मिलावटी कलाकंद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी, साढ़े सात क्विंटल मिष्ठान बरामद,जांच के लिए सैम्पल भरे

शादियों के सीजन को देखते हुए नकली पदार्थों की विशेष निगरानी के चलते मंगलवार सुबह पुरानी भोदन में पहाड़ी के पास एक भवन में मिलावटी कलाकंद बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारा गया। यहां से पूरे जिले में शादियों के समय नकली कलाकंद सप्लाई किया जाता है।

By: suresh bharti

Published: 17 Feb 2021, 01:26 AM IST

अजमेर/झुंझुनं. शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाएं या फिर कानून की सख्ती क्यों न दिखाना पड़े। सैम्पल लेकर प्रयोगशाला में भेजा जाए या फिर अदालत से सजा मिले। मिलावटखोरी बाज नहीं आ रहे। पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को झुंझुनूं जिले के सिंघाना समीप भोदन गांव में मिलावटी कलाकंद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। मौके से मिलावटी सामग्री,उपकरण व बड़ी मात्रा में नकली कलाकंद बरामद किया गया है।

थानाधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि शादियों के सीजन को देखते हुए नकली पदार्थों की विशेष निगरानी रखी जा रही थी। मंगलवार सुबह मुखबीर की सूचना मिली कि पुरानी भोदन में पहाड़ी के पास एक भवन में मिलावटी कलाकंद बनाया जा रहा है। यहां से पूरे जिले में शादियों के समय नकली कलाकंद की आपूर्ति की जाती है।

मौके पर दबिश

सूचना पर जिला स्पेशल टीम व सिंघाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर मौके पर दबिश दी। यहां मिलावटी कलाकंद बनाया जा रहा था। मौके से दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। सूचना पर खाद्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। फैक्ट्री से साढ़े सात क्विंटल कलाकंद बरामद किया है। खाद्य विभाग के प्रभारी महेश कुमार ने कलाकंद के सैम्पल भरे हैं। गोदाम को सीज कर दिया गया।

अलवर के नाम से बेचते थे कलाकंद

फैक्ट्री में बनने वाला कलाकंद अलवर के नाम से बेचा जाता था। जिससे की लोगों को शक नहीं हो। थानाधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि पहले ये लोग ग्राहक ढूंढते थे कि कौन सी पार्टी सस्ता माल ले सकती है। इसके बाद ये उनसे सम्पर्क कर वहां पर अपने कलाकंद की सप्लाई देते थे।

एक किलो के 180 रुपए

थानाधिकारी ने बताया कि आरोपी 180 रुपए प्रति किलो के भाव से कलाकंद बेचते थे। जबकि मार्केट में असली कलाकंद के भाव करीब 320 रुपए प्रति किलो हैं। यह कलाकंद वे पूरे जिले के मिष्ठान भंडारों पर बेचते थे। शादी के सीजन पर ज्यादा माल बनाते थे।

चावल व केमिकल का इस्तेमाल

थानाधिकारी ने बताया कि कलाकंद बनाने वाली नकल फैक्ट्री में चावल, चीनी, सूजी, मैदा, रिफाइड तेल, मिल्क पाउडर, चासनी नुमा तरल पदार्थ व केमिकल का उपयोग कर नकली कलाकंद बनाते थे।

चिकित्सा विभाग ने आंखों पर क्यों बांधी पट्टी ?

चिकित्सा विभाग में लम्बे समय से जमे जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले में मिलावट का कारोबार हो रहा है। जब पुलिस को नकली फैक्ट्री का पता चल सकता है तो जिसके पास इसका जिम्मा है उसे पता क्यों नहीं चलता? पिछले वर्ष भी सिंघाना के निकट पचेरी में नकली पनीर बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। तब भी पुलिस ने कार्रवाई की थी। चिकित्सा विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। लोगों का कहना है बिना सरकारी विभाग की मिलीभगत के इतनी बड़ी फैक्ट्री कैसे चल सकती है?

सात साल की सजा का प्रावधान

अधिवक्ता राजेश यादव के मुताबिक नकली कलाकंद पकड़े जाने पर सात साल की सजा का प्रावधान है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में अलग से सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद मिलावटियों में भय नहीं है।

खराब हो सकता है लीवर

डॉ. रामकला यादव के अनुसार मिलावटी कलाकंद से शरीर को काफी नुकसान होते हैं। जिससे उल्टी-दस्त होना, स्कीन एलर्जी तथा लीवर का खराब होना सहित अन्य नुकसान होते है।

suresh bharti Desk
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