पुष्कर में सोमवती अमावस पर गायब रही रौनक, लक्ष्मीपोल का मेला फीका

तीर्थ नगरी पुष्कर में कोरोना संक्रमण का असर,धार्मिक आयोजन को लेकर औपचारिकताएं,विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल हुई नदारद

By: suresh bharti

Published: 20 Jul 2020, 11:34 PM IST

अजमेर/पुष्कर. तीर्थ नगरी पुष्कर में श्रावण मास की सोमवती अमावस को श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन इस बार संख्या काफी कम रही। वैसे ब्रह्मा की नगरी पुष्कर में पूरे साल श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

इस साल कोरोना महामारी के प्रभाव से पिछले चार माह से पुष्कर में सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन बंद हैं। कुछ कार्यक्रमों की सिर्फ औपचारिकताएं बरती जा रही है। परदेसी पर्यटकों से आबाद रहने वाले पुष्कर में इन दिनों सिर्फ स्थानीय लोग अधिक हैं।

यहां की तमाम होटलें सूनी हैं। मंदिरों में घंटे-घडिय़ाल और आरती की गूंज जरूर होती है, लेकिन श्रद्धालुओं की कमी है। सोशल डिस्टेंसिंग की सरकारी एडवाइरी भी एक वजह है।

पितृों की शांति के लिए पिण्डदान व तर्पण

सावन माह आधा बीत गया। इस दौरान पुष्कर में कोई चहल-पहल ही नहीं दिखी। सोमवार को सोमवती अमावस को अपने पितृों की शांति के लिए पिण्डदान व तर्पण किए। कोरोना में पाबंदियों के चलते घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम रही। सुबह से ही सरोवर के वराह व गऊ घाट पर सोमवती अमावस तिथि पर स्नानार्थियों की आवक शुरू हो गई जो पूरे दिन चली। पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाकर पुरोहितों को दान दक्षिणा दी गई।

नाग पहाड़ी रही सूनी

सावन मास की हरियाली अमावस पर नाग पहाड़़ी इस बार सूनी रही। हर साल यहां हजारों लोग पूजा के लिए जाते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालुओं ने परहेज किया। वैसे श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा की,लेकिन संख्या नगण्य रही। अजमेर के पूर्व राजा पृथ्वीराज चौहान के ध्वस्त किले की ड्योढ़ी को लक्ष्मीपोल के रूप में पूजे जाने की परम्परा है। इस बार यहां रौनक गायब थी। पुष्कर कस्बे के युवाओं ने अलग-अलग पहाड़ी की चोटी पर चढक़र लक्ष्मीपोल के पुष्प, नारियल अर्पित किए।

गुर्जर समाज नाग पहाड़ी को उनके आराध्य भगवान देवनारायण का अतिशय क्षेत्र मानता आया है। इसी नाग पहाड़ी पर झंडारोहण किया जाता है, लेकिन कोरोना के चलते इस बार गुर्जर समाज के कुछ ही श्रद्धालु नाग पहाड़ी पर पहुंचे। इसके चलते लक्ष्मीपोल का मेला फीका रहा।

suresh bharti Desk
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