहे है। अब तारबंदी, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित ग्रेवल सड़क के कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिससे श्रमिकों को रोजगार मिल सके। टेबिल ब्लॉक वार श्रमिकों की स्थिति

ब्लॉक पंचायत श्रमिकबाड़ी 18 1419बसेड़ी 19 1502धौलपुर 16 759राजाखेड़ा 6 602सैंपऊ 26 2093कुल 85 6075
इनका कहना है

जिले में बारिश के कारण पोखरों, तालाबों तथा जमीनों में पानी भर गया था। इस कारण कार्य बंद कर दिए गए। इससे श्रमिक संख्या घट गई थी। अब फिर से कार्य स्वीकृत कर श्रमिकों को नियोजित किया जा रहा है। इसके लिए सभी विकास अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। जिससे अधिक से अधिक लोगों को कार्य उपलब्ध हो सके।
चेतन चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, धौलपुर

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