scriptElevated Road: Expenditure of 141 crores to the central government, se | एलीवेटेड रोड: केन्द्र सरकार को 141 करोड़ का खर्च, भेजी यूसी, स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक खर्च बताया 135 करोड़ | Patrika News

एलीवेटेड रोड: केन्द्र सरकार को 141 करोड़ का खर्च, भेजी यूसी, स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक खर्च बताया 135 करोड़

एलीवेटेड रोड के लिए 98.21 करोड़ एडवांस भुगतान

भुगतान में हो रहा फर्जीवाड़ा

 

अजमेर

Updated: March 29, 2022 09:39:03 pm

अजमेर. शहर में दो साल की देरी से निर्माणाधीन चल रहे एलीवेटेड रोड निर्माण के भुगतान में नित नया फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए 252 करोड़ रूपए मंजूर किए गए है। इनमें केवल 135.16 करोड़ रूपए का काम ही साईट पर हुआ है। जबकि स्मार्ट सिटी कम्पनी ने फर्म को 233.37 करोड़ रूपए का भुगतान का दिया गया। मामले मेें खास यह है कि निर्माण कम्पनी आरएसआरडीसी की ओर से की ओर से केन्द्र सरकार को 14 मार्च 2022 को भेजे गए उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) में 141 करोड़ रूपए एलीवेटेड रोड पर किए जाने की जानकारी दी गई। जबकि स्मार्ट िसटी की 22 मार्च 2022 को बोर्ड बैठ में रखे गए प्रस्ताव के अनुसार एलीवेटेड रोड की साइट पर निर्माण पर वास्तिवक खर्च 135.16 करोड़ बताते हुए इसे मंजूर करवाया गया है। ऐसे में साफ नजर आ रहा है स्मार्ट सिटी की ओर से केन्द्र सरकार को गलत जानकारी भेजी गई।
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एडवांस भुगतान के लिए एडवाइजरी दरकिनारनियमानुसार फर्म पर देरी के पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए जबकि ऐसा नहीं कर निर्माण फर्म को करीब 98.21 करोड़ का एडवासं भुगतान बिना काम के ही करते हए उपकृृत किया गया। इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से जारी की गई एडवाइ्जरी को भी दरकिनार कर दिया गया। जिसमें साफ लिखा है कि किसी भी कम्पनी को एडवांस भुगतान नहीं किया जाए। राजस्थान पत्रिका ने 20 मार्च के अंक में एलीवेटेड रोड के एडवासं भुगतान का स्मार्ट सिटी की रैंकिग सुधारन का खुलासा किया था।
इनका कहना हैइस मामले में स्मार्ट सिटी के अभियंताओं से जस्टीफिकेशन मांगा गया है।

अंश दीप, जिला कलक्टर एंव सीईओ, स्मार्ट सिटी, अजमेर

बिना काम, दिये दाम: सफाई ठेका कंपनी को कर दिया 7 करोड़ का भुगतान !
अजमेर. अजमेर नगर निगम के पूर्व पार्षद सत्यनारायण गर्ग ने हैदराबाद की सफाई कंपनी को कमियों की जांच का सत्यापन किये बगैर सात करोड़ रुपये के अधिक भुगतान का आरोप लगाया है।
चार साल रहा था ठेका

गर्ग ने बताया कि नगर निगम ने 2008 से 2011 तक नगर के कचरा प्रबंधन के लिए हैदराबाद की कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी के काम में काफी कमियां थी। जिनकी सत्यता की जांच के बिना ही कंपनी को लगभग 7 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। कमी होने के बावजूद भुगतान की गयी राशि की कोई रिकवरी नहीं की गयी।
आरटीआई में खुला मामला

गर्ग ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी द्वारा 2008 में 3 वर्ष का ठेका लिया गया था। जिसकी अवधि 2011 को पूर्ण हो गई थी । सूचना के अधिकार के तहत कंपनी द्वारा निर्धारित सफाई कार्य पूर्ण नहीं किये जाने का मामला उजागर हुआ। शहर के अनेक वार्ड से समयबद्ध और वजन के अनुसार कचरा भी नहीं उठाया गया। उसके बावजूद कंपनी को नगर निगम द्वारा भुगतान कर दिया गया। कम्पनी ने जिन वार्ड में कचरा नहीं उठाया उसका भी भुगतान प्राप्त कर लिया।
सरकार तक पहुंचा था मामला

गर्ग ने बताया कि इस मामले को स्वायत्त शासन विभाग में भी ले जाया गया लेकिन अभी तक तत्कालीन नगर निगम आयुक्त, मेयर व स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ कोई जांच दल गठित नहीं किया गया और ना ही कोई कार्रवाई की गयी। फिलहाल यह मामला लोकायुक्त में भी चल रहा है लेकिन नगर निगम सही जानकारी नहीं भेज रहा।

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