Exam Issue: परीक्षाओं पर संकट के बादल, असमंजस में विद्यार्थी

कॉलेज की तृतीय वर्ष की परीक्षाओं पर नहीं कोई फैसला । सीबीएसई की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का भी विरोध।

By: raktim tiwari

Updated: 25 Aug 2020, 07:44 AM IST

अजमेर.

कॉलेज-विश्वविद्यालय और सीबीएसई की परीक्षाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जहां तृतीय वर्ष की परीक्षाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी और विद्यार्थी आमने-सामने हैं। वहीं सीबीएसई की सप्लीमेंट्री और परफॉरमेंस सुधार परीक्षाओं का भी विरोध जारी है। हजारों विद्यार्थी परेशान और असमंजस में हैं।

सीबीएसई के सभी रीजन में 1.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के पूरक आई है। अजमेर रीजन में इस बार बारहवीं में 10 हजार 361 और दसवीं में 3 हजार 559 विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री के योग्य माना गया है। इसके अलावा बोर्ड ने विद्यार्थियों को परफॉरमेंस सुधार परीक्षा का विकल्प भी दिया है। बोर्ड विद्यार्थियों से परीक्षा फॉर्म भरवा चुका है।

कॉलेज-यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं पर संकट
कोरोना संक्रमण के चलते दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई राज्य कॉलेज और विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को स्थगित कर चुके हैं। यूजीसी बीए, बीएससी, बी.कॉम तृतीय वर्ष की परीक्षाएं कराना चाहती है। इसके लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक का वक्त दिया गया है। यूजीसी के फैसले के खिलाफ कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। लेकिन फिलहाल परीक्षाओं पर संकट कायम है।

तृतीय वर्ष के हजारों विद्यार्थी परेशान
कॉलेज और यूनिवर्सिटी के तृतीय वर्ष के विद्यार्थी परेशान हैं। अगस्त बीतने वाला है। इसके बावजूद परीक्षाओं को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि जोधयपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को प्रमोट करने की घोषणा कर चुका है। राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के एकेडेमिक कौंसिल ने कोई फैसला नहीं लिया है।

सीबीएसई की परीक्षाओं का विरोध
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स ऐसोसिएशन ने सीबीएसई की पूरक और परफॉरमेंस सुधार परीक्षा कराने का विरोध किया है। ऐसोसिएशन ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल को पत्र लिखकर बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते हालात खराब हैं। परीक्षा के बजाय आंतरिक मूल्यांकन और पिछले प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करना चाहिए।

क्या कहते हैं विद्यार्थी
तृतीय वर्ष की परीक्षाएं कराने अथवा नहीं कराने को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए। हजारों विद्यार्थी परेशान हैं। एक तरफ उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई तो दूसरी तरफ परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ रही है।
आशूराम डूकिया, महानगर मंत्री अभाविप
राज्य सरकार जुलाई में ही विद्यार्थियों को प्रमोट करने की घोषणा कर चुकी है यूजीसी तृतीय वर्ष की परीक्षा कराना चाहती है। विद्यार्थी असमंजस में है। स्थिति तो यूजीसी को साफ करनी चाहिए।
नवीन सोनी, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष

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raktim tiwari Reporting
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